लोगों की राय

शब्द का अर्थ खोजें

शब्द का अर्थ

काइयाँ  : वि० [हिं० चाइयाँ का अनु०] बहुत अधिक चालाक या धूर्त्त। (व्यक्ति)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँई  : अव्य० [सं० किम] किसलिए। क्यों। सर्व० किसको। किसे। (राज०)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँक  : पुं० [सं० कंकु] कँगनी नाम का अन्न। पुं० [सं० कंक] सफेद चील।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँकड़ा  : पुं० [हिं० कंकड़] १. कपास का बीज। विनौला। २. कंकड़।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँकर  : पुं० [स्त्री० काँकरी]=कंकड़।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँकरी  : स्त्री० [हिं०काँकर का अल्प०] छोटा कंकड़। मुहावरा—काँकरी चुनन=घोर, चिंता वियोग आदि के समय पागलों की तरह चुपचाप सिर झुकाकर बैठे रहना या समय बिताने के लिए जमीन पर पड़ी हुई कंकड़ियाँ उठा-उठाकर इधर-उधर करना।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँकरेच  : स्त्री० [?] गौओं, बैलों की एक जाति या नसल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँ-काँ  : पुं० [अनु] १. कौए के बोलने का शब्द। २. लाक्षणिक अर्थ में शोरगुल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँकुनी  : स्त्री०=कँगनी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांक्षा  : स्त्री० [वि० कांक्षनीय, कांक्षी, भू० कृ० कांक्षित]=आकांक्षा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांक्षित  : वि० [सं०√कांक्ष् (चाहना)+क्त] जिसकी कांक्षा या इच्छा की गई हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँक्षी (क्षिन्)  : वि० [सं०√कांक्ष्+णिनि] काँक्षा या इच्छा करनेवाला। आकांक्षी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँख  : स्त्री० [सं० कक्ष] घड़ और बाँह के बीच का वह भाग जो कंधे के नीचे पड़ता और गड्ढे के रूप में होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँखना  : अ० [अनु०] १. मल-त्याग के समय आँतों या पेट को इस प्रकार कुछ जोर से दबाना कि मुंह से आह या ऊँह शब्द निकले। २. कठिन या विशेष परिश्रम का काम करते समय उक्त प्रकार की चेष्टा या शब्द करना। (व्यंग्य)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँखसोती  : स्त्री० [हिं० काँख+सं० श्रोत्र, प्रा० सोत] जनेऊ की तरह कंधे पर दुपट्टा डालने का ढंग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांखी  : वि०=कांक्षी (आकांक्षी)।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँगड़ा  : पुं० [सं० केकय] पश्चिमी हिमालय का एक पहाड़ी प्रदेश जिसमें एक छोटा ज्वालामुखी पर्वत है। पुं० [सं० कंक] मटमैले रंग का एक पक्षी जिसकी चोटी काले रंग की होती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँगड़ी  : स्त्री० [हिं० कांगड़ा] एक प्रकार की छोटी दस्तेदार कश्मीरी अँगीठी। विशेष—प्रायः ठंढ़ से बचने के लिए पहाड़ों पर रहनेवाले लोग काम करते समय अपने कलेजे और पेट को गरम रखने के लिए इसे गले में लटकाए रहते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँगनी  : स्त्री०=कँगनी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँगरू  : पुं० =कँगारू।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांगही  : स्त्री०=कंघी।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांगुरा  : पुं० कँगूरा।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांग्रेस  : स्त्री० [अं०] १. वह महासभा जिसमें भिन्न-भिन्न स्थानों के प्रतिनिधि एकत्र होकर सार्वजनिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। २. एक प्रसिद्ध अखिल भारतीय संस्था जिसके प्रयत्न से भारत को अँगरेजी शासन से स्वतंत्रता मिली है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांग्रेसी  : वि० [हिं० कांग्रेस] कांग्रेस में होने अथवा उससे संबंध रखनेवाला। पुं० कांग्रेस का कार्यकर्त्ता अथवा उसका सदस्य।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँच  : स्त्री० [सं० कक्ष, प्रा० कच्छ] १. धोती का वह सिरा जो दोनों जाँघों के बीच में से ले जाकर कमर में खोंसा जाता है। लाँग। मुहावरा—काँख खोलना=(क) साहस छोड़कर किसी काम से पीछे हटना, फलतः अपनी कायरता प्रकट करना। (ख) प्रसंग या संयोग करना। २. गुदेंद्रिय के भीतर का भाग। गुदाचक। गुदावर्त। मुहावरा—काँच निकलना=आघात, दुर्बलता, परिश्रम आदि के कारण गुदा-चक्र का बाहर निकल आना जो एक प्रकार का रोग है। पुं० [सं० काच] एक प्रसिद्ध चमकीला, पारदर्शक और स्वच्छ पदार्थ जो बालू (रेह) सोडा, चूने आदि के योग से बनाया जाता है और जिससे चूडियाँ दर्पण, बोतलें आदि बनते हैं। शीशा। (ग्लास)। स्त्री० [हिं० कच्चा] कच्ची धातु।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचन  : पुं० [सं०√कांच् (दीप्ति)+ल्युट-अन] [वि० कांचनीय] १. सोना। स्वर्ण। २. धन-संपत्ति। ३. ऐश्वर्य। ४. कचनार। ५. चंपा। ६. नागकेसर। ७. गूलर। ८. धतूरा। वि० १. उत्तम। श्रेष्ठ। २. परम सुन्दर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचनक  : पुं० [सं० काँचन+कन्] १. हरताल। २. चंपा। (पौधा और फूल)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचन-गिरि  : पुं० [ष० त०] सुमेरु पर्वत।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचनचंगा  : पुं० [सं० कांचनश्रृंग] नैपाल और शिकम के बीच में स्थित हिमालय की एक चोटी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचन-पुरुष  : पुं० [ष० त०] सोने की वह मूर्ति जो मृतक के श्राद्ध के समय शय्या पर रखकर दान की जाती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचनार  : पुं० [सं० कांचन√ऋ(गति)+अण्] कचनार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचनी  : स्त्री० [सं० कांचन+ङीष्] १. हल्दी। २. गोरोचन। वि०=कांचनीय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचनीय  : वि० [सं० कांचन+थ-ईय] १. सोने से या सोने का बना हुआ। कंचन या कांचन का। २. जिसने सोने की-सी आभा हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांचनी (ली)  : स्त्री० केंचुली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँचा  : वि० [सं० काँच] जो काँच के समान जल्दी टूट जानेवाला हो। वि० दे० ‘कच्चा’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काचिक  : पुं० [सं०√कांच्+इन्+कन्] काँजी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांची  : स्त्री० [सं०√कांच्+इन्+ङीष्] १. स्त्रियों के पहनने की एक प्रकार की करधनी जिसमें छोटी-छोटी घंटियाँ लगी होती है। २. प्राचीन भारत की सात पवित्र नगरियों में से एक कांजीवरम्। ३. घुँघची। ४. कपड़ों पर टाँकने का गोटा-पट्टा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँचुअ  : स्त्री० [सं० कंचुकी] अँगिया। चोली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँचुरी (ली)  : स्त्री०=कंचुली। उदाहरण—ज्यों काँचुरी भुअंगय तजही।—सूर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँचू  : पुं० [सं० कंचुल] केंचुली। स्त्री०=कंचुकी। (चोली)। वि० [हिं० काँच] १. (पदार्थ) जो काँच की तरह भंगुर हो। २. (व्यक्ति) जिसे काँच का रोग हो। ३. विकट अवसरों पर कांच खोल देनेवाला अर्थात् कायर या डरपोक। वि० कच्चा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँछना  : स०=काछना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँछा  : स्त्री० [सं० कांक्षा] [वि० काँछी]=आकांक्षा। पुं० =काछा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांजिक  : पुं० [सं० कु-अंजिका, ब० स० कु=क० आदेश] १. काँजी। २. चावल का ऐसा माँड़ जिससे खमीर उठने लगा हो। पचुई।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँजी  : स्त्री० [तामिल काडशी=माँड़ से सं०क√अंज्(आँजना)+अण्+ङीष्] १. ऊख के रस (सिरका) में नमक राई आदि डालकर तैयार किया जानेवाला एक प्रसिद्ध पेय पदार्थ जो स्वाद में खट्टा होता है। २. मट्ठे या दही का पानी। छाछ। ३. बिगड़ा या फटा हुआ दूध।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँजी हाउस  : पुं० [अं० काइन-हाउस] वह सरकारी या अर्द्ध सरकारी पशु-शाला जहां लोगों के छूटे या बहके हुए पशु पकड़ कर रख जाते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँट  : पुं० =काँटा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँटन  : स्त्री० [हिं० काटना] मार-काट। उदाहरण—पुनि सलार काँटन मति माहाँ।—जायसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँटा  : पुं० [सं० कटक] [वि० कँटीला] १. कुछ विशिष्ट प्रकार के पेड़-पौधों की डालियों तनों,पत्तों आदि पर उगनेवाला वह कड़ा, नुकीला और लंबा अंश जो अधिकतर सीधा और कभी-कभी कुछ टेढ़ा या मुड़ा हुआ भी होता है और जिसमें मुख्यतः काठवाला तत्त्व प्रधान होता है। कंटक। (थार्न) जैसे—गुलाब, नागफली, बबूल बेर या बेल का काँटा या काँटे। विशेष—शरीर के किसी अंग में कांटा चुभ जाने पर उसमें तब तक जलन और पीड़ा होती है जब तक वह निकल नहीं जाता। मुहावरा—(मार्ग हृदय आदि में का) काँटा निकलना=कष्ट देनेवाली अड़न या बाधा (अथवा विरोधी या शत्रु) का अलग या दूर होना या किसी प्रकार नष्ट हो जाना कांटा-सा(या काँटे=सा) खटकना-उसी प्रकार कष्टदायक होना जिस प्रकार शरीर में गड़ा या चुभा हुआ काँटा होता है। जैसे—(क)उनका उस दिन का व्यवहार आजतक मुझे काँटे सा खटक रहा है। (ख) यह दुष्ट लड़का सब की आँखों में कांटे-सा खटकता है। (किसी वस्तु का) सूखकर काँटा होना=बहुत कड़ा या नुकीला होकर ऐसा होना कि गड़ने लगे अथवा ठीक तरह से काम न दे सके। (किसी व्यक्ति का) सूखकर काँटा होना=चिंता दुर्बलता रोग आदि के कारण सूखकर दुबला-पतला हो जाना। (किसी के लिए या रास्ते में) काँटे बिछाना या बोना=किसी के कार्य या मार्ग में अनेक प्रकार की बाधाएँ या विघ्न खड़े करना अर्थात् बहुत अधिक शत्रुता का व्यवहार करना। उदाहरण—जो तोकों काँटा बुवै,ताहि बोउ तू फूल।—कबीर। विशेष—इस मुहावरे का प्रयोग दूसरों के अतिरिक्त स्वयं अपने लिए भी होता है। जैसे—हम ने आप ही आप ही अपने रास्ते में काँटे बिछाये (या बोये) हैं। काँटों पर लोटना=प्रायः ईर्ष्या, द्वेष, संताप आदि के प्रसंगों में ऐसी मानसिक कष्टपूर्ण स्थिति में रहना या होना कि मानों बैठने रहने या सोने की जगह पर बहुत काँटे बिछे हों, अर्थात् बहुत अधिक मानसिक कष्ट भोगना। जैसे—मैं तो यहाँ काँटों पर लेटती हूँ और सौत वहाँ फूलों से तुलती है। स्त्रियाँ। कांटों में घसीटना=(क) दूसरे के पक्ष में किसी को बहुत अधिक मानसिक या शारीरिक कष्ट पहुँचाना। (ख) स्वयं अपने पक्ष में विशेष आदर, प्रशंसा, सम्मान आदि होने पर अपनी नम्रता जतलाते हुए यह सूचित करना कि आप मुझे बहुत अधिक लज्जित कर रहे हैं। जैसे—आप तो मेरी इतनी बड़ाई करके मुझे काँटों में घसीटते हैं। पद—कांटे पर की ओस=बहुत ही थोड़े समय तक टिकने या ठहरने वाला (अर्थात् क्षणभंगुर) वैभव सुख या सुभीता। रास्ते का कांटा=किसी काम या बात में कष्टदायक रूप में सामने आनेवाली बाधा या व्यक्ति। जैसे—उस चुगलखोर के यहाँ से चले जाने से तुम्हारें रास्ते का काँटा निकल गया। २. उक्त के आधार पर जीभ अथवा शरीर के किसी अंग पर निकलनेवाला छोटा नुकीला अंकुर जो प्रायः फुंसी की तरह कष्टदायक होता और चुभता है। जैसे—व्यास रोग आदि के कारण गले या जीभ में कांटे पड़ना। (अर्थात् इन अंगों का सूखकर कड़ा और खुरदुरा हो जाना।) विशेष—प्रायः पशु-पक्षियों के गले में या जीभ पर रोग के रूप में इस प्रकार के काँटे निकल आते हैं; और यदि उपचार या चिकित्सा करके वे निकाले या नष्ट न किये जाएँ तो उनके कारण पशु-पक्षी मर भी जाते हैं। मुहावरा—(पशु या पक्षी को) कांटा लगना=उक्त प्रकार का रोग होना। ३. [स्त्री० अल्पा० कँटिया, काँटी] वानस्पतिक कांटे के आकार या रूप के आधार पर किसी धातु विशेषतः लोहे का वह पतला लम्बा टुकड़ा जिसका एक सिरा नुकीला और दूसरा चपटा होता है और जिसका उपयोग किसी कड़ी चीज को वैसी ही दूसरी चीज पर ठोंककर जड़ने या बैठाने के लिए होता है। कील। (नेल) ४. उक्त के आकार-प्रकार की कोई कड़ी, नुकीली और लंबी चीज। जैसे—साही नामक जंतु के शरीर पर काँटे घड़ी में लगे हुए घंटा, मिनट आदि बतलाने वाले काँटे, तराजू की डंडी के ऊपर बीचोंबीच लगा हुआ काँटा जो तौल की अधिकता और न्यूनता सूचित करता है। ५. उक्त के आधार पर किसी प्रकार का तराजू विशेषतः चाँदी, सोना, हीरे आदि जवाहिरात तौलने का छोटा तराजू। (स्केल) उदाहरण—मैं तौल लिया करती हूँ नजरों में हर इक को। काँटा सी हूँ, आँखें हैं तराजू से जियादह।—कोई शायर। मुहावरा—काँटे की तौल=हर तरह से बिलकुल ठीक, पक्का या पूरा। न तो आवश्यकता औचित्य आदि से कुछ भी कम और न कुछ भी अधिक। जैसे—आपकी हर बात कांटे की तौल होती है। ६. अँकुड़े या अँकुसी की तरह की कोई ऐसी कड़ी और नुकीली चीज जिसका सिरा कुछ झुका या मुड़ा हुआ हो। जैसे—कमीज या कोट के बटन, लगाने के काँटे, स्त्रियों के कान या नाक में पहनने के काँटे, मछली फँसाने का काँटा, कुएँ में गिरा हुआ डोल या लोटा निकालने का काँटा, पटहारों का गहने गूँथने का काँटा आदि। मुहावरा—काँटा डालना या लगाना=(क) जलाशय में से मछली फँसाने या कुएँ में से लोटा निकालने के लिए उसमें काँटा डालना। (ख) लाक्षणिक रूप में किसी को अपने जाल या फंदे में फँसाने के लिए कोई युक्ति करना। ७. पंजे के आकार का खेतिहारों का काठ का एक औजार जिससे वे घास भूसा इधर-उधर हटाते हैं। ८. उक्त प्रकार या रूप का धातु का एक छोटा उपकरण जिससे उठा-उठाकर पाश्चात्य देशों के लोग भोजन के समय चीजें खाते हैं। जैसे—इतना पढ़-लिखकर तुमने भी बस छुरी काँटे से खाना ही सीखा है। ९. एक प्रकार की आतिशबाजी जिसमें एक लम्बी लकड़ी के सिरे पर दोनों ओर दो डालें लगी रहती हैं। १॰. गणित में वह क्रिया जिससे यह जाना जाता है कि जो गणना की गई है वह ठीक है या नहीं। ११. उक्त के आधार पर गुणन-फल की शुद्धि की परीक्षा के लिए की जानेवाली वह क्रिया जिसके लिए पहले एक खडी़ लकीर बनाकर फिर उसे बेड़ी लकीर से काटते हैं। १२. कोई ऐसी प्रतियोगिता जो ईर्ष्या,द्वेष या वैर भाव से की जाय अथवा जिसका उद्देश्य प्रतियोगी को हराने के सिवा और कुछ न हो। जैसे—पहलवानों की काँटे की कुश्ती। अर्थात् ऐसी कुश्ती जिसमें वे सारी शक्ति लगाकर एक दूसरे को हराने का प्रयत्न करते हों। १३. किसी प्रकार के काँटे से अथवा किसी प्रकार की प्रतियोगिता में लगा या सहा हुआ कोई आघात या वार। १४. कैदियों को पहनाई जानेवाली हथकड़ी, बेड़ी और डंडा। मुहावरा—काँटा खाना=(क)किसी प्रकार की प्रतियोगिता में बुरी तरह से परास्त होना। (ख) कैद की सजा भुगतना जैसे—अभी तो हाल में वह कांटा खाकर आया है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँटा-चूहा  : पुं० [हिं० काँटा+चूहा] एक छोटा जानवर जिसकी पीठ छोटे-छोटे काँटों से भरी होती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांटा-बाँस  : पुं० [हिं० काँटा+बाँस] एक प्रकार का कँटीला बाँस। मगर बांस। नाल बाँस।