कानपुर के समकालीन कवि - विनोद त्रिपाठी Kanpur Ke Samkalin Kavi - Hindi book by - Vinod Tripati
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कानपुर के समकालीन कवि

विनोद त्रिपाठी

प्रकाशक : विकासिका प्रकाशित वर्ष : 2012
पृष्ठ :428
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 9449
आईएसबीएन :000000000

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

लवकुश बाँधकर अश्व, बिना सेना लड़े लंकाजेता बाप से भी हार नहीं मानी है। भूषणा की बानी ने, चढ़ाया ऐसा पानी यहीं चमकी भवानी भक्त, शिवा को भवानी है। पहले स्वतंत्रता समर में, सनेही यहीं नानाराव से मरी फिरंगियों की नानी है नाम सुनते ही हैं पकड़ते विपक्षी कान यह कानपुर है यहाँ का कड़ा पानी है।

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