Gyanvardhak/द्विभाषी पुस्तकें
लोगों की राय

बाल एवं युवा साहित्य >> द्विभाषी पुस्तकें

सुरीला गधा

निवेदिता सुब्रमणियम

मूल्य: Rs. 85

The Musical Donkey   आगे...

चाँद पर खरगोश

इंद्राणी कृष्णाइय्यर

मूल्य: Rs. 85

The Rabbit in the Moon   आगे...

शेर और लोमड़ी

दीपा बलसावर

मूल्य: Rs. 85

The Lion and the Fox   आगे...

साँप और मेढक

मरियम करीम अहलावत

मूल्य: Rs. 85

The Snake and the Frogs   आगे...

बातूनी कछुआ

जीवा रघुनाथ

मूल्य: Rs. 85

The Talkative Tortoise   आगे...

चार दोस्त

कला शशिकुमार

मूल्य: Rs. 85

Four Friends   आगे...

श्यामपट्ट

ऊर्मिला शास्त्री

मूल्य: Rs. 135

द्विभाषी पुस्तकों की यह श्रृंखला, कहानी सुनाने के माहौल में तस्वीरों की मदद से बच्चों की शब्द अनुमान शक्ति और शब्द भंडार बढ़ाने में मदद करती है।   आगे...

अवनीत आंटी का मोबाइल फोन (द्विभाषी)

कविता सिंह काले

मूल्य: Rs. 115

एक दिन, दादी चिक्की और गगन को कहानी सुनाने ही वाली है जब कि अवनीत आंटी आ पहुंचती है।   आगे...

गोला का घर कहाँ? (द्विभाषी)

चित्रा सौंदर

मूल्य: Rs. 95

एक समय था जब याक् का अपना कोई घर नहीं था। पर गोला याक् अपना एक घर चाहता है जहाँ उसे खाना और पीने का पानी मिले, और वह खुश रहे।   आगे...

उलटा पुलटा (द्विभाषी)

टी आर राजेश

मूल्य: Rs. 95

हाथी, नाव, बतख...सब उलटा पुलटा ?   आगे...

तालाब (द्विभाषी)

अनिशा तम्पी

मूल्य: Rs. 135

द्विभाषी पुस्तकों की यह श्रृंखला, कहानी सुनाने के माहौल में तस्वीरों की मदद से बच्चों की शब्द अनुमान शक्ति और शब्द भंडार बढ़ाने में मदद करती है।   आगे...

जिगरी दोस्त

नीना सबनानी

मूल्य: Rs. 90

एक छोटी लड़की और एक पेड़ घंटों बातें करते रहते हैं। पर दूसरे बच्चे उनपर हँसते हैं। भला पेड़ बोल सकता है ? वे पूछते हैं।   आगे...

बेबी बेबू भालू

दीपा बलसावर

मूल्य: Rs. 100

यह बेबू की कहानी है, जो कि एक नन्ही रीछ है। वह जंगल में रहती है...   आगे...

शहर में मेरे दोस्त

सामिना मिश्रा

मूल्य: Rs. 80

कौन कहता है कि शहर सिर्फ़ लोगों का है ? मिलिए मोती हाथी, फड़ फड़ कबूतर, बन्नों भैंस और कई दो- और चार-टाँगों वाले जीवों से, जो भी शहर में रहते हैं।   आगे...

मल्ली

जीवा रघुनाथ

मूल्य: Rs. 60

मल्ली के मामा अपने परिवार के साथ गाँव आए हैं। मल्ली उनके लिए क्या उपहार ले जाएगी ?   आगे...

बचाओ ! बचाओ !

संध्या राव

मूल्य: Rs. 65

‘‘बचाओ ! बचाओ !’’ पुकारता है काला चींटा जब छोटा काला चींटा पानी में गिर जाता है...   आगे...

आना और चेना

सौम्या राजेन्द्रन

मूल्य: Rs. 75

आना हाथी को अपना चेहरा पसंद नहीं है। पर चेना रतालू कहता है कि वह सुंदर है। कैसे ? पूछता है आना।   आगे...

ऊपर नीचे

विनायक वर्मा

मूल्य: Rs. 75

छोटा-सा अप्पू सीसॉ पर खेलना चाहता है। पर दूसरी तरफ कौन बैठेगा ? टिड्डा ? या चूहा ? या...   आगे...

बीज

दीपा बलसावर

मूल्य: Rs. 80

मुझे एक बीज मिला, मैंने उसे गमले में डाला, और इंतजार करती रही...   आगे...

मैं कौन हूँ?

साक्षी जैन

मूल्य: Rs. 80

मैं कौन हूँ?   आगे...

गाँव का मेला

राधिका मेघनाथन

मूल्य: Rs. 70

मीनू गाँव के मेले के लिए इतनी उत्साहित है ! पर वह गिर जाती है और उसका पैर टूट जाता है...   आगे...

घुँघराली जलेबी

रेखा भिमानी

मूल्य: Rs. 70

राजा को जलेबियाँ बेहद पसंद हैं। वह उनके बारे में सपने देखता है...   आगे...

समुद्र का तोहफ़ा

संध्या राव

मूल्य: Rs. 75

रानी सारा दिन समुद्र-तट पर गुज़ारती है। वह अपनी दादी के लिए एक तोहफ़ा ले जाना चाहती है...   आगे...

रात

जुनुका देशपाण्डे

मूल्य: Rs. 85

दो बच्चे जब अपने को रात में जंगल की सैर करते हुए पाते हैं तो क्या होता है...   आगे...

मुर्गा और सूरज

मेरिन इमचेन

मूल्य: Rs. 100

सब तेरा कसूर है, वह सूरज को डाँटता है...   आगे...

नोरबू के नए जूते

चौंग दोर्जी भूटिया

मूल्य: Rs. 90

नोर्बू के पापा उसे नए जूतों का जोड़ा खरीदकर देते हैं। फिर एक बंदर आता है...   आगे...

नन्हा हाथी लाय-लाय

शेखर दत्तात्री

मूल्य: Rs. 100

यह कहानी नन्हा हाथी लाय-लाय की है जो घने जंगल में रहता है, वह कौतूहली और नटखट है, पर उसे अपनी माँ के आसपास ही रहना है जब तक वह स्वावलंबी नहीं हो जाता...   आगे...

दीनाबेन और गीर के शेर

मीरा श्रीराम, प्रभा राम

मूल्य: Rs. 115

दीनाबेन मालधारी है और उसका गाँव बसा है जंगल के बीचोंबीच जहाँ शेर रहते हैं। उसके रहन-सहन का ढंग क्या है ? उसका गुज़ारा कैसे होता है...   आगे...

क्रिकेट

संध्या राव

मूल्य: Rs. 80

कौन जीतता है? कौन हारता है? किसको परवाह? इतना ही काफ़ी है कि हम खेल सकें...   आगे...

लकीर और गोला

राधिका मेनन

मूल्य: Rs. 55

लकीर और गोला   आगे...

दोसा

संध्या राव

मूल्य: Rs. 70

किसने खाया दोसा ?   आगे...

 

  View All >> इस संग्रह में कुल 31 पुस्तकें हैं|