ब्रह्मचर्य/brahmachary
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ब्रह्मचर्य  : पुं० [सं० च० त०] १. भारतीय आर्यों की वह अवस्था तथा व्रत जिसमें विद्यार्थी को वेदों का अध्ययन करना पड़ता है, सब प्रकार के संसारिक बंधनों से दूर रहकर सातित्क जीवन बिताना पड़ता है और अपने वीर्य को अक्षुण्ण रखना पड़ता है। २. अष्ट-विष्ट मैथुनों से बचने का व्रत। ३. योग में एक प्रकार का यम। वीर्य को रक्षित रखने का प्रतिबंध। मैथुन से बचने की साधना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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