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँटी  : स्त्री० [हिं० काँटा का स्त्री अल्पा०] १. किसी प्रकार का छोटा काँटा। २. छोटी कँटिया। अँकुड़ी। ३. साँप पकड़ने की वह लकड़ी जिसमें अँकुड़ी लगी होती है। ४. बेड़ी और हथकडी़। मुहावरा=काँटी खाना-कैद या जेल की सजा भुगतना। ५. वह रूई जो धुनने पर भी बिनौलों के साथ लगी रह जाती है। ६. लड़कों का एक प्रकार का खेल जिसमें वे डोरे में कंकड़ आदि बाँधकर लड़ाते हैं। लंगर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांठली  : स्त्री० [सं० कंठ-अवलि] १. गले में पहनने का कंठा। २. कंठे के आकार का मेघों का समूह। उदाहरण—काली करि काँठलि ऊजल कोरण।—प्रिथीराज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँठा  : पुं० [सं० कंठ] १. गला। २. गले का एक आभूषण। ३. तोते के गले में बनी हुई लाल नीली मंडलाकार रेखा। ४. किनारा। तट। ५. पार्श्व। बगल।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांड  : पुं० [सं० कण्(दीप्ति)+ड,दीर्घ] १. किसी वस्तु का कोई खंड या भाग। २. वनस्पतियों के तने का दो गाँठों के बीच का भाग। पोर। ३. वृक्षों का तना। ४. वनस्पतियों या वृक्षों की डालियाँ। ५. किसी कार्य या कृति का कोई भाग। ६. किसी ग्रन्थ या पुस्तक का कोई अध्याय या प्रकरण। ७. सरकंडा। ८. गुच्छा। ९. समूह। वृंद। १॰. हाथ या टाँग की लंबी हड्डी। ११. धनुष के बीच का मोटा भाग। १२. बाण। तीर। १३. छड़ी। डंडा। १४. जल। १५. निर्जन स्थल। १६. अवसर। १७. प्रपंच। १८. बहुत बड़ी दुर्घटना। कोई अप्रिय या अशुभ घटना। जैसे—हत्या-कांड। वि० कुत्सित। बुरा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांड तिक्त  : पुं० [स० त०] चिरायता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांड-त्रय  : पुं० [ष० त०] वेद के तीन विभाग जिसको कर्मकांड उपासनाकांड और ज्ञानकांड कहते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांडधार  : पुं० [सं० कांड√धृ (धारण)+णिच्+अच्] १. पाणिनि के अनुसार एक प्राचीन प्रदेश। २. उक्त प्रदेश का निवासी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांड़ना  : स० [सं० कंडन (=रौंदकर अनाज की भूसी अलग करना)] १. पैरों से कुचलना। रौंदना। २. धान कूटकर उसमें का चावल और भूसी अलग करना। (धान) कूटना। ३. खूब पीटना या मारना।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांड-पृष्ठ  : पुं० [ब० स०] १. बहुत बड़ा या भारी धनुष। २. कर्ण के धनुष का नाम। ३. योद्धा। सैनिक। ४. वह ब्राह्मण जो तीर तथा दूसरे अस्त्र-शस्त्र बनाकर जीविका उपार्जन करता हो। ५. वह जो अपना कुल छोड़कर किसी दूसरे के कुल में जा मिले।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांड-भग्न  : पुं० [स० त०] वैद्यक में आघात आदि से हड्डी का टूटना। (फ्रैक्चर)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांडर्षि  : पुं० [कांड-ऋषि, ष० त०] वेद के किसी कांड या विभाग (कर्म, ज्ञान और उपासना) का विवेचन करनेवाला ऋषि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांडवान् (वत्)  : पुं० [सं० कांड+मतुप्] तीर चलाने या छोड़नेवाला योद्धा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांडा  : पुं० [सं० कांड] [स्त्री० अल्पा० काँड़ी] १. लकडी का लंबा लट्ठा। २. छोटा सूखा डंठल। पुं० [सं० कर्णक] १. लकड़ियों, वनस्पतियों आदि में लगनेवाला एक प्रकार का कीड़ा। २. दाँतों में लगनेवाला कीड़ा। वि०=काना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांडिका  : स्त्री० [सं० कांड+ठन्-इक, टाप्] १. पुस्तक का कोई खंड या विभाग। २. एक प्रकार का अन्न। ३. एक तरह का कुम्हड़ा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँड़ी  : स्त्री० [सं० कांड] १. कुछ विशिष्ठ प्रकार के वृक्षों का वह लंबा पतला तना जो बाँस या हल्के शहतीर की तरह छाजन आदि के काम में आता है। पद—काँड़ी कफन=शव की अर्थी बनाने की सामग्री। २. जहाजों, नावों, आदि के लंगर में का लोहे का लंबा डंडा। ३. मछलियों का झुंड या झोल। छाँवर। ४. किसी चीज का कोई छोटा लंबा टुकड़ा। डंडी। डाँड़ी। उदाहरण—औ सोनहा सोने की डाँड़ी। सारदूर रूपे की काँड़ी।—जायसी। स्त्री० [पं०कंडन] भूमि में बनाया हुआ वह गड्ढा जिसमें रखकर धान कूटा जाता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांत  : वि० [सं०√कन् (दीप्ति) वा कम (इच्छा)+क्त] १. कोमल और मनोहर। २. प्रिय और रुचिकर। ३. सुन्दर। पुं० १. वह जो किसी से अनुराग रखता या प्रेम करता हो। प्रेमी। २. पति। स्वामी। जैसे—लक्ष्मीकांत। ३. विष्णु। ४. शिव। ५. कार्तिकेय। ६. चंद्रमा। ७. वसन्त ऋतु। ८. कुंकुम। ९. हिंजल का पेड़। १॰०कांतिसार लोहा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांत-पक्षी  : (क्षिन्)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांत-पाषाण  : पुं० [कर्म० स०] चुंबक पत्थर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांत-लौह  : पुं० [कर्म० स] कातिसार लोहा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांता  : स्त्री० [सं० कांत+टाप्] १. प्रिय या सुन्दरी स्त्री। २. प्रेमिका। ३. पत्नी। भार्या।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांतार  : पुं० [सं० कांत√ऋ (गति)+अण्] १. बहुत घना और भीषण जंगल या वन। २. बहुत ही उजाड़ और भयावना स्थान। ३. दुरूह या विकट मार्ग। ४. केतारा। ऊख। ६. बाँस। ६. छिद्र। छेद। ७. दरार। संधि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांतारक  : पुं० [सं० कांतार+कन्] केतारा। (ईख)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांतासक्ति  : स्त्री० [कांत-आसक्ति, स० त०] अपने को पत्नी या प्रेयसी तथा परमात्मा को पति या प्रेमी मानकर की जानेवाली भक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांति  : स्त्री० [सं०√कम् (चमकना)+क्तिन्] १. मनुष्य (विशेषतः स्त्री) के स्वरूप की छवि, शोभा या सौंदर्य। दैहिक या वैयक्तिक श्रृंगार या सजावट और उसके कारण बननेवाला मोहक रूप। २. प्रेम से युक्त तथा वर्णित शारीरिक सौंदर्य। ३. आभा। प्रकाश। ४. शोभा। सौंदर्य। ५. चन्द्रमा की १६ कलाओं में से एक जो उसकी पत्नी भी मानी गई है। ६. आर्या चंद का एक भेद जिसमें १६ लघु और २५ गुरु मात्राएँ होती हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांतिकर  : वि० [सं० कांति√कृ (करना)+ट] कांति (शोभा या सौंदर्य) बढ़ानेवाला। सुशोभित करनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांतिभृत्  : पुं० [सं० कांति√भृ (धारण करना)+क्विप्] चन्द्रमा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांतिमान् (मत्)  : वि० [सं० कांति+मतुप्] १. कांति से युक्त। २. चमकीला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांतिसुर  : पुं० [सं० सुरकांति] सोना। स्वर्ण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँती  : स्त्री० [सं० कर्त्तरी] १. कैंची। २. छुरी। ३. बिच्छू का डंक। स्त्री०=कांति।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांथरि  : स्त्री=कथरी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांदन  : पुं० [सं० कंडन] मारकाट। उदाहरण—पुनि सलार काँदन मतिमाँहा।—जायसी। पुं० [सं० क्रंदन] रोना-पीटना।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँदना  : अ० [सं० क्रंदन] रोना, विशेषतः चिल्लाकर या जोर से रोना। स० [सं० कंडन] १. रौंदना। २. पानी मिलाकर गूँथना। उदाहरण—पहिलहि काहि न काँदहु आटा।—जायसी।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँदला  : पुं० [हिं० काँदा] १. कीचड़। २. मैल। वि० गँदला। मैला। पुं० =कँदला।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँदव  : पुं० =काँदो।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांदव  : पुं० [सं० कंदु+अण्] चूल्हे या कड़ाही में भूनी हुई चीज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांदविक  : पुं० [सं० कांदव+ठक्-इक] १. खाद्य पदार्थ बनाने और बेचनेवाला व्यक्ति। २. हलवाई।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँदा  : पुं० [सं० कंद] १. एक प्रकार का गुल्म जिसमें प्याज की-सी गाँठ पड़ती है। २. प्याज। पुं० =काँदो (कीचड़)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँदू  : पुं० =काँदो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँदो  : पुं० [सं० कर्दम, पा० कद्दम] कीचड़। पंक। पुं० [सं० कादविक] बनियों की एक जाति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांध  : पुं० १. =कंधा। २. =कान्ह। (श्रीकृष्ण)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँधना  : स० [हिं० काँध] १. कंधों पर या अपने ऊपर लेना, रखना, उठाना। उदाहरण—मैं होइ भेंड़ मारू सिर काँधा।—जायसी। २. ठानना। मचाना। उदाहरण—जौ पहिलैं मन मान न काँधिअ। जायसी। ३. अंगीकार या ग्रहण करना। सहन करना। सहना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँधर  : पुं० [सं० कृष्ण, प्रा० कण्ड] कृष्ण।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँधा  : पुं० =कान्हा (श्रीकृष्ण)। पुं० =कंधा।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँधी  : स्त्री० [हिं० काँधा] कंधा। मुहावरा—काँधी मारना=(क) घोड़े का अपनी गरदन को इतने जोर से झटका देना कि सवार का आसन हिल जाय। (ख) टाल-मटोल करना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँन  : पुं० १. =कान्ह (श्रीकृष्ण) २. =कान (सुनने की इंद्रिय)।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँप  : पुं० [सं० कल्प, प्रा० कप्प, पा० कप्पो, गु० बँ० काँप, सि० कापु, मरा० काप] १. बाँस आदि को काटकर बनाई जानेवाली पतली तथा लचीली तीली। २. गुड्डो या पतंग में लगाई जानेवाली बाँस की अर्द्धगोलाकार तीली। ३. सूअर का खाँग। ४. हाथी का दाँत। ५. कान में पहनने का एक प्रकार का गहना जिससे प्रायः सारा कान ढक जाता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँपना  : स० [सं० कंपन] १. शीत आदि के कारण शरीर का रह-रहकर बराबर थोड़ा हिलते रहना। थरथराना। २. क्रोध, भय आदि के कारण शरीर का उक्त प्रकार से हिलना। थर्राना। ३. बहुत अधिक भयभीत होना। जैसे—हम तो उनके सामने जाते काँपते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँपा  : पुं० १. =काँप। २. =कंपा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांपिल  : पुं० [सं० कंपिल+अण्] एक प्राचीन प्रदेश जो किसी समय पांचाल का दक्षिणी भाग था। (आज-कल फर्रूखाबाद के आस-पास)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांपिल्य  : पुं० [सं० कम्पिला+ण्य] दे० ‘कांपिल’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँब  : स्त्री० [सं० कल्प, हिं० काँप] छड़ी (राज०।)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांबोज  : वि० [सं० कंबोज+अण्] १. कंबोज देश (अर्थात् गांधार के आस-पास) का। कंबोज देश-संबंधी। पुं० कंबोज देश का निवासी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांमर  : स्त्री० १=कांवर (बँहगी)। २. =कंबल।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँय-काँय  : स्त्री० [अनु०] १. कौए के बोलने का शब्द। २. अप्रिय तथा कर्कश ध्वनि। जैसे—काँय-काँय मत करो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँव-काँव  : पुं० [अनु०]=काँयँ-काँयँ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँवर  : स्त्री० [सं० काँवाँरथी से] एक विशेष प्रकार की बहँगी जिसमें बाँस के टुकड़े के दोनों सिरों पर पिटारियाँ बँधी रहती हैं और जिसमें सामान रखकर काँवाँरथी तीर्थ-यात्रा करने निकलते हैं।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँवरा  : वि० [पं० कमला=पागल] [स्त्री० काँवरी] १. घबराया हुआ। भौचक्का। हक्काबक्का। २. विकल। व्याकुल।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँवरिया  : पुं० [हिं० काँवरि] वे कहार या मजदूर जो काँवर बहँगी पर पानी या दूसरे सामान लादकर ले चलते हैं। स्त्री०=कांवर।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँवरू  : पुं० [सं० कामरूप] कामरूप (देश) पुं० =कमल। (रोग) वि०=काँवरा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँवारथी  : पुं० [सं० कामार्थी] वह तीर्थ-यात्री जो अपनी कोई कामना पूरी कराने के उद्देश्य से कंधे पर काँवर उठाकर तीर्थ-यात्रा के लिए चलता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँस  : पुं० [सं० काश] १. परती अथवा ऊँची और ढलुई जमीन में होनेवाली एक प्रकार की लंबी घास जो शरद् ऋतु में फूलती है। उदाहरण—फूले कास सकल महि छाई।—तुलसी। मुहावरा—काँस में तैरना=मृग तृष्णा के फेर में पड़कर इधर-उधर भटकना। २. विकट या संकटपूर्ण स्थिति। मुहावरा—काँस में पड़ना या फँसना=विपत्ति या संकट में पड़ना या फँसना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँसा  : पुं० [सं० कास्य] [वि० कांसी] एक मिश्र जातु जो ताँबे जस्ते आदि के योग से बनती है। कसकुट। यौ-कँसभरा-काँसे का गहना बनाने और बेचनेवाला। वि० [सं० कनिष्ठ] भीख माँगने का खप्पर या ठीकरा। उदाहरण—जब हाथ में लिया कांसा। तब भीख का क्या सांसा।—कहा०।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँसागर  : पुं० [हिं० कांसा+फा० गर (प्रत्यय)] काँसे आदि के गहने बरतन आदि बनानेवाला (व्यक्ति)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँसार  : पुं० =कांसागर।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँसी  : स्त्री० [सं० काश] धान के पौधे में होनेवाला एक रोग। स्त्री०=काँसा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काँसुला  : पुं० [हिं० काँसा] १. काँसे का वह चौकोर मोटा टुकड़ा जिस पर चारों ओर गढ्ढे आदि बने होते हैं और जिसकी सहायता से सुनार अर्द्ध-गोलाकार या गोलाकार चीजें बनाते हैं। २. काँसे या गिल्ट का बना हुआ गहना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांस्य  : पुं० [सं० कांस+यञ्] कांसा। कसकुट। (धातु)। वि०१. काँसे का बना हुआ। २. काँसे से संबंध रखनेवाला। काँसे का।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांस्यक  : पुं० [सं० कास्य+कन्] पीतल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांस्यकार  : पुं० [सं० कास्य√कृ (करना)+अण्] कसेरा। ठठेरा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांस्य-ताल  : पुं० [मध्य० स०] ताल या मँजीरा नामक बाजा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांस्य-दोहनी  : स्त्री० [मध्य० स०] कांस्य का बना हुआ दूध दूहने का पात्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांस्य-मल  : पुं० [ष० त०] ताँबे-पीतल आदि धातुओं में लगनेवाला जंग या मोरचा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कांस्य-युग  : पुं० [ष० त०] पुरातत्त्व में प्रागैतिहासिक काल का वह विभाग जो प्रस्तर युग के बाद और लौह-युग के पहले माना जाता है और जिसमें औजार, हथियार आदि काँसे के ही बनते थे। ताम्रयुग। (ब्रांज एज)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
