सचित्र हिंदी बाल शब्दकोश - ए डब्ल्यू आई सी Sachitra Hindi Bal Shabdkosh - Hindi book by - AWIC
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सचित्र हिंदी बाल शब्दकोश

ए डब्ल्यू आई सी

प्रकाशक : किताबघर प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2012
पृष्ठ :326
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 9514
आईएसबीएन :9789380146997

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

सचित्र हिंदी बाल शब्दकोश आपके सम्मुख है। इसे एसोसिएशन ऑफ़ राइटर्स एंड इलस्ट्रेटर्स फ़ॉर चिल्ड्रेन (ए.डब्ल्यू.आई.सी.) के 15 सदस्यों ने तैयार किया है। हमारा उद्देश्य बच्चों का हिन्दी भाषा से परिचय कराना है जिससे वे हिंदी को ठीक से पढ़े, बोलें और समझें।

यह शब्दकोश 6-9 वर्ष के बच्चों के लिए है। बाल रुचि व बाल सामर्थ्य को ध्यान में रखकर इस शब्दकोश का निर्माण किया गया है। यही इसकी विशेषता है।

शब्दकोश वर्णमाला से प्रारंभ हुआ है और इसमें शब्दसूची भी दी गई है। शब्द के साथ शब्दार्थ, शब्दप्रयोग व बालसुलभ रंगीन चित्र है जो शब्द का सही अर्थ समझाने में सहायक होंगे। अध्यापक तथा अभिभावकों को इससे सहायता मिलेगी। यह अहिंदी भागी लोगों के लिए भी उपयोगी होगा। प्रौढ़शिक्षा में भी अह विशेषरूप से सहायक सिद्ध होगा।

इस शब्दकोश में 1,728 शब्द, 5,184 शब्दप्रयोग व 1,000 के लगभग रंगीन चित्र है। सामान्यज्ञान के लिए इसमें आठ चित्रपृष्ठ भी दिए गए हैं।

हमारे सहयोगी, बाल पाठक, बाल मनोवैज्ञानिक, शिक्षक, भाषाशास्त्री, बाल साहित्य विशेषज्ञ, पुस्तकालयाध्यक्ष, हिंदी और अन्य भाषाओं के लेखक व बाल पुस्तक के प्रसिद्ध चित्रकार हैं।

सचित्र हिंदी बाल शब्दकोश की योजना मनोरमा जफ़ा ने ए.डब्ल्यू.आई.सी. की संस्थापना के बाद सन् 1981 में बनाई थी। चार वर्ष उपरांत एक दिन अवकाश प्राप्ति के बाद डाक्टर श्रीमती कमल मित्र, श्रीमती मनोरमा ज़फा से मिलने आईं। उनसे बातों ही बातो में शब्दकोश के विषय में चर्चा हुई। शब्दकोश की योजना में उन्होंने रुचि दिखाई व शब्दकोश का काम शुरू हुआ। संस्था के दिल्ली स्थित विभिन्न भाषाओं के सदस्यों को आमंत्रित किया गया। 15 सदस्य आगे आए और सन् 1985 में काम आरंभ हुआ। संस्था स्वैच्छिक थी और पैसों का अभाव था। सहयोगी निस्वा1ार्थ थे और उनमें काम करने का उत्साह था। सभी चिल्ड्रेन्स बुक ट्रस्ट के बाल पुस्तकालय के पीछे के कक्ष में बैठते, विचार करते, तरह तरह के शब्दकोश देखते व निर्णय लेते। शब्द चयन का आधार था बालसुलभ व रोज़ बोले जाने वाले परिचित शब्द, बाल पत्रिकाएं, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.इ.आर.टी.) द्वारा प्रकाशित चौथी कक्षा तक की पाठ्यपुस्तकें। सदस्यों ने ज्ञानमण्डल लिमिटेड वाराणसी द्वारा प्रकाशित बृहत् हिन्दी शब्दकोश, पंचम परिवर्धित संस्करण, 1984 को प्रमाण माना। इसके अतिरिक्त कितने ही शब्दकोशों व बाल शब्दकोशों से भी सहायता ली गई। केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा बनाई गई वर्तनी के अनुसार यथासंभव चलने का प्रयत्न किया गया।

