बाँट/baant
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बाट  : पुं० [सं० वाट=मार्ग] रास्ता। पद—बाट घाट=नगर या बस्ती के इधर-उधर के छोटे-मोटे सभी प्रकार के स्थान। मुहावरा—बाट करना=रास्ता खोलना। मार्ग बनाना। बाट काटना=चलकर रास्ता पार करना। बाट जोहना या देखना=प्रतीक्षा करना। आसरा या रास्ता देखना। (किसी के) बाट पड़ना=(क) रास्ते में आ-आकर बाधा देना। तंग करना। पीछे पड़ना। (ख) रास्ते में डाकुओं का आकर लूट लेना। डाका पड़ना। बाट पारना=रास्ते में यात्रियो को लूटना। डाका डालना। (किसी को) बाट लगाना=(क) ठीक रास्ता बतलाना या ठीक रास्ते पर लाना। (ख) काम करने का ठीक ढंग बतलाना। बाट रोकना=(क) मार्ग में बाधा या रुकावट खड़ी करना। (ख) किसी के काम में अड़चन खड़ी करना। बाधक होना। पुं० [सं० वटक] १. पत्थर आदि का वह टुकड़ा जो चीजें तौलने के काम आता है। बटखरा। मुहावरा—बात हड़ना=(क) इस बात की जाँच या परीक्षा करना कि कोई बटखरा तौल में पूरा है या नहीं। (ख) किसी की प्रामाणिकता, सत्यता आदि की जाँच या परीक्षा करना। (ग) तंग या पेरशान करना। जैसे—रात दिन मुझसे बाट हड़ता है। (स्त्रियाँ) २. पत्थर का वह टुकड़ा जिससे सिल पर कोई चीज पीसी जाती है। बट्टा। स्त्री० [हिं० बटना] १. डोरी, रस्सी आदि बटने की क्रिया या भाव। २. बटने के कारण डोरी, रस्सी आदि में पड़ी हुई ऐंठन। बल। स्त्री० [हिं० बाटना=पीसना] बाटने अर्थात् पीसने की क्रिया, ढंग या भाव।
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बाटकी  : स्त्री०=बटलोई।
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बाटना  : स० [हि० बट्टा या बाट] सिल पर बट्टे आदि से पीसना। चूर्ण करना। उदाहरण—यों रहीम जस होतु है उपकारी के संग, बाटन वारि कैलगै ज्यों मेंहदी को रंग।-रहीम। स०=बटना (बल देना) पुं०=बटना। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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बाटली  : स्त्री० [अ० बटलाइन] जहाज के पाल मे ऊपर की ओर लगा हुआ वह रस्सा जो मस्तूल के ऊपर से होकर फिर नीचे की ओर आता है। इसी को कींचकर पाल तानते हैं। (लश०) स्त्री०=बोतल। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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बाटिका  : स्त्री० [सं० वाटिका] १. छोटा बगीचा जिसमें शोभा के लिए फूल तथा फलों के छोटे-छोटे पौधे लगाये जाते हों। २. गद्य काव्य का एक भेद।
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बाटी  : स्त्री० [सं० वटी] १. गोली। पिंड। २. उपलों या अंगारो का सेंका हुआ आटे का गोलाकार लोंदा। स्त्री० [पं०] चौड़े मुँहवाली एक तरह की बड़ी कटोरी। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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