लंगन/langan
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लगना। ३. उतनी भूमि जितनी एक असामी को जोतने-बोने आदि के लिए मिली हो अथवा उसके अधिकार में हो। ४. चमड़े आदि की वह लंबी पट्टियाँ या रस्सियाँ जो घोड़ों, बै  :
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लगन  : स्त्री० [हिं० लगना] १. लगने की क्रिया या भाव। २. एकाग्र भाव से किसी काम या बात की ओर ध्यान या मन लगने की अवस्था या भाव। एकान्त ध्यान और प्रवृत्ति की लौ। जैसे—आजकल तो उन्हें कविताएँ लिखने की लगन लगी है, अर्थात् उनका सारा ध्यान कविताएं लिखने की ओर है। उदाहरण—भूखे गरीब दिल की खुदा से लगन न हो। नजीर। ३. श्रृंगारिक क्षेत्र में, प्रगाढ़ प्रेम। बहुत अधिक मुहब्बत। क्रि० प्र०—लगना।—लगाना। पुं० [सं० लग्न] १. विवाह के लिए स्थिर किया हुआ कोई शुभ मुहुर्त या साइत। मुहावरा—लगन धरना या रखना=विवाह का मुहुर्त या समय निश्चित करना। २. वे विशिष्ट दिन और महीने जिनमें हिन्दुओं के यहाँ विवाह होना निश्चित विहित है। सहालग। जैसे—आजकल लगन-बरात के दिन हैं, इसलिए मजदूर कम मिलते हैं। ३. दे० ‘लग्न’। पुं० [फा०] १. ताँबे या पीतल की एक प्रकार की थाली जिसमें रखकर मोमबत्ती जलाई जाती है। २. किसी प्रकार की बड़ी थाली या परात। ३. मुसलमानों में ब्याह की एक रीति जिसमें विवाह से पहले थालियों में मिठाइयाँ आदि भरकर वर के यहाँ भेजी जाती हैं।
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लगन-पत्री  : स्त्री० [सं० लग्न-पत्रिका] कन्या-पक्ष द्वारा वर-पक्षवालों के यहाँ भेजा जानेवाला वह पत्र या लेख जिसमें विवाह संबंधी विभिन्न कृत्यों का समय लिखा होता है।
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लगनवट  : स्त्री० [हिं० लगन] श्रृंगारिक क्षेत्र में किसी के साथ होनेवाला प्रेम-सम्बन्ध।
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लगना  : अ० [सं० लग्न] १. एक पदार्थ के तल या पार्श्व का दूसरे पदार्थ के तल या पार्श्व के साथ आंशिक अथवा पूर्ण रूप से मिलना या सटना। संलग्न होना। सटना। जैसे—(क) किताब की जिल्द पर कपड़ा या कागज लगना। (ख) दीवार पर तसवीरें लगना। (ग) किसी के गले (या पैरों) लगना। २. एक चीज का दूसरी चीज (पर या में) जडा, जोड़ा, टाँका बैठाया रखा या सटाया जाना। जैसे—(क) लिफाके पर टिकट, तसवीर में चौखटा या साड़ी में गोटा लगना। (ख) दीवार में खिड़की या दरवाजा लगना। (ग) मकान में नल या बिजली लगना। (घ) दरवाजे में कुंडी लगना। ३. किसी चीज का उपयोग में आने के लिए यथा स्थान आकर जमना, बैठना या स्थित होना। जैसे—नाव में पाल लगना, बाँश में झंडी लगना। ४. किसी तल पर किसी गाढ़े तरल पदार्थ का लेप आदि के रूप में अथवा यों ही जमाया या पोता जाना। जैसे—पैरों में महावर लगना, दीवारों पर पलस्तर या रंग लगना, चीजों पर निशान लगना, माथे पर तिलक लगना, कपड़ों में कीचड़ लगना। ५. किसी प्रकार की गति की दशा में एक चीज का पासवाली दूसरी चीज से रगड़ खाना या संपृक्त होना। जैसे—(क) यंत्र के पहिए का किसी डंडे या दूसरे पहिए में लगना। (ख) चलते समय घोड़े का पैर लगना, अर्थात् एक पैर का दूसरे से टकराना या रगड़ा खाना। ६. किसी रूप में शामिल या सम्मिलित होना। जैसे—(क) पुस्तक में परिशिष्ट लगना। (ख) कु्त्ते का बिल्ली के पीछे