हिंदी भाषा सुंदर है। इसमें अन्य भाषाओं के शब्दों को मूलरूप में ग्रहण करने की क्षमता है। शब्द का जिस तरह से उच्चारणा होता है वह उसी तरह से लिखा भी जा सकता है। हिंदी भाषा के इस गुण को ध्यान में रखकर सहयोगियों ने एक मत से कहा कि अन्य भाषा से अपनाए गए हिंदी शब्दों को, शब्दकोश में उनके मूल रूप में ही रखना चाहिए। बाल पाठक को शब्द के मूल रूप से परिचय कराना नितांत आवश्यक है। इसीलिए शब्द के किसी भी अन्य रूप को स्थान नहीं दिया गया है। हिंदी भाषा में अनेक विकल्प हैं, उनके कारण कठिनाइयां आईं। परंतु वार्ताविमर्श व प्रयास से समस्याओं का समाधान हो गया। अः, ङ, ञ और ण अक्षरों से कोई भी शब्द शुरू नहीं होता, इसलिए इन अक्षरों को शब्दकोश में स्थान नहीं दिया गया है। बाल पाठक की सुविधा के लिए अक्षरक्रम वर्णमाला पद्धति के अनुसार रखा गया है। प्रारंभ में दी गई वर्णमाला तथा शब्दसूची व शब्द के साथ पृष्ठ संख्या, शब्द को खोजने में सहायक होगी। अनुस्वारवाले शब्द अंत में दिए गए हैं और इनके बाद संयुक्ताक्षरवाले शब्द रखे गए हैं। संयुक्त ‘र’ के तीनों प्रचलित रूप- ‘प्र’, ‘र्म’ और ‘ट्र’ प्रयोग में लिए गए हैं। अंग्रेज़ी के जिन शब्दों में अर्धविवृत ‘ओ’ ध्वनि का प्रयोग होता है, उनके लिए हिंदी में ‘आ’ की मात्रा के ऊपर अर्धचंद्र का प्रयोग किया गया है। चंद्रबिंदु व नुक़्ते का भी प्रयोग किया गया है। हलंत व विसर्ग को टाला है।

शब्दचयन, डॉक्टर (श्रीमती) कमल मित्र, श्रीमती सरला जगमोहन, श्रीमती सुरेखा पाणंदीकर, श्रीमती शशी जैन, श्रीमती नीलिमा सिन्हा, श्रीमती स्वप्न दत्ता, श्रीमती बिमल मनमोहनसिंह, श्रीमती विनीता कृष्णा, श्री ए.के. घोष, डॉक्टर (श्रीमती) इरा सक्सैना, श्रीमती शारदा कपूरिया, श्री दिनेश सिन्हा व श्रीमती सरला भटनागर ने किया। तीन सदस्यों की समिति बनी। इस समिति में कमल मित्र, सरला जगमोहन व शशी जैन थीं। इन्होंने चयन किए शब्दों की सूची तैयार की।

तेरह सहयोगियों में शब्दों का वितरण किया गया। साथ ही उनको निम्न निर्देश भी दिए गए। शब्द समझाने के लिए तीन माध्यम-शब्दार्थ, शब्दप्रयोग व रंगीन चित्र प्रयोग में लिए जाएंगे। एक शब्द के पाँच वाक्य बनाने होंगे और वाक्य में दस से अधिक शब्द न हों। वाक्य सरल, बालसमझशक्ति के अनुकूल व बाल परिवेश से जुड़ा हो।