का  : प्रत्य० [विभक्तिप्रत्यय] [स्त्री की] षष्ठी विभक्ति का चिन्ह जो संबंध का सूचक होता है। जैसे—राम का घोड़ा। अव्य०=क्या (प्रश्नवाचक) सर्व० ब्रजभाषा में ‘कौन’ का वह रूप जो उसे विभक्ति लगने से पहले प्राप्त होता है। जैसे—काकों, कासों।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काइ  : अव्य० [सं० कः] १. क्या। २. चाहे। (राज०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काइच  : पुं० =कायस्थ।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काइयाँ  : वि० [हिं० चाइयाँ का अनु०] बहुत बड़ा चालाक या धूर्त।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काई  : स्त्री० [सं० कावार] १. एक प्रकार की प्रसिद्ध बहुत छोटी वनस्पति जो जल में उगकर उसके कंकड़ों, पत्थरों आदि पर जम जाती है और जिस पर पैर पड़ने से आदमी और जानवर प्रायः फिसल जाते हैं। मुहावरा—काई की तरह फट जाना=बिलकुल छिन्न-भिन्न होकर इधर-उधर हो जाना। २. कोई ऐसा मैल जो कहीं अच्छी तरह जम या बैठ गया हो। जैसे—पहले इन बरतनों पर की काई छुड़ालो तब तीर्थ-यात्रा करने निकलना। ३. दरिद्रता आदि के कारण उत्पन्न दुर् अवस्था। जैसे—कुछ काम-धंधा करना सीखो जिससे घर की काई छूटे। ४. मन में एकत्र कलुष दुर्भाव पाप आदि मल। मलीनता। जैसे—पहले अपने मन की काई छुड़ा लो, तब तीर्थ-यात्रा करने निकलो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काउ  : अव्य०=काऊ (कभी)।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काउरू  : स्त्री०=काँवर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काऊ  : अव्य० [सं० कदा] कभी। सर्व० १. =कोई। २. =कुछ (ब्रज०)। पुं० =काहू।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकंदि  : स्त्री० [सं० ] आधुनिक कोकंद देश का पुराना नाम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक  : पुं० [सं० कै (शब्द करना)+कन्] १. कौआ नामक प्रसिद्ध पक्षी। २. लाक्षणिक अर्थ में ऐसा व्यक्ति जो बहुत अधिक चालाक या धूर्त हो। २. माथे पर तिलक लगाकर बनाई हुई आकृति। पुं० =काग (वृक्ष और उसकी छाल)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-गोलक  : पुं० [ष० त०] कौए की आँख की पुतली। विशेष—ऐसा प्रवाद है कि कौए की एक पुतली होती है जिसे वह आवश्यकतानुसार आँखों या गोलकों में पहुंचा सकता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-जंघा  : स्त्री० [ब० स०] १. एक प्रकार की वनस्पति। चकसेनी। मसी। २. मुगवन नाम की लता। ३. गुंजा। घुँघची।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकड़ा  : पुं० [सं० कर्कट, प्रा० कक्कड़] १. बारहसिंघे की जाति का गाढ़े कत्थई रंग का एक जंगली पशु जो लगभग २॰-२२ फुट ऊंचा तथा ३ फुट लंबा होता है। २. एक प्रकार का पहाड़ी पेड़।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकड़ासींगी  : स्त्री० [सं० कर्कटश्रृंगी] एक प्रकार की पर-जीवी वनस्पति जो काकड़ा नामक वृक्ष पर चढ़कर फैलती और बढ़ती है और जिसका ओषधि में उपयोग होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकतालीय  : वि० [सं० काकताल+छ-ईय] ठीक उसी प्रकार अचानक और आप-से-आप संयोगवश तथा सहसा हो जानेवाला जिस प्रकार किसी कौए के बैठते ही ताड़ का कोई फल गिर पड़ता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकतालीय न्याय  : पुं० [कर्म० स०] एक प्रकार का सिद्धांत सूचक न्याय या कहावत जिसका प्रयोग ऐसे अवसरों पर होता है जब कोई एक बड़ी घटना संयोगवश बहुत बड़ी घटना के साथ या एक ही समय में हो जाती है और दोनों घटनाओं में कार्य-कारण संबंध का धोखा होने की संभावना रहती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकतंड़ी  : स्त्री० [सं० काक√तुण्ड् (नष्ट करना)+अण्-ङीष्] कौआटोंटी (पौधा)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-दंत  : पुं० [ष० त०] वैसी ही अनहोनी या असंभव बात जैसी कौए के दाँत होने की चर्चा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-ध्वज  : पुं० [ब० स०] बाड़वानल बाड़वाग्नि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-नासा (नासिका)  : स्त्री० [ब० स०] काक-जंघा नामक वनस्पति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-पक्ष  : पुं० [ब० स०] बालों के वे पट्टे जो पुराने जमाने में दोनों ओर कानों के ऊपर रक्खे जाते थे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-पद  : पुं० [ब० स०] १. लिखने में एक प्रकार का चिन्ह जो लेख में पंक्ति के नीचे यह सूचित करने के लिए लगाया जाता है कि यहाँ वह पद या शब्द छूट गया है जो उसके ऊपर लिखा गया है। इसका रूप यह है -^। २. हीरे का एक प्रकार का दोष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकपदी (दिन्)  : वि० [सं० काक-पद, ष० त०+इनि] काकपद के आकार या रूप का। इस आकार का-^
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकपुष्ट  : पुं० [तृ० त०] कोयल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-फल  : पुं० [ब० स०] नीम का पेड़ जिसके फल (नीम कौड़ी) कौए खाते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-बंध्या  : स्त्री० [उपमि० स०] ऐसी स्त्री जो एक संतान प्रसव करने के बाद बाँझ हो गई हो। एक बाँझ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकब  : पुं० =काकपक्ष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-बलि  : स्त्री० [मध्य० स०] श्राद्ध के समय भोजन का वह अंश जो कौओं को दिय़ा जाता है। कागौर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकभुशुंडि  : पुं० एक राम-भक्त ब्राह्मण जो लोमश ऋषि के शाप से कौआ हो गए थे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकमाची  : स्त्री० [सं० काक√मञ्च् (धारण करना)+अण्, ङीष् (पृषो) नलोप] मकोय नामक पौधा और उसका फल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-माता (तृ)  : स्त्री० [ष० त०]=काकमाची।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकमारी  : स्त्री०=ककमारी (लता)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काक-रव  : पुं० [ष० त०] १. कौए का शब्द। २. [ब० स०] लाक्षणिक अर्थ में ऐसा व्यक्ति जो व्यर्थ में अथवा जरा-सी बात होने पर होहल्ला मचाने लगे। ३. कायर या डरपोक व्यक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकरी  : स्त्री०=कंकड़ी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकरूक  : पुं० [सं० कु√कृ (करना)+ऊक, कु०=क] १. उल्लू। २. पत्नी का आज्ञाकारी और भक्त। जोरू का गुलाम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकरेज  : पुं० [फा०] एक प्रकार का गहरा काला रंग जिसमें ऊदे या नीले रंग की भी कुछ छाया होती हो। वि० उक्त प्रकार के रंग का। काकरेजी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकरेजा  : पुं० [फा०] काकरेज रंग का कपड़ा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकरेजी  : वि० [फा०] ऐसा गहरा काला जिसमें ऊदे या नीलेपन की भी कुछ झलक हो। पुं० उक्त प्रकार का रंग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकल  : पुं० [कु-कल, ब० स० कु=क] [वि० काकली] १. गले के अंदर की घंटी। २. कौआ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकली  : स्त्री० [सं० कु-कलि, प्रा० स० कु०=क, काकलि+ङीष्] १. ऐसी कल या नाद जो मंद तथा मधुर हो। कोमल तथा प्रिय ध्वनि या स्वर। २. संगीत में ऐसा मन्द तथा मधुर स्वर जो यह जानने के लिए उत्पन्न किया जाता है कि कोई जाग रहा है या सो रहा है। ३. घुँघची। ४. साठी धान। ५. काकली द्राक्षा (देखें)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकली-द्राक्षा  : स्त्री० [सं० मध्य० स०] १. एक प्रकार का छोटा अंगूर या दाख जिसे सुखा कर किशमिश बनाते हैं। २. किशमिश।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकली-निषाद  : पुं० [सं० मध्य० स०] संगीत में निषाद स्वर का एक विकृत रूप।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकली-रव  : पुं० [ब० स०] [सं० काकली-रवा] कोयल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकलोद  : स्त्री० [सं० आकुलता] मन में होनेवाली किसी प्रकार की आकुलता या विकलता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकांगा  : स्त्री० [सं० काक-अंग, ब० स० टाप्] काकजंघा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काका  : पुं० [फा० काका=बड़ा भाई] [स्त्री० काकी] १. पिता का छोटा भाई। चाचा। २. छोटा बच्चा। (पश्चिम)। स्त्री० [सं० काक+अच्, टाप्] १. कांकजंघा। मसी। २. काकोली। ३. घुँघची। ४. कठ-गूलर। कठमर। ५. मकोय।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काका-कौआ  : पुं० =काकातुआ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकाक्षिगोलक  : पुं० [काक-अक्षिगोलक, ष० त०]=काकगोलक (दे०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकाक्षिगोलक-न्याय  : पुं० [सं० कर्म० स०] उस स्थिति का सूचक नियम या सिद्धांत जिसमें कोई तत्त्व या बात दोनों ओर या पक्षों में समान रूप से ठीक बैठती हो। (अर्थात् उसी प्रकार बैठती हो जिस प्रकार लोकमान्यता के अनुसार कौए की एक पुतली उसके दोनों गोलकों में फिरती है।) काकातुआ पुं० [मला० ककाटू] तोते की जाति का एक बड़ा पक्षी जो प्रायः अपनी सुन्दरता के लिए पाला जाता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकारि  : पुं० [काक-अरि, ब० स०] उल्लू।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकिणी  : स्त्री० [सं०√कक् (लौल्य)+णिनि, ङीष्, णत्व] १. प्राचीन भारत में मुद्रा का एक मान जो पण का चौथाई भाग अर्थात् २॰ कौड़ियों का होता था। २. एक प्राचीन तौल जो एक माशे की चौथाई होती थी। ३. कौड़ी। ४. गुंजा। घुँघची।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकिनी  : स्त्री०=काकिणी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकिल  : पुं० [सं० कु√कृ (विक्षेप)+क, ऋ=इर्, र=ल, कु०=क] मधुर ध्वनि या स्वर। काकली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकी  : स्त्री० [सं० काक+ङीष्] काक अर्थात् कौए की मादा। स्त्री० [हिं० काक] १. काका या चाचा की पत्नी। चाची। २. छोटी बच्ची या लड़की। (पश्चिम)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकु  : पुं० [सं०√कक्+अण्] १. वह विचित्र या परिवर्तित ध्वनि जो आश्चर्य, कष्ट, क्रोध, भय आदि के कारण मुँह से निकलती है। ऐसी बात जो अप्रत्यक्ष रूप से किसी का मन दुखाती हो। २. वक्रोक्ति अलंकार का एक भेद, जिसमें किसी की काकु उक्ति में कही हुई बात का दूसरे द्वारा अन्य अर्थ कल्पित किया जाता है। जैसे—नव रसाल वन विहरण सीला। सोह कि कोकिल विपिन करीला।—तुलसीदास।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकुत्स्थ  : पुं० [सं० ककुत्स्थ+अण्] ककुत्स्थ राजा के वंश में उत्पन्न व्यक्ति। २. श्रीराम -चन्द्रजी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकुद  : पुं० [सं० काकु√दा (देना)+क] तालु।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकुन  : स्त्री०=कंगनी (अन्न)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकुल  : पुं० [फा०] कनपटी पर लटकते हुए ऐसे लंबे बाल जो सुंदर जान पड़ें। जुल्फ। मुहावरा—काकुल छोड़ना=बालों की जुलफें इधर-उधर निकालना या लटकाना। काकुल झाड़ना=बालों में कंघी करना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकु-वक्रोक्ति  : स्त्री० [कर्म० स०] दे० काकु।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकोदर  : पुं० [काक-उदर, ब० स०] [स्त्री० काकोदरी] साँप।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकोल  : पुं० [सं० कु√कुल् (पीड़ित करना)+घञ्, कु०=का] एक प्रकार का विष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकोली  : स्त्री० [सं० काकोल+ङीष्] एक प्रकार की वनस्पति जिसका कंद औषध के काम आता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काकोलूकीय-न्याय  : पुं० [सं० काक-उलूक, द्व० स० काकोलूक+छ-ईय, काकोलूकीय-न्याय, कर्म० स०] ऐसी स्थिति जो इस बात की सूचक हो कि यहाँ दोनों पक्षों में वैसा ही वैर है जैसे स्वभावतः कौवे और उल्लू में होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काग  : स्त्री० [सं० काक] १. कौआ। वायस। २. श्राद्ध आदि में कौओं को दिया जानेवाला उनका अंश। जैसे—कागै, काग, न भिखारी भीख।—कंजूस के संबंध में कहा०। पुं० [अं० कार्क] १. बबूल की जाति का एक बड़ा पेड़ जिसकी मुलायम लचीली और हलकी छाल से बोतलों, शीशियों आदि के मुंह बंद करने के लिए डाट बनते हैं। २. उक्त वृक्ष की छाल से बने हुए वे गोलाकार डाट जो बोतलों, शीशियों आदि के मुँह बंद करने के काम आते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागज  : पुं० [अ०] [वि० कागजी] १. कपड़े के चिथड़ों कई प्रकार की घासों, बाँसों आदि को गलाकर उनके गूदे से बनाया जानेवाला एक प्रसिद्ध पदार्थ जिस पर कलम, पेंसिल आदि से लिखा जाता है। मुहावरा—कागज काला करना=(क) कागज पर कुछ लिखना। (ख) यों ही या व्यर्थ मे लिखना। कागज रँगना=बहुत-से कागजों को व्यर्थ का विस्तार करते हुए लिख-लिखकर भरना। कागज के (या कागजी) घोड़े दौड़ाना=केवल पत्र आदि लिखकर कहीं या किसी के पास भेजना। पद—कागज की नाव=ऐसी वस्तु जिसका अस्तित्व बहुत ही अस्थायी या क्षणिक हो। २. ऐसी आवश्यक पत्र, लेख्य आदि जिनका कुछ विधिक महत्त्व हो। जैसे—वकील को कागज दिखाना पद—कागज पत्र=दस्तावेज। ३. समाचार-पत्र (बंगाल)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागजात  : पुं० [अ० कागज का बहु०] बहुत-से कागज-पत्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागजी  : वि० [अ० कागज] १. कागज का बना हुआ। २. कागज पर लिखकर किया जानेवाला। जैसे—कागजी कार्रवाही। ३. कागज पर लिखा हुआ। जैसे—कागजी सबूत। ४. कुछ विशिष्ट फलों के संबंध में जिनका छीलका पतला, मुलायम या हलका होता हो। जैसे—कागजी नींबू, कागजी बादाम। पुं० कागज-विक्रेता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागजी-नीबू  : पुं० [हिं०] पतले तथा मुलायम छिलकेवाला एक प्रकार का बढ़िया नीबू।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागजी बादाम  : पुं० [फा०] एक प्रकार का बादाम जिसका ऊपरी छिलका अपेक्ष्या पतला तथा मुलायम होता है। (कड़े और मोटे छिलकेवाला बादाम ‘काठा’ कहलाता है।)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागद  : पुं० =कागज।