लगना। मुहावरा—(किसी के पीछे या साथ) लग चलना=अनुगामी या संगी साथी बनना। जैसे—तुम्हें तो जिससे कुछ प्राप्ति होगी, उसी के पीछे लग जाओगे। (किसी के पीछे) लगना= किसी का भेद लेने या रहस्य जानने अथवा उसे किसी प्रकार की हानि पहुँचाने के लिए छिपकर उसके पीछे चलना। पीछा करना। जैसे—आजकल पुलिस उनके पीछे लगी है। ७. किसी अनिष्ट या कष्टदायक तत्त्व, या बात का किसी के साथ संबद्ध या संलग्न होना। जैसे—क) किसी के पीछे कोई आफत या जहमत लगना। (ख) किसी को रोग या लू लगना। (ग) भूत या प्रेत लगना। मुहावरा—लगी लिपटी बात कहना=ऐसी बात कहना जो अप्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी दूसरी बात के साथ संबद्ध हो। अस्पष्ट और भ्रामक या द्वयर्थक बात कहना। ८. आवरण, निरोध आदि के रूप में रहनेवाली चीज या उसके विभागों का इस प्रकार आकर कहीं गिरना, बैठना या सटना कि उसके नीचे या पीछे की चीज छिप या ढक जाय अथवा बंद हो जाय। आवरण का आकर यथा स्थान बैठना। जैसे—दरवाजे के किवाड़ या कुंडी लगना, आँख की पलकें या संदूक का ढक्कन लगना (बंद होना)। ९. किसी काम, चीज या बात का व्यक्ति का ऐसे स्थान पर पहुँचना या ऐसी स्थिति में आना कि उसका उपयोग, परिणाम, सार्थकता या सिद्धि हो सके। जैसे—(क) काम ठिकाने या पार लगना। (ख) डाकखाने में पारसल या रजिस्ट्री लगना। (ग) खाने पीने की चीजों का अंग लगना (अर्थात् शरीर को पुष्ट करना)। १॰. किसी चीज का ऐसे क्रम या रूप में आना या प्रस्तुत होना कि उसका नियमित और यथोचित उपयोग हो सके। जैसे—(क) दूकान या बाजार लगना। (ख) कमरे में मेज-कुर्सी या गद्दी, तकिया बिछौना आदि लगना। (ग) पान या उसके बीड़े लगना। ११. किसी चीज का अनिवार्य या आश्यक रूप से उपयोग में आते हुए व्यय होना। काम में आकर समाप्त होना। जैसे—(क) इस काम में १00 (या दो महीने) लगेगे। (ख) इस पुस्तक की ५00 प्रतियाँ तो सरकार में ही लग जायँगी। (ग) दोनों मकान कर्ज चुकाने में लग गये। १२. व्यक्ति का कार्य में लगकर उसका संपादन करना। जैसे—सबेरा होते ही वह अपने काम में लग जाता है। पद—लगकर=अच्छी और पूरी तरह से। खूब मन लगाकर। जैसे—लगकर इलाज करोगे तभी तुम अच्छे होगे। १३. किसी काम या पद पर नियुक्त या नियोजित होना। कर्तव्य से संबद्ध होना। जैसे—(क) किसी का काम या नौकरी लगना। (ख) किसी जगह चौकी या पहरा लगना। १४. किसी प्रकार के आघात या प्रहार की चोट या वार का किसी अंग, शरीर या स्थान पर पडना। जैसे—(क) गोली, ०थप्पड़ मुक्का या लाठी लगना। (ख) मन में किसी की बात लगना। मुहावरा—लगती हुई बात कहना=ऐसी बात कहना जिससे किसी के मन पर आघात हो या चोट लगे। मर्म-भेदी बात कहना। जैसे—चार आदमियों के सामने इस तरह की लगती हुई बात नही कहनी चाहिए। १५. धारदार या नुकीली चीज की धार या नोक शरीर में गड़ना, चुभना या धँसना। जैसे—(क) हजामत बनाते समय गाल पर उत्सरा लगना। (ख) पैर में काँटा लगना। (ग) जानवर का दाँत या नाखून लगना। १६. किसी चीज या बात का प्रयुक्त होने पर अपना ठीक और पूरा काम करना अथवा प्रभाव या फल दिखलाना। जैसे—(क) इस बीमारी में कोई दवा लगती ही नहीं। (ख)यह ताली इस ताले में लग जायगी। १७. किसी के साथ इस प्रकार की बातचीत या व्यवहार करना कि वह कुढ़े या चिढ़े अथवा लड़ने पर उतारु हो । छेड़खानी या छेड़छाड़ करना। जैसे—किसी बड़े के साथ उद्दंडता