सहयोगियों ने बड़ी मेहनत से वाक्य बनाए और समय से कार्यालय को दे दिए। अब पाँच सदस्यों की समिति बनी जिसमें कमल मित्र, सरला जगमोहन, इरा सक्सैना, शशी जैन व सुरेखा पाणंदीकर थीं। इन्होंने केवल सरल शब्दार्थ को ही चुना। इसके उपरांत शब्द का भाव व अर्थ समझाने वाले तीन वाक्यों को चुना। शब्दार्थ चयन व वाक्य चयन के पश्चात संपादन कार्य आरंभ हुआ। इस समय श्रीमती मनोरमा ज़फा ने भी सहयोग दिया। शब्दकोश की पांडुलिपि तैयार हो गई। इसको टंकित भी करा लिया गया। अब केंद्रीय हिंदी निदेशालय से संपर्क किया गया। चार सदस्याओं की समिति ने जिसमें इरा सक्सैना, शशी जैन, सुरेखा पाणंदीकर व मनोरमा ज़फा थीं, हिंदी निदेशालय के अधिकारियों के साथ, पांडुलिपि को आदि से अंत तक बारीकी से देखा और पांडुलिपि पर फिर से काम किया। निदेशालय के अधिकारियों द्वारा शब्दकोश अनुशंसित हो गया और सरकार ने एसोसिएशन के वित्तीय अनुदान का आवेदन पत्र भी स्वीकार कर लिया।

शब्दकोश पर संपादनकार्य बराबर होता रहा व पाँच सदस्य-सरला जगमोहन, इरा सक्सैना, शशी जैन, सुरेखा पाणंदीकर व मनोरमा जफ़ा ने पांडुलिपि पर काम किया और शब्दकोश समापन अवस्था में आ गया। अंतिम चरण में सरला जगमोहन, शशी जैन व मनोरमा ज़फ़ा ने योगदान दिया। समापन कार्य बृहत् था। प्रूफ़ देखना, प्रेस में जाना, ग़लतियों को ठीक कराना, चित्रकार से सलाह लेना आदि। अंततः बाल शब्दकोश तैयार हो गया।

सरला जगमोहन व शशी जैन इस शब्दकोश के निर्माण में आदि से अंत तक जुड़ी रहीं।

विख्यात बाल पुस्तक चित्रकार श्री जगदीश जोशी ने वाक्यों के अनुसार बालसुलभ रंगीन चित्रों से सजाकर इस शब्दकोश को आकर्षक व बेजोड़ बनाया है। संस्था के 15 सदस्यों के सहयोग से यह शब्दकोश तैयार हुआ।

एसोसिएशन ऑफ़ राइटर्स एंड इलस्ट्रेटर्स फॉर चिल्ड्रेन विशेष रूप से मानव संसाधन और विकास मंत्रालय का आभारी है जिन्होंने संस्था को इस कोश के प्रथम संस्करण के लिए रु० 4, 81 है 128 का वित्तीय अनुदान दिया।

एसोसिएशन केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अधिकारियों का आभारी है जिनके सुझावों ने सदस्यों को निर्णय लेने में सहायता दी।

पांडुलिपि को टंकित करने का दूभर कार्य श्री वैद्य व श्री अनिल कुमार जैन ने किया। वे हमारे धन्यवाद के पात्र हैं।

एसोसिएशन चिल्ड्रेन्स बुक ट्रस्ट का आभार प्रकट करता है जिन्होंने पांडुलिपि तैयार करने में काग़ज़ दिया व सदस्यों को निरंतर अन्य सुविधाएं प्रदान कीं।

एसोसिएशन सभी सदस्यों को हृदय से धन्यवाद देता है जिन्होंने शब्दकोश को बनाने में सहयोग दिया।

एसोसिएशन के प्रेसिडेंट व चिल्ड्रेन्स बुक ट्रस्ट के जनरल मैनेजर श्री रवि शंकर के सहयोग ने सदस्यों को प्रोत्साहित किया। एसोसिएशन उनका आभारी है।

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