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागभुसुंड, कागभुसुंडि  : =काकभुसुंडि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागमारी  : स्त्री० [?] एक प्रकार की नाव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागर  : पुं० [अ० कागज] १. लिखने का कागज। उदाहरण—सात सरग जौं कागर करई।—जायसी। २. पक्षियों के पंख या पर जो कागज की तरह पतले और हलके होते हैं।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागरी  : वि० [हिं० कागर=कागज] १. कागज की तरह पतला और हलका। २. तुच्छ। हीन।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागल  : पुं० =कागज। उदाहरण—लिखि राखे कागल नख लेखरिया।—प्रिथीराज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागला  : पुं० [सं० कालक] १. गले की घंटी। २. कौआ। (राज)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागा  : पुं० [सं० काक] काक (कौए) का संबोधन कारक में होनेवाला रूप। जैसे—कागा, नैन निकाल दूँ, पिया पास ले जाव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागाबासी  : स्त्री० [हिं० काग+बासी] सवेरे-सवेरे पी जानेवाली भाँग। पुं० काले रंग का एक प्रकार का मोती।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागारोल  : पुं० [हिं० काग=कौवा+रोर=शोर] कौओं की तरह मचाया जानेवाला हो-हल्ला। बहुत अधिक और बेढंगा हुल्लड़ या शोरगुल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागिया  : स्त्री० [देश] तिब्बत में होनेवाली एक प्रकार की भेड़। पुं० [हिं० काग=कौआ] बाजरे की फसल में लगनेवाला एक प्रकार का काला कीड़ा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कागौर  : पुं० [सं० काकबलि] पितरों कें श्राद्ध आदि फसल में कव्य का वह भाग जो कौए के लिए निकाला जाता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काच  : पुं० [सं०√कच्(बंधन)+घञ्] १. शीशा। २. काला नमक। ३. मोम। ४. खारी मिट्टी। ५. आँख का एक रोग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काचक  : पुं० [सं० काच+कन्] १. काँच। शीशा। २. पत्थर। ३. खार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काच-मणि  : पुं० [उपमि० स० या मयू० स०] बिल्लौर। स्फटिक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काच-मल  : पुं० [ष० त०] काला नमक या सोडा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काचरी (ली)  : स्त्री० १=केंचुली। २. =कचरी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काच-लवण  : पुं० [मध्य० स०] काला नमक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काचा  : वि०=कच्चा।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काची  : स्त्री० [हिं० कच्चा] १. मिट्टी की हाँड़ी जिसमें दूध उबाला तथा रखा जाता है। २. तीखुर, सिघाड़े आदि का हलुआ।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काचो  : वि०=कच्चा।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काछ  : स्त्री० [सं० काक्षः] १. पेड़ू और जाँघ तथा उसके नीचे का स्थान। २. धोती का वह भाग जो कमर में खोंसा जाता है। लाँग। ३. अभिनय के समय नटों का वेश धारण करना। मुहावरा—काछ काछना=भेस बनाना। पुं० =कोख।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काछन  : =स्त्री० [हिं० काछना] काछने की क्रिया या भाव। स्त्री०=काछनी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काछना  : स० [हिं० काछ] १. धोती आदि के एक या दोनों पल्लों या लाँगों को दोनों टाँगों के बीच में से पीछे की ओर निकाल कर कमर में कस कर खेंसना। २. भेस बदलना या भेस धारण करना। ३. सजा कर तैयार करना। उदाहरण—ऊपर नाच अखारा काछा।—जायसी। स० [सं० कषण] उँगली या हथेली से कोई तरल पदार्थ समेट कर इकट्ठा करना या उठाना। जैसे—कटोरी में से घी या तेल काछना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काछनी  : स्त्री० [हिं० काछना] १. धोती पहनने का वह ढंग जिसमें दोनों ओर की लाँगे पीछे की ओर खोंसी जाती है। २. उक्त प्रकार से पहनी हुई धोती। ३. घाघरे की तरह का एक प्रकार का पहनावा जो प्रायः घुटनों तक का होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काछा  : पुं० [सं० कक्ष, प्रा० कच्छ] १. पेड़ू के नीचे और रागों के बीच का स्थान। मुहावरा—(चलने में) काछा लगाना=दोनों रानों का आपस में रगड़ खाना। २. धोती का वह अंश जो उक्त स्थान पर ले जाकर पीछे की ओर खोंसा जाता है। लाँग। मुहावरा—काछा कसना=कोई काम करने के लिए कमर कसकर तैयार होना। काछा खोलना-(क) साहस या हिम्मत छोड़ना। कायरता दिखाना। (ख) संभोग करना। काछा लगना=धोती के उक्त अंग की रगड़ के कारण रान में या उसके आस-पास घाव या फुंसियाँ होना। ३. अभिनय के समय का नटों का वेश। ४. बदला या बनाया हुआ भेस। मुहावरा—काछा कछना=भेस बनाना। स्वाँग रचना। उदाहरण—(क) सब काछ कसे सब नाच नचे उस रसिया छैल रिझाने को।—नजीर। (ख) जैसा काछा काछिए वैसा नाच नाचिए।—काह।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काछी  : पुं० [सं० कच्छ=जलप्राय देश] तरकारी बोने और बेचनेवालों की एक जाति। वि०=कच्छी (कच्छ देश का)। वि० [हिं० काछ=कक्ष] काछ या कोखवाला।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काछू  : पुं० =कछुआ। उदाहरण—चेला मच्छ, गुरु जिमि काछू।—जायसी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काछे  : क्रि० वि० [सं० कक्ष, प्रा० कच्छ] निकट। पास। नजदीक।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काज  : पुं० [सं० कार्य, प्रा० कज्ज] १. वह जो कुछ किया जाय। काम। कार्य। मुहावरा—किसी के काज घटना=काम आना। उदाहरण—सब विधि घटब काज मैं तोरे।—तुलसी। काज सँवारना=किसी के बिगड़े हुए या अधूरे काम को ठीक प्रकार से संपादित करना। २. कोई मंगल या शुभ कार्य। ३. व्यवसाय। व्यापार। ४. प्रयोजन। हेतु। पुं० [पुर्त्त कासा] सिले हुए कपड़ों में बनाये जानेवाले वे छेद जिनमें बटन आदि फँसाये या लगाये जाते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काजर  : पुं० =काजल।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काजररानी  : पुं० [देश] अगहन में होनेवाला एक प्रकार का धान। उदाहरण—रामभोग औ काजररानी।—जायसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काजरी  : स्त्री०=कजरी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काजल  : पुं० [सं० पा० प्रा० कज्जलम्, उ० पं० कज्जल, गु० मरा० काजल, ने० गाजल, बं० काजल] आँखो में लगाने का काले रंग का वह प्रसिद्ध पदार्थ जो तेल, घी, आदि में जलने से होनेवाले धुँए को जमाकर तैयार किया जाता है। विशेष—यह प्रायः आँखों का सौंदर्य बढ़ाने अथवा आँख का कोई साधारण रोग दूर करने के लिए लगाया जाता है। क्रि०प्र-डालना।—लगाना। मुहावरा—आँखों में काजल घुलाना=अच्छी तरह और बहुत काजल लगाना। काजल पारना=दीपक के धूँए की कालिख को काजल के रूप में जमाकर इकट्ठा करना। काजल सारना=आँखों में काजल लगाना। पद—काजल का तिल=काजल की वह छोटी बिंदी जो स्त्रियाँ शोभा के लिए गाल, चिबुक आदि पर लगाती हैं। काजल की ओबरी या कोठरी=ऐसा दूषित या बुरा स्थान जहाँ जाने पर कलंक लगना अवश्यंभावी हो। उदाहरण—काजल की कोठरी में कैसहू सयानो जाय, काजर की रेख एक लागिहै पै लागिहै।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काजी  : पुं० [अ०] वह व्यक्ति या अधिकारी जो मुसलमानी धर्म के अनुसार धर्म-अधर्म संबंधी विवादों का निर्णय करता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काजू  : पुं० [कोंक काज्जु] १. एक वृक्ष जिसके फलों की गिनती सूखे मेवों में होती है। २. उक्त वृक्ष का फल जो बादाम की तरह परन्तु सफेग रंग का होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काजू-भोजू  : वि० [हिं० काज+भोग] ऐसी कमजोर या साधारण चीज जिससे बहुत ही कम समय तक और साधारण काम लिया जा सके। टिकाऊ का विपर्याय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काजै  : अव्य० [सं० कार्य्य] लिए। वास्ते। (ब्रज०)।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काट  : स्त्री० [हिं० काटना] १. कैंची, छुरी, तलवार आदि से काटने की क्रिया या भाव। जैसे—तलवार अच्छी काट करती है। पद—काट-कूट, काट-छाँट, मार-काट (दे०)। २. सीये जानेवाले कपड़ों को काटने का विशिष्ट ढंग या प्रकार। कटाव। जैसे—नई काट की कमीज का कुरता। ३. किसी जीव के काटने अथवा किसी वस्तु के लगने से होनेवाला घाव, छरछराहट या जलन। जैसे—बंदर या मच्छर की काट। ४. ऐसी क्रिया या योजना जो किसी के आघात, युक्ति आदि को रोकने या खण्डन करने के लिए की जाय। जैसे—कुश्ती में किसी दाँव-पेंच की काट। ५. ऐसी क्रिया या योजना जो किसी पर आघात या वार करने के लिए की जाय। ६. कपटपूर्ण आचरण, युक्ति या व्यवहार। चालबाजी। ७. किसी वस्तु को आवश्यक या उपयुक्त रूप देने अथवा किसी स्थिति को अपने अनुकूल बनाने के लिए की जानेवाली क्रिया या युक्ति कतर-ब्योंत। ८. वह अंश जो किसी चीज में से कट-छँटकर और किसी प्रकार निकलकर अलग हो गया हो। तरछट। जैसे—एक बोतल तेल में से तनी काट निकली है। ९. गणित में कलम या लकीर से कोई अंक, पद, लेख आदि काटने की क्रिया या भाव। १॰. अंक, लेख आदि को रद करने के लिए खींची जानेवाली लकीर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काट-कपट  : पुं० [हिं० काट+कपट] किसी को काटकर अलग-अलग करने अथवा किसी प्रकार की हानि पहुँचाने के लिए की जानेवाली कपटपूर्ण युक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काटकी  : स्त्री० [हिं० काट+की] काठ की बनी हुई वह छड़ी जिसे मदारी हाथ में लेकर बंदर, भालू आदि नचाते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काट-कूट  : स्त्री० [हिं० काट-कूट अनु] १. किसी चीज विशेषतः लेख आदि में जगह-जगह काटे-छांटे और घटाये-बढ़ाये हुए होने की अवस्था,क्रिया या भाव। जैसे—इस कापी में बहुत जगह काट-कूट हुई है। २. दे०-काट-छाँट।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काट-छाँट  : स्त्री० [हिं० काटना+छांटना] १. काटने और काटकर छाँटने या निकालने की क्रिया, भाव या ढंग। जैसे—(क) पुस्तक मसौदे या लेख मे होनेवाली काट-छांट। (ख) हिसाब की काट-छाँट। २. ऐसी चीज की बनावट या रचना का ढंग अथवा प्रकार जिसमें प्रायः फालतू अंश काट या छाँटकर अलग किये जाते हों अथवा आवश्यक तथा उपयोगी अंश बचा लिये जाते हों। जैसे—कमीज, कुरते या मूर्ति की काट-छाँट। ३. किसी प्रकार से की जानेवाली कमी-वेशी या घटाव-बढ़ाव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काटन  : स्त्री०=कतरन।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काटना  : सं० [सं० कर्त्तन, प्रा० कट्टन] [भाव० कटाई, कटाव] धारदार औजारों, शस्त्रों आदि के प्रसंग में-१. किसी चीज पर इस प्रकार आघात, करना कि वह दो या अधिक टुकड़ों अथवा भागों मे बँटकर अलग हो जाय। जैसे—कुल्हाड़ी से पेड़ या उसकी डालें काटना,तलवार से किसी का सिर या हाथ काटना, छेनी से चाँदी या सोने की सिल काटना आदि। उदाहरण—(क) काटइ निज कर सकल सरीरा।—तुलसी। (ख) छन मँह प्रभु के सायकन्हि काटे विकट विशाच-तुलसी। २. किसी कड़ी या भारी चीज को इस प्रकार दबाना, रगड़ना या रेतना कि किसी चीज के बीच का तल या स्तर कई टुकडों या भागों में बँटकर अलग हो जाय। जैसे—(क) कैंची से कपड़ा या कागज काटना। (ख) हँसिया से घास या फसल काटना। पद—काटो तो खून नहीं=किसी भीषण, लज्जाजनक या विकट परिस्थिति में पड़ने अथवा ऐसी ही कोई बात सुनने पर किसी व्यक्ति का ऐसी दशा में हो जाना कि मानो उसके शरीर में रक्त (अर्थात् जीवन का मूल तत्त्व या लक्षण) रह ही नहीं गया। किसी अनिष्ट घटना या बात के कारण निश्चेष्ट सुन्न या स्तब्ध हो जाना। ४. किसी आधार या तल में इस प्रकार गड्डे या रेखाएँ बनाना कि उनमें से किसी चीज के आने-जाने या निकलने के लिए मार्ग बन जाय अथवा ऐसे ही और कामों के लिए विभाग बन जाएँ। जैसे—किसी प्रदेश में नहर या सड़क काटना, खेत या बगीचे में क्यारियाँ काटना। ५. इधर-उधर से कतर या छाँटकर किसी उद्दिष्ट या उपयोगी रूप में लाना। जैसे—थान में से कुरता या कमीज काटना,झाड़ियों में से मोर,शेर आदि की आकृतियाँ बनाना। (कट,उक्त सभी अर्थों के लिए) जीव—जंतुओं या प्राणियों के प्रसंग में- ६. किसी चीज पर इस प्रकार जोर से दांत गड़ाना कि उसमें का कुछ अंश कटकर अलग हो जाय या मुँह में आ जाय। कुतरना जैसे—बच्चों का दाँतों से फल या रोटी काटना, चूहों का कपड़े या कागज काटना। ७. किसी के शरीर पर उक्त क्रिया इस प्रकार करना कि उसमें क्षत या घाव हो जाय। जैसे—आदमी को कुत्ते या बंदर का काटना। मुहावरा—(किसी को) काटने दौड़ना=बहुत क्रोध में भरकर या खिजला कर इस प्रकार आवेशपूर्ण कटु बातें कहना कि देखनेवाले समझें कि यह जानवरों की तरह काटने पर उतारू है। जैसे—उसका स्वभाव इतना चिड़चिड़ा हो गया है कि वह बात-बात में काटने दौड़ता है। ८. किसी के शरीर में इस प्रकार दांत या डंक गड़ाना या धँसाना कि उसमें जहर भर जाय अथवा जलन या पीड़ा होने लगे। जैसे—खटमल बर्रे, मच्छर या साँप का काटना। ९. कुछ विशिष्ट प्रकार के कीडों-मकोड़ों का कोई चीज कुतरकर खा जाना। जैसे—कीड़े-मकोड़ें का ऊनी या रेशमी कपड़े अथवा पुस्तकों की जिल्द काटना। (बाइट अंतिम चारों अर्थों के लिए) फुटकर प्रसंगों और लाक्षणिक रूपों में- १॰. आगे बढ़ने या मार्ग निकालने के लिए बल या वेग के द्वारा सामनेवाली चीज या तत्त्व इधर-उधर करना या हटाना। जैसे—नदी-नालों का अपने रास्ते में के पहाड़ काटना, नाव का आगे बढ़ने के लिए पानी काटना, हवाई जहाज का उड़ने के समय हवा काटना। ११. दबाव, रगड़ या ऐसी ही और किसी क्रिया से ऐसा जोर पहुँचाना कि कुछ अंश अपने मूल आधार से अलग हो जाय। जैसे—गुड्डी या पतंग लड़ाने में किसी की डोर या नख काटना,घोड़े का बाल बाँधकर शरीर में से मसा काटना। १२. जोर लगाकर इस प्रकार घिसना,पीसना या रगड़ना कि किसी चीज के बहुत ही छोटे-छोटे या बारीक अंश या टुकड़े हो जायँ। जैसे—सिल पर (बट्टे से) भाँग या मसाला काटना। १३. नाम, पद, लेख आदि पर ऐसा चिन्ह्र या रेखा बनाना कि उस क्षेत्र या प्रसंग में उसका कोई अस्तित्व या महत्व न रह जाय अथवा उसका होना न होने के बराबर हो जाय। जैसे—विद्यालय से लड़के का अथवा सूची में से पुस्तक का नाम काटना। १४. किसी क्रिया या प्रकार से कोई अंग या अंश अलग करना या निकाल लेना। जैसे—रेलगाड़ी में से डिब्बा काटना। अनुपस्थिति के कारण नौकर का वेतन काटना। १५. अनुचित अथवा आपत्तिजनक रूप से कहीं से कुछ उड़ा, निकाल या हटा लेना। जैसे—चोरों का रेल के डब्बे में से माल काटना, लुच्चों और शोहदों का रईसों के साथ लगकर माल काटना। मुहावरा—(किसी का) गला काटना=चालाकी या छल-कपट से किसी का धन या संपत्ति लेकर उसे दरिद्र या दीन बनाना। जैसे—हजारों गरीबों का गला काटकर ही तो लोग लखपती और करोड़पती बनते हैं। १६. किसी कठोर,तीक्ष्ण या तीव्र पदार्थ का शरीर में लगकर या उससे रगड़ खाकर उसमें चुन-चुनाहट, छरछराहट