या धृष्टता की बातें करना। अश्लीलता की और बढ़-बढ़कर बातें करना। जैसे—यह नौकर घर-भर के मुँह लगा है, अर्थात् सबसे बढ़-बढ़कर बातें करता है। १८. किसी ऐसे काम, चीज या बात का संबंध का आरम्भ होना जो कुछ अधिक समय तक निरंतर चलता या बना रहे। जैसे—(क) कचहरी, दरबार या मेला लगना। (ख) नया महीना या साल लगना। (ग)किसी काम या बात की आदत या चस्का लगना। (घ) किसी से प्रेम, लड़ाई-झगड़ा या होड़ लगना। मुहावरा—(किसी से) लगी होना=पहले से चले आनेवाले उक्त प्रकार के कार्य या संबंध का बराबर पूर्ववत् चलते रहना। जैसे—उन दोनों में बहुत दिनों से लगी हैं (अर्थात् उसमें प्रेम, लडाई, होड़ आदि का भाव बराबर चला आ रहा है)। १९. किसी विषय में या किसी व्यक्ति पर किसी चीज या बात का आरोप या प्रयोग होना। जैसे—(क) किसी पर कोई अभियोग या कलंक लगना। (ख) किसी अपराध में कोई धारा या किसी विषय में कोई नियम लगना। (ग) एक के दोष के लिए दूसरे का नाम लगना। २॰. लाक्षणिक रूप में और मुख्यतः धार्मिक क्षेत्र में कोई अनिष्ट बात या स्थिति अनिवार्य रूप से किसी के जिम्मे पड़ना या होना। निश्चित रूप से किसी अनिष्ट या असद् बात का भागी बनना या होना। जैसे—दोष, पाप, , सूतक या हत्या लगना। २१. किसी काम चीज या बात की किसी रूप में मानसिक या शारीरिक अनुभूति या प्रतीति होना। जान पडना। जैसे—(क) गरमी, जाड़ा या डर लगना। (ख) खाने-पीने की चीज का खट्टा या मीठा लगना। (ग) किसी आदमी, काम, चीज या बात का अच्छा या बुरा लगना। २२. किसी प्रकार की मानसिक वृत्ति का दृढ़ता या स्थिरतापूर्वक किसी ओर प्रवृत्त होना। जैसे—(क) काम में जी या मन लगना। (ख) ईश्वर का ध्यान लगना। (ग) घर पहुँचने की चिंता लगना। २३. किसी काम या बात का क्रियात्मक रूप धारण करना या घटित होना। जैसे—ग्रहण लगना, ढेर लगना, देर लगना, नैवेद्य लगना, समाधि लगना, सेंध लगना। २४. किसी प्रकार की क्रिया की पूर्णता, सिद्धि या स्थापना होना। जैसे—बाजी या शर्त लगना, क्रम या सिलसिला लगना। २५. किसी प्रकार के उपयोग या व्यवहार के लिए अपेक्षित या आवश्यक होना० जैसे—(क) इस महीने घर में दो मन अनाज लगेगा। (ख) यह पुस्तक शास्त्री परीक्षा के पाठ्य-क्रम में लगी है। (ग) जब काम लगे तब आकर यह सामान ले जाना। २६. पारिवारिक संबंध या रिश्ते के विचार से किसी रूप में किसी के साथ संबद्ध होना। जैसे—वह भी रिश्ते में हमारे भाई ही लगते हैं। २७. लिखने-पढ़ने के क्षेत्र में, किसी पद, वाक्य या शब्द का ठीक-ठीक अर्थ या आशय समझ में आना। जैसे—किसी चौपाई या श्वोक का अर्थ लगना। २८. गणित के क्षेत्र में कोई क्रिया ठीक और पूरी उतरना। ठीक तरह से हिसाब होना। जैसे—जोड़ या बाकी लगना। २९. आर्थिक क्षेत्र में अनिवार्य रूप से किसी प्रकार का दातव्य या देन निश्चित होना अथवा हिस्से लगना। जैसे—(क) कर, जुरमाना या महमूल लगना। (ख) उधार लिए हुए रुपयों पर सूद लगना। (ग) रोजगार में दाँव पर रुपए लगना। ३॰. यानों, सवारियों आदि के संबंध में किसी स्थान पर आकर टिकना, ठहरना या रुकना। जैसे—(क) किनारे पर नाव या जहाज लगना। (ख) दरवाजे पर गाड़ी या पालकी लगना। (ग) प्लेटफार्म पर इंजन या रेलगाड़ी के डिब्बे लगना। ३१. जहाजों, नावों आदि के संबंध में चलते समय छिछले पानी में नीचे की जमीन या तल के साथ इस प्रकार उनका पेंदा टिकना या सटना कि