कानून बदल डालो, फांसी दो कानून को - वेद प्रकाश शर्मा kanoon Badal Dalo, Fansi Do Kanoon Ko - Hindi book by - Ved Prakash Sharma
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कानून बदल डालो, फांसी दो कानून को

वेद प्रकाश शर्मा

प्रकाशक : राजा पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :382
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 9409
आईएसबीएन :9789332424760

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

दहकता हुआ एक शोला ‘सांय’ की आवाज के साथ उसके कान को स्पर्श करता निकल गया।

एक क्षण के लिए उसके दाएं हाथ की उंगलियों के बीच दबा एक्सीलरेटर कंपकपा गया। चिकनी और साफ सड़क पर दौड़ती मोटर साइकिल किसी शराबी की तरह लड़खड़ा उठी।

मगर अगले ही पल !

चालक ने खुद को संयत किया, हैंडिल संभाला और एक्सीलरेटर को घुमाता ही चला गया। पहले ही से गजब की तेजी से दौड़ती मोटर साइकिल की रफ्तार तूफानी हो उठी। उसके सामने भी - साफ, चौड़ी और किसी ग्रामीण महिला की मांग की तरह सीधी सड़क। दूर तक सड़क के दोनों तरफ लगे रॉड चमक रहे थे। मोटर साइकिल के माथे पर लगी हैड लाइट चालक के सामने का भाग रोशन कर रही थी।

हवा की-सी गति से उसकी मोटर साइकिल उड़ी चली जा रही थी।

उसके सम्पूर्ण जिस्म पर स्याह कपड़े थे - एकदम काले। काली चुस्त पैंट और चमड़े की जाकिट, सिर पर चमड़े का हैट और हाथों में चमड़े के दस्ताने। उसके चेहरे का अधिकांश भाग छुपा हुआ था। मोटर साइकिल के कैरियर में एक बड़ी-सी काली अटैची लगी हुई थी। उसकी ड्राइविंग का ढंग बता रहा था कि वह इस फन में माहिर है।

इस वक्त वह अपनी योग्यता का पूरा प्रयोग कर रहा था। करता भी क्यों नहीं ?

प्रश्न जिन्दगी और मौत का था।

अपना दबाव ऐक्सीलरेटर पर उसी तरह बढ़ाए रखकर उसने पीछे देखा। एक पुलिस जीप बराबर गति से मुकाबला करती हुई उसके पीछे दौड़ रही थी। जीप की दोनों आंखों से निकले रोशनी के ढेर सारे झाग सड़क पर जीप के आगे-आगे दौड़ रहे थे। जीप अभी उससे इतना पीछे थी कि उसकी आंखों की रोशनी के दायरे में वह नहीं आया था।

वह अच्छी तरह जानता था कि पीछे जीप में पुलिस है। यह भी वह अच्छी तरह समझता था कि पुलिस के हाथ आ जाने का सीधा मतलब है-मौत ! और किसी भी तरह उन्हें धोखा देकर उनके हाथ से निकल जाने का मतलब है ऐशो-आराम और रईसी ठाट-बाट से भरी इज्जत की जिन्दगी।

और उस जिन्दगी को हासिल करने के लिए वह अपने फन का पूरा प्रयोग कर रहा था। उछल-उछलकर सड़क छूती और हवा में उड़ती मोटर साइकिल सड़क को तेजी से पीछे दौड़ा रही थी। पुलिस जीप करीब आधा घंटे से लगातार उसके पीछे थी, मगर इस सारे वक्त में एक पल के लिए भी उसका मनोबल टूटा नहीं था। हां - एक पल के लिए वह उस वक्त लड़खड़ाया अवश्य था, जब जीप की तरफ से फायर हुआ और गोली उसके कान की लौ को स्पर्श करती आगे निकल गई।

अब वह संभल चुका था।

पुलिस गोली मारकर उसे रोक देना चाहती थी, किंतु मोटर साइकिल की ड्राइविंग के मामले में वह अपना कोई सानी नहीं समझता था - तभी तो मोटर साइकिल को सड़क पर उसने लहराना जारी कर दिया था। दाएं-बाएं, सड़क पर इस कदर लहराती हुई मोटर साइकिल आगे बढ़ रही थी कि जीप की तरफ से आने वाली कोई भी गोली चालक के जिस्म को निशाना न बना सके।

मगर जीप की तरफ से उस पर कोई फायर नहीं किया गया।

जीप और मोटर साइकिल यूं ही एक-दूसरे की रफ्तार का मुकाबला करती हुई आगे-पीछे दौड़ती रहीं। इस बीच स्याह लिबास वाला वह व्यक्ति पुलिस को शहर की न जाने कितनी सड़कों पर घुमाता रहा। एक वक्त ऐसा आ गया कि वह शहरी बस्ती में जा पहुंचा। इस वक्त उसकी मोटर साइकिल जिस सड़क पर दौड़ रही थी, उसके दोनों तरफ मकान थे। पुलिस उसका पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही थी।

अचानक एक मोड़ पर तेजी से मुड़ते वक्त मोटर साइकिल को एक तीव्र झटका लगा, हल्का-सा धमाका भी हुआ।

वह चौंका-मोटर साइकिल को संभाला।

गेयर बदलना चाहा तो दिमाग झनझना उठा उसका। मस्तिष्क में खतरे की घंटी बज उठी। गेयर बदलने में वह असफल रहा था। वह मोड़ पर लगे झटके और धमाके का कारण समझ गया कि गेयर का तार टूट चुका है। गेयर नहीं बदला जा सकेगा और इस स्थिति में वह ज्यादा देर तक खुद को पुलिस की गिरफ्त से नहीं बचा सकेगा।

ये सारे विचार एक ही पल में उसके मस्तिष्क में चकरा उठे।

गेयर से जूता उठाकर उसने एक्सीलरेटर जोर से मरोड़ दिया। अजीब-सी आवाज के साथ झटके खाती हुई मोटर साइकिल आगे बढ़ी। सामने ही एक मोड़ था। उसके दिमाग में फौरन यह विचार कौंध गया कि उसे क्या करना है। उधर पुलिस जीप के चीखते पहिए उस मोड़ पर मुड़े जिस पर उसकी मोटर साइकिल के गेयर का तार टूटा था। इधर उसकी मोटर साइकिल दूसरे मोड़ पर मुड़ी। मोड़ पर मुड़ते ही उसने हैंडिल छोड़कर कैरियर में दबी अटैची का हत्था पकड़ा और एक झटके से मोटर साइकिल से कूद गया।


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