या कष्टदायक संवेदन उत्पन्न करना। जैसे—(क) तंग जूता पैर में काटना। (ख) सूरन की तरकारी गला काटती है (अर्थात्) उसमें चुनचुनाहट उत्पन्न करती है। (ग) जाड़ें में ठंडा पानी या ठंढ़ी हवा काटती है। १७. किसी काम चीज या बात का अप्रिय या अरुचिकर होने के कारण बहुत ही कष्टदायक प्रतीत होना। जैसे—परिश्रम का काम तो तुम्हें काटता है। मुहावरा—किसी चीज का काटे खाना=बहुत ही अप्रिय या कष्टदायक जान पड़ना। जैसे—बच्चों के न रहने से घर काटे खाता है। १८. कहीं जमी,बैठी या लगी हुई चीज को किसी प्रकार वहाँ से निकाल या हटाकर अलग या दूर करना। जैसे—साबुन लगाकर कपड़ें का मैल काटना। १९. गुण, प्रभाव, शक्ति आदि से अथवा किसी क्रिया या प्रकार से किसी चीज या बात का अन्त या समाप्ति करना। बिलकुल न रहने देना। जैसे—तीर्थ-यात्रा या देव-दर्शन करके अपने पाप काटना। २॰०चलकर रास्ता पार करना। जैसे—पहले आधा रास्ता तो काट लो,तब बैठकर सुस्ताना। मुहावरा—चक्कर काटना=(क) किसी घेरे या परिधि में बार-बार घूमना। (ख) बार-बार कहीं जाना और वहाँ से आना। जैसे—महीनों से उनके यहाँ चक्कर काट रहे हैं पर वे कुछ सुनते ही नहीं। २१. कष्टपूर्वक या जैसे—तैसे दिन (अथवा समय) बिताना। जैसे—(क) इधर-उधर की बातों में सारा दिन काटना। (ख) गरीबी में समय काटना। (ग) कारागार या जेल में सारी उमर काटना। २२. एक रेखा के ऊपर से किसी भिन्न दिशा से दूसरी रेखा इस प्रकार ले जाना कि दोनों के मिलन-बिंदु के चारों ओर कोण बन जाएँ। जैसे—(ज्यामिति में) एक रेखा से दूसरी रेखा काटना। २३. किसी रास्ते पर से या सामने से (रेखा बनाते हुए) निकल जाना। (अमांगलिक या अशुभ सूचक) जैसे—यात्रा के समय किसी काने आदमी या बिल्ली का आकर रास्ता काटना। मुहावरा—किसी का रास्ता काटना=किसी की गति या मार्ग में बाधक होना। रुकावट डालना। (किसी की) बात काटना=जब कोई कुछ कह रहा हो,तब बीच में बोलकर उसकी बात में बाधक होना। जैसे—जब कोई बोल रहा हो तब बीच में उसकी बात काटकर बोलने लगना अच्छा नहीं होता। २४. किसी के कथन, मत, विचार या सिद्धांत को अप्रामाणिक या असत्य सिद्ध करके उसका खंडन करना। अमान्य ठहराना या बतलाना। जैसे—आपकी नई खोज ने तो अब तक के सभी मत काट दिये हैं। २५. गणित में किसी छोटी संख्या से किसी बड़ी संख्या को भाग देना कि शेष कुछ न बचे। जैसे—२५ को ५ या ४॰ को ८ से काटना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काट-फाँस  : स्त्री० [हिं० काटना+फाँसना या फँसाना] १. किसी को काटकर अलग करने और किसी को फँसाकर अपने वश में लाने की क्रिया या भाव। २. कपट-पूर्ण युक्तियाँ। कतर-ब्योतं। चाल-बाजी। ३. लोगों को आपस में लड़ाने आदि के लिए चली जानेवाली चालें या की जानेवाली युक्तियाँ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काटर  : वि० [सं० कठोर] १. कड़ा। कठोर। २. कट्टर। वि० [हिं० काटना] काटनेवाला। काटू।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काटुक  : पुं० [सं० कटुक+अण्] १. अम्लता। खटास। २. कटुता। कडुआपन।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काटू  : वि० [हिं० काटना] १. (पशु) काट खानेवाला। २. (व्यक्ति) जो हर बात में काटने को दौड़े। चिड़िचड़ा। ३. डरावना। भयानक। पुं० [अं० कैश्यूनट] हिजली बदाम नाम का वृक्ष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठ  : पुं० [सं० काष्ठ, प्रा० कट्ठ, गु० पं० बं० काठ, सि० काठु, सिंह० कट,० का० कूट, मरा० काठी] १. वह पदार्थ जिससे वृक्षों, झाड़ियों आदि के तने शाखाएँ आदि बनी होती हैं। लकड़ी। यौ०-काठ-कबाड़। (देखें)। पद—काठ का उल्लू=बहुत बड़ा या निरा बेवकूफ। वज्र मूर्ख। काठ का घोड़ा=(क) अरथी या टिकठी जिस पर रखकर शव को अंत्येष्टि के लिए ले जाते हैं। (ख) बैसाखी जिसके सहारे लंगड़े-लूले चलते हैं। काठ की हाँड़ी=ऐसी वस्तु जिससे एकाध बार से अधिक काम न लिया जा सके। (छल-कपट आदि के प्रसंग में) क्या हुआ जो वे झूठ बोलकर एक बार मुझ से रुपए ले गये। काठ की हाँड़ी बार-बार नहीं चढ़ती। उदाहरण—हाँड़ी काठ की चढ़ै न दूजी बार। विशेष—यदि कोई काठ की हाँड़ी बनाकर उसमें कोई चीज पकाना चाहे वह अधिक-से-अधिक एक ही बार और वह भी जैसे—तैसे अपना काम चला सकता है। इसी तथ्य के आधार पर यह पद बना है। २. चूल्हे आदि में जलाने की लकड़ी। ईधन। ३. मध्य युग में लकड़ी का एक प्रकार का उपकरण, जिसमें बहुत बड़ी और भारी लकडी में दो छेद करके उसमें अपराधी या दंडित व्यक्ति के पैर इस प्रकार फँसा दिये जाते थे कि वह उठ-बैठ या भाग न सके। कलंदरा। मुहावरा—(किसी को) काठ मारना=किसी को दंड देने के लिए उसके पैरों में उक्त उपकरण लगाना या फँसाना। काठ में (किसी के) पाँव ठोंकना या देना=अपराधी या दंडनीय व्यक्ति के पैर उक्त प्रकार के उपकरण में फँसाकर उसे एक स्थान पर बैठा देना। (एक प्रकार का दंड) काठ में (अपने) पाँव डालना या देना-जान=बूझकर किसी बहुत बड़ी विपत्ति या संकट में पड़ना। ४. लाक्षणिक अर्थ में ऐसी वस्तु जो सूख करकाठ के समान कठोर या निष्चेष्ट हो गई हो। मुहावरा—(किसी को) काठ मार जाना=आश्चर्य, कष्ट, शोक आदि की दशा में स्तब्ध हो जाना। जैसे—यह बात सुनते ही मुझे तो काठ मार गया। (वस्तु का) काठ होना=सूखकर इतना कड़ा हो जाना कि काम में आने के योग्य न रह जाय। (व्यक्ति का) काठ होना=(क) बेहोशी, मौत आदि के कारण जड़वत, निश्चेष्ट या संज्ञा-शून्य होना। चेतना-रहित होनाः (ख) बहुत अधिक आश्चर्य, भय आदि के कारण स्तंभित होना। (ग) काठ की तरह सूख जाना। दुर्बल होना। ५. कठ-पुतली। उदाहरण—कतहुँ पखंडी काठ नचावा।—जायसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठ-कटौअल  : स्त्री० [हिं० काठ+काटना] आँख-मिचौनी की तरह का लड़कों का एक खेल, जिसमें उन्हें दौड़-दौड़ कर किसी काठ को छूना पड़ता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठ-कवाड़  : पुं० [हिं० काठ+कवाड़] काठ की बनी परन्तु (क) टूटी-फूटी वस्तुएँ। (ख) टूटा-फूटा तथा निरर्थक सामान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठ-कोड़ा  : पुं० [हिं० काठ+कोड़ा] मध्य-युग का एक प्रकार का दंड जिसमें किसी के पाँव में काठ डालकर ऊपर से उसे कोड़ों से मारते थे। क्रि० प्र०-चलना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठ-कोयला  : पुं० [हिं० काठ+कोयला] वृक्षों की लकड़ियाँ जलाकर तैयार किया जानेवाला कोयला। (चारकोल)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठड़ा  : पुं० [स्त्री० काठड़ी]=कठड़ा (कठौता)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठनीम  : पुं० [हिं० काठ+नीम] एक प्रकार का वृक्ष, जिसे गंधेल भी कहते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठबेर  : पुं० दे० ‘घूँट’ (वृक्ष)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठबेल  : स्त्री० [हिं० काठ+बेल] इंद्रायन की जाति की एक बेल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठा  : वि० [हिं० काठ] १. काठ का बना हुआ। २. (फल) जिसका ऊपरी छिलका बहुत कड़ा और मोटा हो, अथवा जिसका गूदा काठ के समान कड़ा हो। जैसे—काठा बादाम, काठा केला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठिन्य  : पुं० [सं० कठिन+ष्यञ्]=कठिनता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठियावाड़  : पुं० [हिं० काँठ=समुद्रतट+बाड़=द्वार] पश्चिमी भारत का एक प्रदेश जो आधुनिक द्विभाषी बम्बई राज्य के अन्तर्गत है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठियावाड़ी  : पुं० [हिं० काठियावाड़] १. काठियावाड़ का निवासी। २. काठियावाड़ का घोड़ा। स्त्री० काठियावाड़ की बोली या भाषा। वि० काठियावाड़ का। काठियावाड़ संबंधी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठी  : स्त्री० [हिं० काठ] १. ऊँटों, घोड़ों आदि की पीठ पर कसने की जीन जिसमें नीचे की ओर काठ लगा रहता है। यह आगे और पीछे की ओर कुछ उठी होती है। २. शरीर की गठन या बनावट। ३. कटार, तलवार आदि की म्यान। ४. छड़ी। लकड़ी। (राज।) वि० [काठियावाड़] काठियावाड़ का (घोड़ा)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठू  : पुं० [हिं० काठ] कूटू की तरह का एक पौधा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काठों  : पुं० [हिं० काठ] पंजाब में होनेवाला एक प्रकार का मोटा धान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काड़ी  : स्त्री० [सं० काण्ड] १. अरहर का सूखा डंठल या पौधा। रहटा। २. दे० काँड़ी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काढ़ना  : स० [सं० कर्षण, प्रा० कड्ढण] १. आधार, पात्र आदि में से कोई चीज बाहर निकालना। जैसे—कूएँ में से पानी काढ़ना। २. आवरण हटाकर दिखाना। सामने लाना। ३. घी, तेल आदि में कोई चीज तलना। ४. सूई-धागे से कपड़े पर बेल-बूटे निकालना या बनाना। ५. लकड़ी पत्थर आदि पर बेल-बूटे बनाना। उरेहना। ६. उधार लेना। जैसे—ऋण काढ़ना। स० [सं० क्वाथन] किसी तरल पदार्थ को उबाल या औटाकर गाढ़ा करना। जैसे—काढ़ा या दूध काढ़ना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काढ़ा  : पुं० [हिं० काढ़ना=औटाना] वनस्पतियों, विशेषतः ओषधियों को उबालकर निकाला हुआ रस। क्वाथ। जोशांदा। (डिकाँक्शन)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काण  : वि० [सं०√कण् (बन्द करना)+घञ्] काना। एकाक्ष। पुं० =कान। स्त्री०=कानि।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काणेय  : पुं० [सं० काणा+ढक्-एय] कानी स्त्री का बेटा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काणेर  : पुं० [सं० काणा+ढक्-एर]=काणेय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काणएली  : स्त्री० [सं० ] अपवित्र स्त्री।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काण्व  : वि० [सं० कण्व+अण्] कण्व ऋषि से संबंध रखनेवाला। कण्व का। पुं० कण्व ऋषि के अनुयायी या वंशज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातंत्र  : पुं० [सं० कु-तंत्र, ब० स० कु=कादेश] सर्ववर्मा का बनाया हुआ एक प्रसिद्ध व्याकरण ग्रंथ। कलाप व्याकरण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कात  : पुं० [सं० कर्त्तन, प्रा० कत्तन] १. भेड़ों के बाल काटने की कैंची। २. मुरगे के पैर में निकलनेवाला काँटा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातक  : पुं० =कार्तिक।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातना  : स० [सं० कृत, पा० कत्त, पं० कत्तना, गु० कातबूँ, मरा० कातणें] [भाव० कताई] चरखे या तकली की सहायता से अथवा यों ही हाथ से ऊन, रूई रेशम आदि के रेशों से बटकर धागा या सूत बनाना (स्पिनिंग)। मुहावरा—महीन कातना=बहुत गढ़-गढ़कर और बारीकी से (अर्थात् अपना विशेष कौशल या योग्यता दिखलाते हुए) बातें करना। (व्यंग्य और हास्य)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातर  : वि० [सं० क-आ√तृ (तरना)+अच्] [भाव० कातरता] १. भय से काँपता हुआ। भयभीत। २. डरपोक। भीरू। ३. जो कष्ट या दुःख में पड़ने पर निराश या हतोत्साह होने के कारण अधीर हो रहा हो। जैसे—कतार भाव से प्राणरक्षा की प्रार्थना करना। पुं० [सं० कर्तृ=कातने या घूमनेवाला] १. कोल्हू में वह तख्ता जिस पर आदमी बैठकर आगे जुते हुए बैलों को हाँकता है और जो जाठ के साथ-साथ चारों ओर घूमता है। २. घड़ों आदि को बाँधकर बनाया हुआ बेड़ा। घड़नैल। पुं० [सं० कर्त्तरी] बंदर या भालू का जबड़ा। (कलंदर)। स्त्री० [?] एक प्रकार की मछली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातरता  : स्त्री० [सं० कातर+तल्,टाप्] १. कतार होने की अवस्था या भाव। २. कष्ट या दुःख के समय होनेवाली विकलता। बेचैनी। ३. अधीरता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातरोक्ति  : स्त्री० [सं० कातर-उक्ति, ष० त०] दुःख या संकट में पड़कर और अधीर या निराश होकर दीनपूर्वक कही जानेवाली बात या की जानेवाली प्रार्थना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातर्य  : पुं० [सं० कातर+ष्यञ्]=कातरता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काता  : पुं० [हिं० कातना] १. काता हुआ सूत। तागा। २. एक प्रकार की मिठाई जो देखने में बहुत महीन कते हुए सूत के लच्छों की तरह होती है। बुढ़िया का काता। पुं० [सं० कर्त्तन] बाँस काटने या छीलने का एक प्रकार का औजार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातिक  : पुं० [सं० कार्तिक] कार्तिक मास। पुं० [?] एक प्रकार का बड़ा तोता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातिकी  : वि०=कार्तिकी।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातिग  : पुं० =कार्तिक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातिव  : पुं० [अ०] १. लेखों आदि की प्रतिलिपि करनेवाला व्यक्ति। २. वह जिसने कोई दस्तावेज या लेख्य लिखा हो अथवा जो लेख्य आदि लिखने का व्यवसाय करता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातिल  : वि० [अ०] १. कत्ल या हत्या करनेवाला। हत्यारा। २. प्राण लेने या प्राण संकट में डालनेवाला। बहुत अधिक घातक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काती  : स्त्री० [सं० कत्त्वी, प्रा० कत्ती] १. कैंची। जैसे—लोहारों या सुनारों की काती। २. चाकू। छुरी। उदाहरण—तजि ब्रजलोक पिता अरू जननी कंठ लाय गरु काती।—सूर। ३. एक प्रकार की छोटी तलवार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कातीय  : वि० [सं० कात्यायन+छ-ईय, फक्, प्रत्यय का लुक्] कात्यायन-संबंधी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कात्य  : वि० [सं० कत+य़ञ्] कत ऋषि संबंधी। पुं० १. कत ऋषि के गोत्र का व्यक्ति। २. दे० ‘कात्यायन’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कात्यायन  : पुं० [सं० कत+यञ्+फक्-आयन] [स्त्री० कात्यायिनी] १. व्याकरण के एक प्रसिद्ध आचार्य, जिन्होंने वार्तिक लिखकर पाणिनी के सूत्रों की अभिपूर्ति की थी। २. एक ऋषि जो सामाजिक और धार्मिक विधियों के आचार्य माने गये हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कात्यायनी  : स्त्री० [सं० कात्यायन+ङीष्] १. कत गोत्र में उत्पन्न स्त्री। २. कात्यायन ऋषि की पत्नी। ३. वह विधवा जो कषाय वस्त्र पहनती हो। ४. दुर्गा की एक मूर्ति या रूप।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कात्यायनीय  : वि० [सं० कात्यायन+छ-ईय] कात्यायन द्वारा रचित (ग्रन्थ)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काथ  : पुं० १.=कत्था (खैर)। २. [स्त्री० काथरी]=कंथा (गुदड़ी)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादंब  : वि० [सं० कदंब+अण्] १. कदंब-संबंधी। कदंब या कदम (वृक्ष या फल) का। २. कदंब या समूह-संबंधी। सामूहिक। पुं० १. कदंब का पेड़ या फल। कदम। २. प्राचीन काल की एक प्रकार की मदिरा जो कदंब ०या कदम से बनती थी। २. ईख। ऊख। ४. तीर। बाण। ५. एक प्रकार का हंस। कलहंस। ६. दक्षिण भारत का एक प्राचीन राजवंश।