उनकी गति रुक जाय। टिकना। जैसे—रास्ते में पानी छिछला होने के कारण नाव कई जगह लग गई। ३२. वनस्पतियों आदि के संबंध में उनके आवश्यक अंग अंकुरित या प्रस्फुटित होना। जैसे—फल०फूल या मंजरी लगना। ३३. पेड़-पौधों आदि के संबंध में किसी स्थान पर जमकर जीवित रहना और फलना-फूलना। जैसे—(क) कहीं से आया हुआ पेड़ बगीचे में लगना० (ख) क्यारी में गुलाब की कलमें लगना। ३४. सेंद्रिय पदार्थों के संबंध में किसी प्रकार के दबाव, रोग विकार संघर्ष आदि के कारण सडायँध उत्पन्न होना। गलने या लड़ने की क्रिया का आरंभ होना। जैसे—(क) घोड़े की पीठ या बैल का कंधा लगना, अर्थात् उसमें घाव होना। (ख) बरसात में पड़े-पड़े फलों का लगना, अर्थात् उनका सड़ना आरम्भ होना। ३५. किसी पदार्थ में ऐसा रासायनिक विकार उत्पन्न होना जिससे उसकी आयु तथा शक्ति दिन पर दिन क्षीण होने लगती है। जैसे—(क) दीवार में नोना लगना। (ख) लोहे में जंग या मोरचा लगना। ३६. किसी पदार्थ में ऐसे कीडे आदि उत्पन्न होना या बाहर से आकर सम्मिलित होना जो उस चीज का खाकर या और किसी प्रकार नष्ट करते हों। जैसे—(क) लकड़ी में घुन या दीमक लगना। (ख) ऊनी या रेशमी कपड़ों में कीड़े लगना। ग) गुड़ में च्यूँटे या मिठाई में च्यूँटियाँ लगना। ३७. खाद्य पदार्थों के संबंध में, कडी आँच पाने या जल आदि कम होने के कारण उबाले या पकाये जाने वाले पदार्थ का कुछ अंश बरतन के पेदें में जम, चिपक या सट जाना। जैसे—हलुआ चलाते रहो, नहीं तो लग जायगा। ३८. गौ, भैस बकरी आदि दूध देनेवाले पशुओं का दुहा जाना। जैसे—यह भैस दिन भर में तीन बार लगती है। ३९. आक्रामक या घातक जीवों, व्यक्तियों आदि का प्रायः स्थान विशेष पर आते रहना और चोट करना, अथवा कष्ट या हानि पहुँचना। जैसे—(क) इस रास्ते में डाकू लगते हैं। (ख) इस जंगल में भालू (या शेर) लगते हैं। (ग) छत पर (या बगीचे में) मच्छर लगते हैं। ४0०किसी चीज या दाम का भाव आँका जाना। मूल्यांकन होना। जैसे—इस अँगूठी का बाजार में जो दाम लगे, वह मुझे दे देना। ४१. स्त्री के साथ प्रसंग, मैथुन या संभोग करना। (बाजारू)। विशेष—(क) इस क्रिया का प्रयोग बहुत सी संज्ञाओं और क्रियाओं के साथ अलग अलग प्रकार के अर्थों में होता है। और इसीलिए तात्त्विक दृष्टि से ऐसे प्रयोगों की गणना मुहा०में होती है। जैसे—किसी चीज पर दाँत या निगाह लगना, किसी काम या चीज में हाथ लगना, कोई चीज हाथ लगना आदि। (ख) अनेक अवसरों पर यह क्रिया दूसरी क्रियाओंे के संयो० क्रि० वे रूप में भी लगकर अनेक प्रकार के अर्थ देती है। अधिकतर ऐसे अवसरों पर इसका प्रयोग यह सूचित करता है कि किसी ऐसी क्रिया का आरंभ हुआ है जो अभी कुछ समय तक चलती या होती रहेगी। जैसे—(क) कुछ कहने, पढ़ने, बोलने या लिखने लगना। (ख) चलने, दौड़ने या भागने लगना। (ग) झगड़ने या लड़ने लगना आदि।
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लगनि  : स्त्री० =लगन। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लगनी  : स्त्री० [फा० लगन] १. छोटी थाली। तश्तरी। रिकाबी। २. पानदान के अन्दर की पान रखने की छोटी तश्तरी।
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लगनीय  : वि० [सं०√लग् (मिलना)+अनीयर्] जो संबद्ध या संयुक्त किया जा सके। लगाये जाने के योग्य।
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