बला/bala
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बला  : स्त्री० [सं० बल+अच्+टाप्] १. बरियारा नामक क्षुप। २. वैद्यक में पौधों का एक वर्ग जिसके अंतर्गत ये चार पौधे हैं—बला या बरियारा, महाबला या सहदेई, अतिबला या कँगनी और नागवला या गँगरेन। ३. वह क्रिया या विद्या जिसके बल से युद्ध-क्षेत्र में योद्धाओं को भूख-प्यास नहीं लगती थी। ४. दक्ष प्रजापति की एक कन्या। ५. नाटकों में छोटी बहन के लिए संबोधन-सूचक शब्द। ६. पृथ्वी। ७. लक्ष्मी। ८. जैनों के अनुसार एक देवी जो वर्तमान अवसर्पिणी के सत्रहवें अर्हत् के उपदेशों का प्रचार करनेवाली कही गई है। स्त्री० [अ०] १. कोई ऐसा काम, चीज या बात जो बहुत अधिक कष्टदायक हो और जिससे सहज में छुटकारा न मिल सकता हो। आपत्ति। विपत्ति। संकट। २. कोई ऐसा काम, चीज या बात जो अनिष्टकारक या कष्टप्रद होने के कारण बहुत ही अप्रिय तथा घृणित मानी जाती हो या जिससे लोग हर तरह से बचना चाहते हों। जैसे—वियोगियों के लिए चाँदनी रात (या बरसात) भी एक बला ही होती है। ३. बहुत ही अप्रिय, घृणित, तुच्छ या हेय वस्तु। जैसे—यह कहाँ की बला तुम अपने साथ लगा लाये। पद—बला का=(क) बहुत अधिक तीव्र या प्रबल। जैसे—आज तो तरकारी (या दाल) में बला की मिरचें पड़ी हैं। (ख) बहुत ही उग्र, प्रचंड, भीषण या विकट। जैसे—वह तो बला का लड़ाका निकला। बला से=कोई चिंता नहीं। कुछ परवाह नहीं। जैसे—वह जाता है तो जाय, हमारी बला से। हमारी बला ऐसा करे=हम कभी ऐसा नहीं कर सकते। मुहा० (किसी की) बलाएँ लेना=किसी के सिर के पास दोनों हाथ ले जाकर धीरे-धीरे उसके दोनों पार्श्वों पर से नीचे की ओर लाना जो इस बात का सूचक होता है कि तुम्हारे सब कष्ट या विपत्तियाँ हम अपने ऊपर लेते हैं। (स्त्रियों का शुभ-चिंतना सूचक एक अभिचार या टोटका) ४ भूत-प्रेत आदि अथवा उनके कारण होनेवाला उपद्रव या बाधा। (स्त्रियाँ) जैसे—उसे तो कोई बला लगी है।
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बलाइ  : स्त्री०=बला (विपत्ति)।
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बलाक  : पुं० [सं० बल√अक् (जाना)+अच्] [स्त्री० बलाका, बलाकिका] १. बक। बगला। २. एक राजा जो भागवत के अनुसार पुरु तथा पुत्र और जह्नु का पौत्र था। ३. एक राक्षस का नाम।
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बलाक  : स्त्री० [सं० बलाक+टाप्] १. मादा बगला। बगली। २. बगलों की पंक्ति। ३. प्रेयसी। ४. कामुक स्त्री०। ५. नृत्य में एक प्रकार की गति।
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बलाकिका  : स्त्री० [सं० बलाक+कन्+टाप्, इत्व] १. मादा बगला। बलाका। २. बगलों की एक जाति।
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बलाग्र  : पुं० [सं० बल-अग्र, ष० त०] १. सेना का अगला भाग। २. सेनापति। वि० बलवान्। शक्तिशाली।
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बलाघात  : पुं० [सं० बल+आघात, तृ० त०] १. किसी काम, चीज या बात पर साधारण से कुछ अधिक बल लगाने या जोर देने की क्रिया या भाव। (स्ट्रेस) २. मनोभाव, विचार आदि प्रकट करते समय उनकी आवश्यकता, उपयोगिता, महत्त्व आदि की ओर ध्यान दिलाने के लिए उन पर डाला जानेवाला जोर। (एमफैसिस) ३. दे० ‘स्वराघात’।
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बलाट  : पुं० [सं० बल√अट् (जाना)+अच्] मूँग।
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बलाढ्य  : वि० [सं० बल-आढ्य, तृ० त०] बलवान्। पुं० उरद। माष।
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बलात्  : अव्य० [सं० बल√अत् (निरन्तर गमन)+क्विप्] १. बल-पूर्वक। जबरदस्ती से। बल से। २. हठ-पूर्वक। हठात्।
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बलात्कार  : पुं० [सं० बलात्√कृ (करना)+घञ्] १. बलात् या हठपूर्वक कोई काम करना। विशेषतः किसी या दूसरों की इच्छा के विरुद्ध कोई काम करना। २. पुरुष द्वारा किसी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध बलपूर्वक धमकाकर या छलपूर्वक किया जानेवाला संभोग। (रेप) ३. स्मृति में, महाजन का ऋणी को अपने यहाँ रोककर तथा मार-पीटकर पावना वसूल करना।
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बलात्कारित  : भू० कृ०=बलात्कृत।