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादंबर  : पुं० [सं० कादंब√ला (आदान)+क,र=ल] १. एक प्रकार की मदिरा जो कदंब के फूलों से बनाई जाती थी। २. हाथी का मद। गजमद। ३. दही के ऊपर की मलाई। ४. ईख के रस का गुड़।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादंबरी  : स्त्री० [सं० कु-अंबर,ब० स० कु=क, कदंबर=बलराम+अण्, ङीष्] १. कोकिल। कोयल। २. मैना पक्षी। ३. मदिरा। शराब। ४. वाणी। ५. वाणी की देवी।। सरस्वती। ६. बाणभट्ट की लिखी हुई एक प्रसिद्ध कथा या कहानी जो उसकी नायिका के नाम पर बनी थी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादंबिनी  : स्त्री० [सं० कादंब+इनि, ङीष्] १. बादलों का समूह। मेघवाला। २. मेघ राग की एक रागिनी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादर  : वि० [सं० कातर] १. कायर। डरपोक। २. अधीर। ३. बेचैन। विकल। उदाहरण—कादर करत मोहिं बादर नये नये।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादव  : पुं० =काँदो। (कीचड)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादा  : पुं० [?] लकड़ी की पटरी जो जहाज के शहतीरों और कड़ियों के नीचे उन्हें जकड़े रखने के लिए जड़ी रहती है। (लश०)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादिम  : पुं० =कर्दम।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादिर  : वि० [अ०] १. कुदरत या शक्ति रखनेवाला। शक्तिशाली और समर्थ। २. भाग्यवान। पुं० ईश्वर का एक नाम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादिरी  : स्त्री० [अ०] स्त्रियों के पहनने की एक प्रकार की कुरती या चोली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कादो  : पुं० [सं० कर्दम, प्रा० कद्दम] १. कीचड़। २. गारा। उदाहरण—करि ईट नीलमणि कादों कुदण।—प्रिथीराज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काद्रवेय  : पुं० [सं० कद्रु+ढक्-एय] अनंत, तक्षक, वासुकी, शेष आदि सर्प जो कद्रु से उत्पन्न कहे गये हैं और जिनका निवास पाताल में माना गया है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान  : पुं० [सं० कण, पा० प्रा० कण्ण, पं० कन्न, उ० गु० मरा० कान, कन्न, कनु, सि० कण] १. प्राणियों की वह इंद्रिय जिसके द्वारा वे शब्द सुनते हैं। श्रवण की इंद्रिय। श्रुति। श्रोत्र। विशेष—यह इंद्रिय सिर में प्रायः आँखों के दोनों ओर होती है। जो प्राणी अंडे देते है उनके कान प्रायः अन्दर धँसे होते हैं, और जो प्रत्यक्ष सन्तान का प्रसव करते हैं उनके कान बाहर निकले हुए होते हैं। मुहावरा—कान उठाना, ऊँचे करना या खड़े करना=पशुओं आदि के संबंध में शत्रु की आहट मिलने या संकट की संभावना होने पर कान ऊपर उठाना जो उनके सचेत होने का सूचक है। कान उड़ जाना या उड़े जाना=कान फटना (दे०)। (किसी के) कान उमेठना-दंड देने के हेतु किसी का कान मरोड़ना या मसलना। (अपने) कान उमेठना-भविष्य में कोई काम न करने की दृढ़ प्रतिज्ञा करना। (किसी बात पर) कान करना=ध्यानपूर्वक कोई बात सुनना और उसके अनुसार आचरण करना। कान कतरना=कान काटना। (दे०)। (किसी के) कान काटना=चालाकी या धूर्त्तता में किसी से बहुत बढ़कर होना। जैसे—ये तो बड़े-बड़े धूर्तों के कान काटते हैं। कान का मैल निकलवाना=अच्छी तरह बात सुन सकने के योग्य बनना। (व्यंग्य) जैसे—जराकान का मैल निकलवा लो, तब तुम्हें सुनाई पड़ेगा। (अपने) कान खड़े करना=चौकन्ना या सचेत होना। (दूसरे के) कान खड़े् करना=चौकन्ना या सचेत करना। कान खाना या खा जाना=बहुत शोरगुल या हो-हल्ला करके तंग या परेशान करना। (किसी के) कान खोलना=किसी को चौकन्ना या सजग करना। (किसी बात पर) कान देना या धरना=ध्यान से किसी की बात सुनना और उसके अनुसार आचरण करना। (किसी का) कान धरना=१. जे० कान उमेठना। २. दे० कान पकड़ना कान न दिया जाना=इतना जोर का करूण या विकट शब्द होना कि सहा न जा सके। कान पकड़ना=कान उमेठना (दे०)। किसी को कहीं से कान पकड़ कर निकाल देना=अनादरपूर्वक या बेइज्जत करके किसी को कहीं से निकाल या हटा देना। (अपने) कान पकड़ना=किसी प्रकार का कष्ट या दंड भोगने पर भविष्य में वैसा काम न करने अथवा सचेत रहने की प्रतिज्ञा करना। (किसी के) कान पकड़ना=किसी को दोषी पाकर उसे भविष्य के लिए सचेत करना और कड़े दंड की धमकी देना। कान पर जूँ रेंगना=कोई घटना या बात हो जाने पर (उदासीनता,उपेक्षा आदि के कारण) उसका कुछ भी ज्ञान या परिचय न होना। कान पाथना=चुपचाप और बिना विरोध किये, सिर झुकाकर कहीं से चले या हट जाना। (किसी के) कान फूँकना=(क) किसी को अपना चेला बनाने के लिए उसे दीक्षा देना। (ख) दे० (किसी के) कान भरना। कान या कान का परदा फटना=घोर शब्द होने के कारण कानों को बहुत कष्ट होना। कान बजना=कान में साँय-साँय शब्द सुनाई पड़ना जो एक प्रकार का रोग है। (किसी के) कान भरना=किसी के विरुद्ध किसी से ऐसी बातें चोरी से कहना कि वे बातें उसके मन में बैठ जायँ। कान मलना=दे० कान उमेठना (किसी के) कान में कौड़ी डालना=किसी को अपना दास या गुलाम बनाना। (प्राचीन काल में दासता का चिन्ह्र) (किसी के) कान में (कोई बात) डाल देना=कोई बात कह, बतला या सुना देना। जैसे—उनके कान में भी यह बात डाल दो। (अर्थात् उनसे भी कह दो)। कान में तेल या रूई डालकर बैठना=कोई बात सुनते रहने पर भी उपेक्षापूर्वक उसकी ओर ध्यान न देना। (किसी के) कान में पारा या सीसा भरना=दंड-स्वरूप किसी को बहरा करने के लिए उसके कानों में पारा या गरम सीसा डालना। (प्राचीन काल) (किसी का किसी के) कान लगना=किसी के साथ सदा लगे रहकर चुपके-चुपके उससे तरह-तरह की झूठी सच्ची बातें कहते रहना। (किसी ओर) कान लगाना=कोई बात सुनने के लिए किसी ओर ध्यान देना या प्रवृत्त होना। कान तक न हिलना=चुपचाप सब कुछ सहते हुए तनिक भी प्रतिकार या विरोध न करना। चूँ तक न करना। कान हो जाना-कान खड़े हो जाना। चौकन्ने या सचेत हो जाना। कानोकान खबर न होना=जरा भी खबर न होना। कुछ भी पता न लगना जैसे—घर में चार-चार आदमियों की हत्या हो गई,पर किसी को कानोकान खबर न हुई। कानों पर हाथ धरना या रखना=कानों पर हाथ रखकर किसी बात से अपनी पूरी अनभिज्ञता प्रकट करना। यह सूचित करना कि हम इस संबंध में कुछ भी नहीं जानते अथवा इससे हमारा कुछ भी संबंध नहीं है। पद—कान का कच्चा=ऐसा व्यक्ति जो बहुत सहज में या सुनते ही किसी बात पर विश्वास कर ले। २. सुनने की शक्ति। श्रवण-शक्ति। जैसे—तुम्हें तो कान ही नहीं है तुम सुनोगे क्या। ३. कान के ऊपर पहना जानेवाला एक गहना जिससे कान ढँक जाते हैं। झाँप। ४. किसी चीज में कान की तरह ऊपर उठा या बाहर निकला हुआ उसका कोई अंग या अँश जो प्रायः उस चीज के असम या टेढ़ें होने का सूचक होता है। कनेव। जैसे—चारपाई या चौकी का कान, तराजू का कान (अर्थात् पासंग)। ५. पुरानी चाल की तोपों, बन्दूकों आदि में कुछ ऊपर उठा हुआ और प्याली के आकार का वह गड्ढा जिसमें रंजक रखी जाती थी। प्याली रंजकदानी। पुं० [सं० कर्ण] नाव की पतवार जिसका आकार प्रायः कान का-सा होता है। स्त्री०=कानि (देखें)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानक  : वि० [सं० कनक+अण्] १. कनक-सबंधी। कनक का। २. कनक अर्थात् सोने का बना हुआ। ३. सुनहला। पुं० जमाल गोटा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानकुब्ज  : पुं० =कान्यकुब्ज।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानड़ा  : वि०=काना। पुं० =कान्हड़ा। (राग)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानन  : पुं० [सं०√कन् (दीप्ति)+णिच्+ल्युट्-अन] १. बहुत बड़ा जंगल या वन। २. घर। मकान। ३. निवास स्थान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानफरेंस  : स्त्री० [अं०] सम्मेलन। (दे०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानस्टेबुल  : पुं० [अं०] आरक्षी या पुलिस-विभाग का सिपाही।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काना  : वि० [सं० काण] [स्त्री० कानी] १. (प्राणी) जिसकी कोई आँख खराब या विकृत हो चुकी हो या किसी प्रकार फूट चुकी हो। एकाक्ष। २. (पदार्थ) जो किसी उपयोगी अंग के टूट-फूट जाने के कारण निकम्मा और भद्दा हो गया हो। त्रुटि या दोष से युक्त। जैसे—कानी कौड़ी। ३. (तरकारी या फल) जिसमें ऊपर से छेद कर कीडे़ अंदर घुसे हों अथवा अंदर से बाहर निकले हों। जैसे—काना बैंगन, काना सेब। पद—कान-कुतरा (देखें)। वि० [सं० कर्ण] जिसका कोई कोना या सिरा कान की तरह बाहर निकला हो। जैसे—कानी चारपाई। पुं० [सं० कर्ण] १. लिखने में आकार की मात्रा जो अक्षरों के आगे लगाई जाती है। जैसे—लिखते समय काना-मात्रा ठीक से लगाया करो। २. पासे का वह अंग या पार्श्व जिस पर एक ही बिंदी होती है। ३. पासे का वह दाँव जो उस दशा में आता है जब पासे का वह भाग ऊपर होता है जिस पर एक ही बिंदी होती है। जैसे—हमारे तीन काने हैं, और तुम्हारा पौ बारह है। अव्य=कहाँ (बुंदेल०)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काना-कानी  : स्त्री०=कानाफूसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काना-कुतरा  : वि० [हिं० काना+कुतरना] जो खंडित या विकलांग होने के कारण कुरूप या भद्दा हो। जैसे—काना-कुतरा फल, काना-कुतरा लड़का।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काना-गोसी  : स्त्री०=कानाफूसी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानाफुसकी  : स्त्री०=कानाफूसी।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानाफूसी  : स्त्री० [हिं० कान+अनु,० ‘फुस’ ‘फुस’] १. किसी के कान में बहुत धीरे से इस प्रकार कुछ कहना कि दूसरों को केवल फुस-फुस शब्द होता जान पड़े। २. उक्त प्रकार से होनेवाली बात-चीत, जो दूसरों से छिपा कर और बहुत धीरे-धीरे की जाय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काना-बाती  : स्त्री० [हिं० कान+बात] १. किसी के कान में चुपके से और धीरे से कही जानेवाली कोई बात। (दे० ‘कानाफूसी’) २. बच्चों को हँसाने के लिए एक प्रकार का विनोद, जिसमें उन्हें कान में बात कहने के बहाने से अपने पास बुलाकर उनके कान में जोर से कुर्र या ऐसा ही और कोई शब्द करते हैं, जिससे उनके कान झन्ना जाते हैं और वे हँसकर दूर हट जाते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानि  : स्त्री० [?] १. कुल समाज आदि की मर्यादा या लोक-लज्जा का ऐसा ध्यान जो सहसा किसी बुरे काम में न पड़ने दे। लोक-लज्जा। मुहावरा—कानि पड़ना=कुल, समाज आदि की मर्यादा के अनुसार आचरण करना। २. बड़ों का अदब, लिहाज या संकोच। उदाहरण—सेवक सेवकाई जानि जानकीस मानै कानि।—तुलसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानिष्ठिक  : वि० [सं० कनिष्ठिका+अण्] वय, विस्तार आदि में सब से छोटा। पुं० सब से छोटी उँगली। कनिष्ठिका।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानी उँगली  : स्त्री० [सं० कनीनी] सब से छोटी उँगली। कनिष्ठिता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानी-कौड़ी  : स्त्री० [हिं० कानी+कौड़ी] १. ऐसी कौड़ी जिसे माला में पिरोने के लिए बीच में छेदा गया हो। २. लाक्षणिक अर्थ में बिलकुल नगण्य या परम हीन वस्तु। जैसे—हम अब तुम्हें कानी कौड़ी भी न देंगे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानीन  : पुं० [सं० कन्या+अण्, कनीन आदेश] १. वह व्यक्ति जो कुमारी कन्या के गर्भ से (अर्थात् उसके विवाह के पहले) उत्पन्न हुआ हो। २. राजा कर्ण। (महाभारत)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानी हाउस  : पुं० =काँजी हाउस।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानून  : पुं० [यू० केनान से अ०, मि० अं० कैनन] [वि० कानूनी] १. किसी काम, बात या व्यवस्था के संबंध में बना हुआ निश्चित नियम। जैसे—कुदरत का कानून २. दार्शनिक, वैज्ञानिक आदि क्षेत्रों में किसी काल, देश या विषय के सार्विक तथ्यों और सिद्धांतों के आधार पर बने हुए ऐसे निश्चित नियम जो विशिष्ट परिस्थितियों में सदा ठीक घटते हों। ३. देश अथवा राज्य में व्यवस्था, शांति और सुरक्षा बनाये रखने के लिए शासन या प्रभु-सत्ताधारी संस्था के द्वारा बनाया हुआ ऐसा नियम-समूह जिसका पालन वहाँ के सभी निवासियों के लिए अनिवार्य और आवश्यक होता है और जिसकी उपेक्षा या उल्लंघन करने वाला दंड का भागी होता है। आईन। विधि। मुहावरा—कानून छाँटना-झूठ=मूठ के, निस्सार और व्यर्थ के ऐसे तर्क उपस्थित करना, जिनका संबंध नियम, विधान आदि के क्षेत्रों से हो। ४. उक्त प्रकार के बने हुए समस्त नियमों, विधानों आदि का सामूहिक रूप। ५. उक्त प्रकार के नियमों, विधानों आदि का कोई ऐसा अंग या शाखा, जो किसी विशिष्ट कार्य-क्षेत्र या व्यवहार के संबंध में हो। जैसे—दीवानी, कानून फौजदारी कानून, शहादत (गवाही) का कानून आदि। ६. किसी वर्ग या समाज में प्रचलित सर्व-मान्य नियम और रूढ़ियाँ। (लाँ उक्त सभी अर्थों के लिए) ७. एक प्रकार का पाश्चात्य बाजा जिसमें बजाने के लिए पटरिओं पर तार लगे होते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानूनगो  : पुं० [फा०] माल या राजस्व विभाग का वह क्षेत्रीय अधिकारी, जिसके अधीन पटवारी या लेखपाल काम करते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानूनदाँ  : पुं० [फा०] प्रायः सब प्रकार के कानून जाननेवाला व्यक्ति। कानून का ज्ञाता। विधिज्ञ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानूनन्  : क्रि० वि० [अ०] विधान या नियम के अनुसार। कानून के मुताबिक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानूनिया  : वि० [अ० कानून] व्यर्थ के कारण बना-बनाकर अथवा कानून और नियम बतला कर झगड़ा या हुज्जत करनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कानूनी  : वि० [अ० कानून] १. कानून संबंधी। कानून का। विधिक। जैसे—कानूनी बहस,कानूनी सलाह। २. व्यर्थ के कारण निकालकर झगड़ा या हुज्जत करनेवाला (व्यक्ति)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान्यकुब्ज  : पुं० [सं० कन्या-कुब्जा, ब० स० कन्यकुब्ज+अण्] १. आधुनिक कन्नौज के आस-पास के प्रदेश का पुराना नाम। २. उक्त देश का निवासी। ३. उक्त देश के निवासी ब्राह्मणों का वर्ग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान्ह  : पुं० [सं० कृष्ण, प्रा० कण्ड] श्री कृष्ण।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान्हड़ा  : पुं० [सं० कणटि] संपूर्ण जाति का एक राग जो मेघ राग का पुत्र माना गया है।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान्हड़ी  : स्त्री० [सं० कर्णाटी] एक रागिनी जो दीपक राग की पत्नी कही गई है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान्हम  : पुं० [सं० कृष्ण, प्रा० कण्ह=काला] भड़ौंच प्रदेश की काली मटियार जमीन जो कपास की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान्हमी  : स्त्री० [हि० कान्हम] भड़ौच प्रदेश की कान्हम भूमि में उपजनेवाली कपास।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान्हर  : पुं० [सं० कर्ण] कोल्हू के कातर पर लगी हुई वह बेड़ी लकड़ी जो कोल्हू की कमर से लगकर चारों ओर घूमती है। पुं० [सं० कृष्ण] श्रीकृष्ण।