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ऊपरी  : वि० [हिं० ऊपर] १. क्रम, स्थिति आदि के विचार से ऊपर की ओर होने या रहनेवाला। ऊपर का। जैसे—(क) घर का ऊपरी खंड या भाग। (ख) बादाम का ऊपरी छिलका। २. जो किसी निश्चित क्षेत्र, वर्ग आदि से अलग या बाहर का हो। जैसे—ऊपरी आदमी। ३. नियत या नियमति से भिन्न। अतिरिक्त। जैसे—ऊपरी आमदनी। ४. जिसका प्रस्तुत से कोई संबंध न हो। जैसे—ऊपरी बातें। ५. जिसका आविर्भाव किसी ऊपरी (अर्थात् अलौकिक) कारणों, उपद्रवों आदि से हो। जैसे—ऊपरी फसाद (भूत-प्रेत आदि की बाधा)। ६. (आचरण या व्यवहार) जो केवल ऊपर से अर्थात् दिखाने भर के लिए किया जाय, वास्तविक या हार्दिक न हो। औपचारिक या दिखावटी। जैसे—ऊपरी आदर-सत्कार। ७. (कार्य) जिसका कोई ठोस आधार या भीतरी तत्त्व न हो। जैसे—ऊपरी तड़क-भड़क।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
ऊपरी  : वि० [हिं० ऊपर] १. क्रम, स्थिति आदि के विचार से ऊपर की ओर होने या रहनेवाला। ऊपर का। जैसे—(क) घर का ऊपरी खंड या भाग। (ख) बादाम का ऊपरी छिलका। २. जो किसी निश्चित क्षेत्र, वर्ग आदि से अलग या बाहर का हो। जैसे—ऊपरी आदमी। ३. नियत या नियमति से भिन्न। अतिरिक्त। जैसे—ऊपरी आमदनी। ४. जिसका प्रस्तुत से कोई संबंध न हो। जैसे—ऊपरी बातें। ५. जिसका आविर्भाव किसी ऊपरी (अर्थात् अलौकिक) कारणों, उपद्रवों आदि से हो। जैसे—ऊपरी फसाद (भूत-प्रेत आदि की बाधा)। ६. (आचरण या व्यवहार) जो केवल ऊपर से अर्थात् दिखाने भर के लिए किया जाय, वास्तविक या हार्दिक न हो। औपचारिक या दिखावटी। जैसे—ऊपरी आदर-सत्कार। ७. (कार्य) जिसका कोई ठोस आधार या भीतरी तत्त्व न हो। जैसे—ऊपरी तड़क-भड़क।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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