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बलात्कृत  : भू० कृ० [सं० बलात्√कृ (करना)+क्त] १. जिसके साथ बलात्कार किया गया हो। २. जिससे बलपूर्वक या जबरदस्ती कोई काम कराया गया हो।
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बलात्मिका  : स्त्री० [सं० बलात्√कृ (करना)+क्त] १. जिसके साथ बलात्कार किया गया हो। २. जिससे बलपूर्वक या जबरदस्ती कोई काम कराया गया हो।
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बलात्मिका  : स्त्री० [सं० बल-आत्मन्, ब० स०,+कप्+टाप्, इत्व] हाथी-सूँड़ नाम का पौधा।
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बलाधिक  : वि० [सं० स० त०] [भाव० बलाधिक्य] अधिक बलवाला।
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बलाधिकरण  : पुं० [सं० बल-अधिकरण, ष० त०] सैनिक कार्रवाई।
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बलाविकृत  : पुं० [सं० बल-अधिकृत, ष० त०] सेना-विभाग का प्रधान अधिकारी।
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बलाध्यक्ष  : पुं० [सं० बल-अध्यक्ष, ष० त०] सेना का अध्यक्ष। सेनापति।
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बलाना  : स०=बुलाना।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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बलानुज  : पुं० [सं० बल-अनुज, ष० त०] बलराम के छोटे भाई श्रीकृष्ण।
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बलान्वित  : भू० कृ० [सं० बल-अन्वित, तृ० त०] १. बल से युक्त किया हुआ। २. बली। बलशाली।
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बला-पंचक  : पुं० [सं० ष० त०] वैद्यक में बला, अतिबला, नागबला, महाबला और राजबला नाम की पाँच ओषधियों का समुदाय।
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बलाबल  : पुं० [सं० द्व० स०] किसी में होनेवाले बल और निर्बलता दोनों का योग। जैसे—पहले अपने बलाबल का विचार करके काम में हाथ लगाना चाहिए।
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बलामोटा  : स्त्री० [सं० बल+आ√मुट् (मर्दन)+अच्+टाप्] नागदमनी नाम की ओषधि।
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बलाय  : पुं० [सं० बल-अय, ष० त०] वरुना नामक वृक्ष। बन्ना। बलास। स्त्री० [अ० बला] १. आपत्ति। विपत्ति। संकट। २. कष्टदायक चीज या बात। दे० ‘बला’। ३. एक प्रकार का रोग जिसमें हाथ की किसी उँगली के सिरे पर गाँठ निकल आती है या ऐसा फोड़ा हो जाता है जो उँगली टेढ़ी कर देता है।
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बलाराति  : पुं० [सं० बल-आरति, ष० त०] १. इंद्र। २. विष्णु।
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बलालक  : पुं० [सं० बल√अल् (पर्याप्त)+ण्वुल्—अक] जलआँवला।
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बलावलेप  : पुं० [सं० बल-अवलेप, तृ० त०] १. अपने सम्बन्ध में यह कहना कि मुझमें बहुत अधिक बल है। २. अभिमान। घमंड।
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बलाश  : पुं० [सं० बल√अश्+अण्] १. कफ। २. क्षय।
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बलास  : पुं० [सं० बल√अस् (फेंकना)+अण्] १. कफ। २. कफ के बढ़ने से होनेवाला एक रोग जिसमें गले और फेफड़े में सूजन और पीड़ा होती है। पुं० [सं० बला] बरुना नाम का पौधा।
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बलासी (सिन्)  : वि० [सं० बलास+इनि] बलास अर्थात् क्षय (रोग) से पीड़ित। पुं० [सं० बलास] बरुना या बन्ना नाम का पौधा।
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बलाहक  : पुं० [सं० बल+आ√हा (छोड़ना)+क्वुन्—अक] १. बादल। मेघ। २. सात प्रकार के बादलों में से एक प्रकार के बादल जो प्रलय के समय छाते हैं। ३. मोथा। ४. श्रीकृष्ण के रथ के एक घोड़े का नाम। ५. सुश्रुत के अनुसार दर्वीकर साँपों का एक भेद या वर्ग। ६. एक तरह का बगला। ७. कुश द्वीप का एक पर्वत।
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बलाहर  : पुं० [देश०] १. मछुओं या धीवरों की एक जाति। २. गाँव का चौकीदार।
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बलाही  : पुं० [?] १. चमड़ा कमानेवाला व्यक्ति। २. चमड़े का व्यवसाय करनेवाला-व्यक्ति।
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