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कान्हरा  : पुं० =कान्हड़ा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापटिक  : वि० [सं० कपट+ठक्-इक] जिसके मन में कपट हो। कपटी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापटद्य  : पुं० [सं० कपट+ष्यञ्] १. कपटी होने की अवस्था या भाव। २. कपट।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापड़ी  : पुं० [सं० कपर्द्दिन्, प्रा० कपद्दी] [स्त्री० कापड़िन] एक प्रकार के यात्री जो गंगोत्तरी के काँवर पर जल लेकर सब तीर्थों में चढ़ाने के लिए चलते हैं। उदाहरण—कापड़ी संन्यासी तीरथ भ्रमाया न पाया नृबाँष पद का भेव।—गोरखनाथ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापथ  : पुं० [सं० कु-पथिन्, कुप्रा० स० अच्, कु=का आदेश] बुरा मार्ग या रास्ता। कुपथ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापर  : कपड़ा।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापाल  : पुं० [सं० कपाल+अण्] १. एक प्राचीन अस्त्र। २. प्राचीन भारतीय राजनीति में ऐसी पारस्परिक संधि जिसमें दोनों पक्षों के अधिकार समान माने गये हों।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापालिक  : वि० [सं० कपाल+ठक्-इक] कपाल-संबंधी। पुं० १. भैरव या शक्ति के उपासक एक प्रकार के तांत्रिक जो अपने हाथ में कपाल या मनुष्य की खोपड़ी लिये रहते हैं। २. बंगाल में रहनेवाली एक पुरानी वर्ण-संकर जाति। ३. वैद्यक में एक प्रकार का कोढ़ जिसमें शरीर का चमड़ा कड़ा,काला और रूखा होकर फटने लगता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापालिका  : स्त्री० [सं० कापालिक+टाप्] एक प्रकार का पुराना बाजा जो मुँह से बजाया जाता था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापाली  : पुं० [सं० कपाली] [स्त्री० कापालिनी] १. शिव। २. एक वर्ण संकर जाति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापिक  : वि० [सं० कपि+ठक्-इक] १. कपि या बंदर संबंधी। २. बंदरों का सा। बंदरों की तरह का।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापिल  : वि० [सं० कपिल+अण्] १. कपिल संबंधी। कपिल का। २. कपिल काव्य या उनके दर्शन का अनुयायी। ३. भूरा। पुं० १. कपिल मुनि कृत सांख्य-दर्शन। २. भूरा रंग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापिश  : पुं० [सं० कपिशा+अण्] प्राचीन भारत में माधवी के फूल से बनाई जानेवाली एक प्रकार की मदिरा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापिशी  : स्त्री० [सं० कापिश+ङीष्] एक प्राचीन देश जहाँ कापिश नाम की मदिरा अच्छी बनती थी। (पाणिनी)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापिशेय  : पुं० [सं० कपिशा+ठक्-एय] पिशाच। भूत-प्रेत।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापी  : स्त्री० [अं०] १. किसी लेख आदि की हुई नकल। प्रतिरूप। २. चित्र, पुस्तक आदि की प्रतिलिपि ३. चित्र, पुस्तक आदि की प्रति। ४. वह कोरी या सादी पुस्तिका जिस पर कुछ लिखा जाता हो। ५. छपने आदि के लिए दिया जानेवाला हस्तलेख। स्त्री० [अं० कैप] गराड़ी लश०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापीनवीस  : पुं० [अं० कापी+फा० नवीस=लिखनेवाला] १. कापी अर्थात् लेखों की नकल या प्रतिलिपि लिखनेवाला लेखक। २. वह लेखक जो लीथो के छापे के लिए सुन्दर अक्षरों में लेख लिखता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापुरुष  : पुं० [सं० कु-पुरुष, कुप्रा० स० कु=का] १. तुच्छ या हीन व्यक्ति। २. कायर या भीरु पुरुष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापेय  : वि० [सं० कपि+ढक्-एय] [स्त्री० कापेया] कपि या बंदरसंबंधी। कापिक। पुं० शौनक ऋषि का एक नाम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कापोत  : वि० [सं० कपोत+अण्] १. कबूतर संबंधी। २. कबूतर के रंग जैसा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काप्य  : पुं० [सं० कपि+य़ञ्] १. कपि नामक ऋषि का प्रवर्तित गोत्र। २. उक्त ऋषि के गोत्र का व्यक्ति। ३. आंगिरम् ऋषि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफ  : पुं० [अ०] १. उर्दू वर्णमाला का एक व्यंजन। २. पश्चिमी एशिया का एक प्रसिद्ध पर्वत (काकेशस)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफल  : पुं० [सं० कु-फल,ब० स० का आदेश] कायफल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफिया  : पुं० [अ० काफियः] १. कविता या पद्य में अंतिम चरणों में मिलाया जानेवाला अनुप्रास। अंत्यानुप्रास तुक। सज। मुहावरा—काफिया तंग करना=(क) इतना तंग या दुःखी करना कि उद्धार का मार्ग न दिखाई दे। छक्के छुड़ाना। (ख) बहुत परेशान या हैरान, करना। नाकों दम करना। २. दो शब्दों का ऐसा रूप-साम्य जिसमें अंतिम मात्राएँ और वर्ण एक ही होते हैं। जैसे—कोड़ा, घोड़ा और तोड़ा, या गोटी चोटी और रोटी का काफिया मिलता है। मुहावरा—काफिया मिलाना=(क) शब्दों का अनुप्रास या तुक मिलाना। (ख) किसी चीज या बात के सामने कोई ऐसी चीज या बात ला रखना जो महत्त्व, योग्यता रूप आदि के विचार से ठीक वैसी ही हो। (किसी के साथ) काफिया मिलाना=किसी के साथ दोस्ती या मेल-जोल करके उसे ठीक अपने समान बनाना अथवा स्वयं उसके सामान बन जाना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफियाबंदी  : स्त्री० [अ० काफियः+फा०बंदी] १. तुक या काफिया जोड़ना। अनुप्रास मिलाना। २. बहुत ही साधारण कोटि की कविता करना। तुकबंदी करना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफिर  : वि० [अ०] १. ईश्वर का अस्तित्व न माननेवाला। नास्तिक। २. जो दया धर्म आदि का कुछ भी ध्यान न रखता हो। अत्याचार, अनर्थ या उपद्रव करनेवाला वाली। जैसे—काफिर जवानी। पुं० १. मुसलमानों की दृष्टि में ऐसा व्यक्ति जो इस्लाम का अनुयायी हो। २. काफिरिस्तान नामक देश में रहनेवाली जाति। ३. उक्त जाति का व्यक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफिरिस्तान  : पुं० [अ०] अफगानिस्तान का एक प्रदेश जिसमें काफिर जाति बसती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफिरी  : वि० [अ०] काफिरो का-सा। काफिर संबंधी। स्त्री० १. काफिर होने की अवस्था या भाव। काफिरापन। २. काफिर काति या काफिरिस्तान देश की बोली या भाषा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफिला  : वि० [अ०] यात्रा, व्यापार आदि के उद्देश्य से पैदल चलनेवाले यात्रियों का समूह।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफी  : वि० [अ०] जितना अपेक्षित या आवश्यक हो ठीक उतना। पूरा। यथेष्ट। पुं० संपूर्ण जाति का एक राग जिसमें गांधार कोमल होता है। यह रात के दूसरे पहर में गाया जाता है। स्त्री० [अं०] कहवा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफूर  : पुं० [सं० कर्पूर, हिं० कपूर] [वि० काफूरी] कपूर। मुहावरा—काफूर होना या हो जाना=(क) इस प्रकार चल देना कि जल्दी किसी को पता भी न चले। (ख) चटपट गायब हो जाना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काफूरी  : वि० पुं० =कपूरी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काब  : स्त्री० [तु०] छोटी थाली। रिकाबी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबर  : स्त्री० [हिं० कबरा] एक प्रकार की भूमि जिसकी मिट्टी में रेत भी मिली रहती है। दोमट। खाभर। वि०=चित-कबरा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबला  : पुं० [अं० केबिल=रस्सा] वह बड़ा पेच जिसके ऊपर ढेबरी या बालटू कसा जाता है। (लश०)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबा  : पुं० [अ० कअबः] मक्के (सरूदी अरब में, मक्का नामक नगर) की वह प्रसिद्ध मसजिद जहाँ सारे संसार के मुसलमान दर्शन और परिक्रमा करने के लिए जाते है। (इसी स्थान की यात्रा करना हज करना कहलाता है)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबि  : स्त्री०=कविता। पुं० =काव्य।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबिज  : वि० [अ०] १. जिसने किसी वस्तु पर कब्जा या अधिकार कर लिया हो। अधिकार जमानेवाला। २. किसी की जमीन या मकान में रहकर उसका उपभोग करनेवाला (आँकुपेंट) ३. पेट के मल का अवरोध या कब्जियत करनेवाला। (औषध या खाद्य पदार्थ)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबिल  : वि० [अ०] [भावकाबिलियत] १. योग्य। २. (व्यक्ति) जो किसी विषय का अच्छा ज्ञाता या विशेषज्ञ हो। विद्वान। पढ़ा-लिखा तथा सुयोग्य (व्यक्ति)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबिलीयत  : स्त्री० [अ०] १. योग्यता। २. लियाकत। ३. पांडित्य। विद्वता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबिस  : पुं० [सं० कपिश] १. लाल रंग की एक प्रकार की मिट्टी। २. उक्त मिट्टी से बना हुआ रंग जिससे कुम्हार मिट्टी के बरतन रँगते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबुक  : स्त्री० [फा०] पक्षियों,विशेषतः कबूतरों के रहने का खाना या दरबा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबुल  : पुं० [सं० कुभा] [वि० काबुली] १. अफगानिस्तान की एक नदी जो अटक के पास सिंधु नदी में गिरती है। २. उक्त नदी पर स्थित एक नगर जो अफगानिस्तान की राजधानी है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबुली  : वि० [हिं०काबुल] १. काबुल का। काबुल संबंधी। जैसे—काबुली पहनावा। काबुली बोली। २. काबुल में उत्पन्न होने या वहाँ से आनेवाला। जैसे—काबुली मेवे। पुं० काबुल अथवा अफगानिस्तान का निवासी। स्त्री०काबुल अथवा अफगानिस्तान की बोली या भाषा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबुली बबूल  : पुं० [हिं०काबुली+बबूल] बबूल के वृक्षों की एक जाति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबुली मस्तगी  : स्त्री० [फा०] एक वृक्ष का गोंद जो गुण,रूप आदि में रूमी मस्तगी के समान होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काबू  : पुं० [तु०] १. अधिकार। वश। जैसे—यह बात हमारे काबू की नहीं है। उदाहरण— जब तक करूँ बाबू बाबू। तब तक करूँ अपने काबू।—कहा०। २. जोर। बल। जैसे—उन पर हमारा कोई काबू नहीं है। ३. काम निकालने का अच्छा और अनुकूल अवसर। दाँव। मुहावरा—(किसी के) काबू पर चढ़ना=ऐसी विवशता की स्थिति में होना कि कुछ भी जोर या वश न चल सके। जैसे—जिस दिन तुम उनके काबू पर चढ़ोगे, उस दिन वे तुम से पूरा बदला चुका लेगें।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम  : पुं० [सं०√कम् (चाहना)+णिङ्+घञ्] [वि० कामुक, कामी, काम्य] १. किसी इष्ट बात की सिद्धि या वासना की पूर्ति के संबंध में मन में होनेवाली इच्छा या चाह। अभिलाषा, कामना, मनोरथ। २. अपने अपने विषयों के भोग की ओर होनेवाली इंद्रियों की स्वाभाविक प्रवृत्ति जो धार्मिक क्षेत्र में चातुर्वर्ग या चार पदार्थों में से एक मानी गई है। विशेष—हमारे यहाँ धर्म, अर्थ काम और मोक्ष ये चार ऐसे पदार्थ कहे गये हैं जिनकी सिद्धि मनुष्य के जीवन में होना आवश्यक भी है और स्वाभाविक भी। ऐसे प्रसंगों में काम की प्राप्ति या सिद्धि का यह आशय होता है कि इंद्रियों की इष्ट, संगत और स्वाभाविक प्रवृत्तियाँ चरितार्थ और पूरी होती रहें। ३. संभोग या स्त्री-प्रसंग की कामना। मैथुन या सहवास की इच्छा या प्रवृत्ति। ४. पुरुष और स्त्री के पारस्परिक संभोग या संयोग की इच्छा या कामना का देवता जिसे कामदेव भी कहते हैं। विशेष—रूप के विचार से यह कुमारोचित सुन्दरता का आदर्श और प्रतीक माना गया है, और इसकी पत्नी रति स्त्रियों की सुन्दरता की प्रतीक कही गई है। भिन्न-भिन्न आचार्यों या ग्रन्थों के मत के ०यह धर्म,ब्रह्मा अथवा संकल्प का पुत्र है। कहते हैं कि जब इसने शिवजी के मन पर अपना प्रभाव डालना चाहा था तब उन्होंने इसे भस्म कर डाला था। पर बाद में रति के विलाप करने पर वर दिया था कि अब यह शरीर-रहित होकर सदा जीवित रहेगा। तभी से इसे अनंग भी कहते हैं। ५. महादेव। शिव। ६. बलदेव का एक नाम ७. प्रद्युम्न का एक नाम जो परम सुन्दर होने के कारण कामदेव के अवतार कहे गये हैं। ८. वीर्य। शुक्र। ९. चार चरणों का एक प्रकार का छंद जिसके प्रत्येक चरण में दो दीर्घ मात्राएँ होती हैं। १॰. रचना के विचार से एक विशिष्ट प्रकार का देव-मंदिर। (वास्तु)। पुं० [सं० कर्म, प्रा० पा० पं० कम्म, गु० मरा० काम० सिह० कमु] १. वह जो कुछ किया जाय,किया गया हो अथवा किया जाने को हो। क्रिया के परिणाम के रूप में होनेवाला किसी प्रकार का कार्य, कृत्य या व्यापार। जैसे—मनुष्य हरदम किसी-न-किसी काम में लगा रहता है। २. किसी विशिष्ट उद्देश्य से अथवा किसी प्रयोजन की सिद्धि के लिए किया जानेवाला कोई कार्य या कृत्य। जैसे—दफ्तर का काम करके आने पर घर का काम करना पड़ता है। मुहावरा—काम अटकना=बाधा के कारण काम का बीच में कुछ समय के लिए रूकना। जैसे—अब तो रुपए के बिना काम अटक रहा है। (किसी वस्तु का) काम करना=अपनी उपयोगिता, गुण या प्रभाव दिखलाना। जैसे—यह दवा तीन घंटे में अपना काम करेगी। कान चलना=(क) किसी कार्य का आरम्भ होना। (ख) किसी कार्य का बराबर संपादित होता रहना। जैसे—इमारत का काम बराबर चल रहा है। (किसी चीज से) काम चलाना या निकालना=आवश्यक वस्तुओं के अभाव में किसी दूसरी चीज में से जैसे—तैसे कार्य का निर्वाह करना। जैसे—कपड़ा न मिलने पर कागज से ही काम चलाना या निकालना। काम निकलना-(क) आवश्यकता पूरी होना। (ख) उद्देश्य या प्रयोजन सिद्ध होना। काम बनना=उद्दिष्ट रूप में या ठीक तरह से कार्य पूरा या सिद्ध होना। जैसे—(क) यदि वे किसी तरह राजी हो जायँ तो काम बन जाय। (ख) चलों, तुमने तो अपना काम बना लिया। (किसी आदमी या चीज से) काम लेना=उपयोग में लाकर उद्देश्य या कार्य सिद्ध करना। जैसे—जब तक कोई अच्छा नौकर नहीं मिलता तब तक इसी लड़के से काम लो। (किसी का) काम हो जाना=इतना अधिक परिश्रम या भार पड़ना कि मानों प्राणों पर संकट आ गया हो। जैसे—आज तो दिन भर लिखते-लिखते (या दौड़ते-दौड़ते) हमारा काम हो गया। ३. कोई ऐसा कार्य जिसकी पूर्ति या संपादन से कोई कृति प्रस्तुत होती हो। जैसे—इमारत का काम,कोश का काम। ४. व्यापार, सेवा आदि का कोई ऐसा कार्य जो जीविका-निर्वाह के लिए किया जाता हो। जैसे—(क) आज-कल उनके हाथ में कोई काम नहीं है। (ख) उनके पास जाने पर तुम्हें कोई काम मिल जायगा। ५. कोई ऐसा कार्य जिसके लिए बहुत अधिक कौशल, परिश्रम या योग्यता की आवश्यकता होती हो। पद—(कुछ करना) काम रखता है=(इस काम में) बहुत अधिक कौशल, परिश्रम या योग्यता अपेक्षित है। जैसे—ऐसा ग्रन्थ लिखना काम रखता है। ६. कोई ऐसी कृति या रचना जिसमें कर्त्ता ने उत्कृष्ट कौशल दिखलाया या विशेष परिश्रम किया हो। जैसे—कसीदे या जरदोजी का काम,पच्चीकारी या मीनाकारी का काम। ७. किसी कृति या रचना में दिखाई पड़नेवाला कर्त्ता का कौशल, परिश्रम या योग्यता (उसके उपादान से भिन्न) जैसे—जरा इन बेल-बूटों में कारीगर का काम तो देखो। ८. किसी कृति या रचना में लगा हुआ प्रधान या मुख्य उपादान अथवा सामग्री। जैसे—(क) उस मकान में ऊपर से नीचे तक पत्थर (या लकड़ी) का ही काम है। (ख) ऐसा कपड़ा लाओ जिसमें जरी (या रेशम) का काम हो। ९. उपयोग। प्रयोग। व्यवहार। मुहावरा—(किसी चीज, बात या व्यक्ति का) काम आना उपयोगी या व्यवहार के योग्य होना। जैसे—आखिर आपकी दोस्ती और किस दिन काम आवेगी। विशेष— हिंदी का यह मुहावरा उर्दू के उस (काम आना) मुहावरे से भिन्न है जिसका अर्थ होता है—लड़ाई-झगड़े में मारा जाना। इसे अंतिम मुहावरे के विवेचन और उदाहरण के लिए देखें नीचे फा०काम का अर्थ-वर्ग। काम में आना=उपयोग या व्यवहार में आना, प्रयुक्त या व्यवह्रत होना। जैसे—इतने दिनों से सँभालकर रखी हुई पुस्तक आज काम में आई है। काम लेना=(क) उपयोग या व्यवहार में लाना। जैसे—आप इस पुस्तक से भी कुछ काम ले सकते हैं। (ख) काम में लगाना। जैसे—आज इस नये आदमी से काम लेकर देखो। काम निकालना=किसी युक्ति से अपना उद्देश्य या मनोरथ सिद्ध करना। जैसे—तुमने तो बातों-बातों में ही अपना काम निकाल लिया। काम बनना=उद्देश्य या प्रयोजन सिद्ध होना। जैसे—चलो,तुम्हारा काम तो अब बन ही गया। पद—काम का=जिसका अच्छा या यथेष्ट उपयोग पूरा होता हो। जैसे—यह आदमी तो बहुत काम का निकला। १॰. ऐसा पारस्परिक संबंध या संपर्क जिससे कोई उद्देश्य पूरा होता हो। मतलब। वास्ता। सरोकर। जैसे—तुम्हें इन सब झगड़ों से क्या काम। उदाहरण—जाओ, जाओ, मोसों तोसों अब कहा काम। गीत। मुहावरा—अपने काम से काम रखना=अपने काम या प्रयोजन के सिवा और किसी बात से मतलब या संबंध न रखना। जैसे—वह जो चाहें सो करें, तुम अपने काम से काम रखो। (किसी के) काम पड़ना=इस प्रकार का संपर्क या संबंध होना कि बल, बुद्धि आदि की परीक्षा हो और उसके फलस्वरूप कुछ कटु अनुभव हो। पाला या साबिका पड़ना। जैसे—अभी तुम्हें किसी उस्ताद से काम नहीं पड़ा है नहीं तो इस तरह बढ-बढ़कर बातें न करते। उदाहरण—चंदन पड़ा चमार घर नित उठ कूटै चाम। चंदन रोवै सिर धुनै पड़ा नीच से काम। पुं० [सं० काम से फा०] १. इच्छा। कामना। २. इरादा। विचार। ३. अभिप्राय,उद्देश्य। मुहावरा—(किसी व्यक्ति का) काम आना=मार-काट या लड़ाई-झगड़े में मारा जाना। हत होना। जैसे—पहले महायुद्ध में साठ लाख आदमी काम आये थे। (किसी व्यक्ति का) काम चमाम करना=कौशल अथवा बल से किसी का अस्तित्व मिटाना। किसी के जीवन का अंत करना। जैसे—बेगम ने लौंड़ी से जहर दिवलवाकर अपनी नई सौत का काम तमाम कर दिया। विशेष—ये मुहावरे उर्दू से हिंदी में आये हैं इसलिए ये सं० काम के अर्थ-वर्ग में नही बल्कि फा० काम के अर्थ-वेग में रखे गये हैं। इनका आशय यही होता है कि किसी उद्देशय या प्रयोजन की सिद्धि में किसी के अस्तित्व या जीवन का उपयोग हुआ था अथवा किया गया था, अर्थात् उसकी बलि चढ़ी थी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-कला  : स्त्री० [ष० त०] १. मैथुन। रति। २. कामदेव की पत्नी रति। ३. तंत्रोपचार में शिव और शक्ति की प्रतीक सफेद और लाल बिन्दियों या बिंदुओं का संयोग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामकाज  : पुं० [हिं० काम+काज=कार्य] कई प्रकार के काम। काम-धंधा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामकाजी  : पुं० [हिं० काम+काज] वह जो प्रायः काम-धंधे में लगा रहता हो या जिसके हाथ में अनेक काम रहते हों।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-कूट  : वि० [ब० स०] १. कामुक। २. व्यभिचारी। पुं० [ष० त०] १. कामुकता। २. वेश्यावृत्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामकृत  : वि० [कामकृत] १. अपनी इच्छा के अनुसार काम करनेवाला। २. [च० त०] काम-वासना या विषय भोग से संबंध रखने या उसके कारण होनेवाला। जैसे—कामकृत ऋण, कामकृत रोग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामग  : वि० [सं० काम√गम् (जाना)+ड] [स्त्री० कामगा] १. अपनी कामना या इच्छा के अनुसार काम करनेवाला। २. मनमाना आचरण करनेवाला। स्वेच्छाचारी। ३. कामुक। ४. व्यभिचारी। पुं० कामदेव
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामगार  : पुं० १. मजदूर। २. कामदार (कार्याधिकारी)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामचर  : पुं० [सं० काम√चर् (गति)+ट] १. अपनी अच्छा के अनुसार हर जगह पहुँच सकनेवाला। २. स्वेच्छापूर्वक विचरने या घूमने-फिरने वाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-चलाऊ  : वि० [हिं० काम+चलाना] १. (ऐसी वस्तु) जो टिकाऊ न होने पर भी कुछ समय तक के लिए काम में आ सके। २. जैसे—तैसे कुछ काम चला देनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामचार  : पुं० [सं० काम√चर्+घञ्] [वि० कामचारी] १. स्वेच्छाचार। २. कामुकता। ३. स्वार्थता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामचारी (रिन्)  : वि० [सं० काम√चर्+णिनि] १. अपनी इच्छानुसार विचरण करनेवाला। २. जब जहाँ चाहे तब वहाँ पहुँच सकने वाला। जैसे—देवगण कामचारी होते हैं। ३. काम-वासना की तृप्ति के लिए मनमाना आचरण करनेवाला। कामुक। लंपट।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-चोर  : वि० [सं० काम+चोर] जो अपने कर्त्तव्य या कार्य से जी चुराता हो। जैसे—काम चोर नौकर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामज  : वि० [सं० काम√जन्+ड] काम या वासना से उत्पन्न। जैसे—कामज व्यसन। पुं० क्रोध।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामजित्  : वि० [सं० काम√जि (जीतना+क्विप्] काम को जीतने या उस पर विजय प्राप्त करनेवाला। पुं० १. महादेव० शिव। २. कार्तिकेय। ३. जैनों में जिनदेव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-ज्वर  : पुं० [मध्य० स०] वह ज्वर जो काम-वासना की पूर्ति न होने अथवा अधिक समय तक ब्रह्मचर्य का पालन करने की दशा में होता है। (वैद्यक)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामड़िया  : पुं० [सं० कम्बल] संत रामदेव के अनुयायी साधु।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामणि  : स्त्री० [सं० कामिनी] सुन्दर स्त्री।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामतः  : क्रि० वि० [सं० काम+तस्] इच्छा, उद्देश्य या कामना से। जान-बूझकर कर या स्वेच्छा से।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामत  : स्त्री० [अ० क्रामत] ऊँचाई के विचार से आकार। कद।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-तरु  : पुं० [मध्य० स०] १. कल्प-वृक्ष (दे०) २. बंदाल या बाँदा जो दूसरे वृक्षों पर चढ़कर पलता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामता  : पुं० [सं० कामद] चित्रकूट के पास का एक गाँव। स्त्री० [सं० ] काम का भाव। कामत्व। पुं० =कामदगिरी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-तिथि  : स्त्री० [मध्य० स०] त्रयोदशी जो कामदेव की पूजा की तिथि कही गयी है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामद  : वि० [सं० काम√दा (देना)+क] कामना पूरा करनेवाला। इच्छाओं की पूर्ति करनेवाला। जैसे—कामद मणि, कामद यज्ञ। उदाहरण—कामद भे गिरि रामप्रसादा।—तुलसी। पुं० १. ईश्वर २. सूर्य। ३. कार्तिकेय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामदगाई  : स्त्री०=कामधेनु।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामद-गिरि  : पुं० [कर्म० स०] चित्रकूट में एक पर्वत जो सभी कामनाएँ पूरी करनेवाला कहा गया है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामद-मणि  : पुं० [कर्म० स०] चिंतामणि नामक पौराणिक रत्न।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-दव  : पुं० [कर्म० स०] कामाग्नि (काम-वासना)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-दहन  : पुं० [ष० त०] १. शिवजी के द्वारा कामदेव के जलाये जाने की घटना। २. शिव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामदा  : स्त्री० [सं० काम√दा (देना)+क+टाप्] १. कामना पूर्ण करनेवाली एक देवी का नाम। २. कामधेनु। ३. चैत्र-शुक्ला एकादशी। ४. एक प्रकार का वर्णवृत्त जिसके प्रत्येक चरण में क्रम से रगण, यगण, जगण तथा गुरु होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-दान  : पुं० [मध्य० स०] १. किसी की इच्छा या रुचि के अनुकूल भेंट की जानेवाली वस्तु। २. वेश्याओं का ऐसा नाच-रंग जिसमें लोग सब काम छोड़कर लीन हो रहे हों।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामदानी  : स्त्री० [सं० काम+दान (प्रत्यय)] १. कपड़े आदि पर बादलों के तारों, सलमें, सितारे आदि से बनाया जानेवाला बेल-बूटों का काम। २. वह कपड़ा जिस पर उक्त प्रकार का काम बना हो। जैसे—कामदार टोपी। पुं० प्रधान कर्मचारी या कारिन्दा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामदुधा  : स्त्री० [सं० काम√दुह् (दुहना)+क-टाप्] कामधेनु।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-दूती  : स्त्री० [ष० त०] १. परवल की बेल। २. नागदंती नाम की घास।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-देव  : पुं० [मयू० स०] पुराणों के अनुसार एक देवता जो काम-वासना के अधिष्ठाता माने गये हैं। इनकी पत्नी रति थी। शिव ने इन्हें अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया था। वसंत इनका साथी, कोयल वाहन और अस्त्र फूलों का धनुष-बाण कहा गया है। अनंग, मदन, मन्मथ। २. उक्त की प्रेरणा से जाग्रत होनेवाली कामवासना। ३. वीर्य।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-धाम  : पुं० [सं० कर्म-धर्म से] १. तरह-तरह के काम। काम-काज। २. रोजगार। व्यवसाय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामधुक्  : वि० [सं० काम√दुह्+क्विप्] इच्छानुसार या मनमाना फल देनेवाला। स्त्री०=कामधेनु।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-धेनु  : स्त्री० [मध्य० स०] १. पुराणानुसार एक प्रसिद्ध गौ जो समुद्र मंथन के समय समुद्र में से निकलनेवाले चौदह रत्नों में से एक थी। और जो सब प्रकार की कामनाएँ पूरी करनेवाली कही गई है। सुरभी। २. वसिष्ठ की नंदिनी नामक गाय,जिसके लिए उन्हें विश्वामित्र से युद्ध करना पड़ा था। ३. दान के लिए सोने की बनाई हुई गौ की मूर्ति। ४. रहस्य संप्रदाय में मन की वृत्ति,जो सभी प्रकार के फल दे सकती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-ध्वज  : पुं० [ष० त०] मछली जो कामदेव के झंडे पर बनी रहती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामन  : वि० [सं०√कम्+णिङ+ल्युट-अन] कामुक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामना  : स्त्री० [सं०√कामि+युच् टाप्] १. अभीष्ट या हार्दिक इच्छा। जैसे—हमारी कामना है कि तुम फलो-फूलो। २. ऐसी इच्छा, जिसकी पूर्ति होने पर विशेष आनन्द तथा सुख मिलता हो। (विश्)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामनी  : स्त्री०=कामिनी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामपरता  : स्त्री० [सं० काम-पर, स० त०+तल्-टाप्] कामुकता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामपाल  : वि० [सं० काम√पाल् (पालन करना)+णिच्+अण्] कामनाओं की पूर्ति करनेवाला। पुं० १. श्रीकृष्ण। २. बलराम। ३. महादेव। शिव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-बाण  : पुं० [ष० त०] कामदेव के ये पाँच बाण-मोहन, उन्मादन, संतापन, शोषण और निश्चेष्टकरण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-भूरुह  : पुं० [मध्य० स०] कल्पवृक्ष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामयाब  : वि० [फा] [भाव कामयाबी] जिसे सफलता हुई हो। सफल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामर  : पुं० =कंबल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामरान  : वि० [फा] जिसका उद्देश्य या प्रयत्न सिद्ध होल गया हो। सफल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामरि  : स्त्री०=कमली (छोटा कंबल)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-रिपु  : पुं० [ष० त०] कामदेव के शत्रु अर्थात् शिव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामरी  : स्त्री० [सं० कंबल] छोटा कबंल। कमली।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-रुचि  : पुं० [ब० स०] सब प्रकार के अस्त्रों को व्यर्थ करनेवाला एक अस्त्र जो विश्वामित्र से श्रीरामचन्द्रजी को मिला था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामरु  : पुं० =कामरूप।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-रूप  : वि० [ब० स०] जो इच्छानुसार अनेक प्रकार के रूप धारण कर सकता हो। पुं० १. देवता। २. एक प्राचीन राज्य जो करतोया नदी से असम प्रदेश और हिमालय तथा चीन तक फैला हुआ था। इसकी राजधानी प्रागज्योतिष में थी। इसी में कामख्या देवी का मंदिर है। ३. एक प्राचीन अस्त्र, जिससे शत्रु के फेंके हुए अस्त्र विफल किए जाते थे। ४. २६ मात्राओं का एक छंद जिसमें क्रमशः ९, ७ और १॰ के अन्तर पर यति और अन्त में गुरु-लघु होता है। ५. बरगद की तरह का एक बड़ा पेड़।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामरूपत्व  : पुं० [सं० कामरूप+त्व] एक प्रकार की सिद्धि जिससे साधक में अनेक प्रकार के मन-माने रूप धारण करने की शक्ति आती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामरूपी (पिन्)  : वि० [सं० कामरूप+इनि] [स्त्री० कामरूपिणी] १. इच्छानुसार रूप धारण करनेवाला। मायावी। २. सुन्दर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामल  : पुं० [सं०√कम (चाहना)+णिच्+कलच्] १. वसंत ऋतु। २. कामला या पीलू नामक रोग। पीलिया। वि० कामी। कामुक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामला  : पुं० [सं० कामल] कमल या पीलिया नामक रोग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामली  : स्त्री०=कमली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-लोक  : पुं० [मध्य० स०] बौद्धों के अनुसार एक लोक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामवती  : स्त्री० [सं० काम+मतुप्, ङीष्] दारुहल्दी। वि० [कामवान का स्त्री रूप] रूपवती स्त्री। सुन्दरी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-वन  : पुं० [ष० त०] १. वह वन जिसमें तपस्या करते समय शिवजी ने कामदेव को भस्म किया था। २. मथुरा के पास का एक प्रसिद्ध तीर्थ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-वर  : वि० [सं० ] मनोहर। सुंदर।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामवान् (वत्)-  : वि० [सं० काम+मतुप्] [स्त्री० कामवती] १. जिसके मन में कामना हो। २. रूपवान। सुंदर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-शर  : पुं० [ष० त०] १. कामबाण। (दे०) २. आम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-शास्त्र  : पुं० [मध्य० स०] वह शास्त्र जिसमें स्त्री और पुरुष के संभोग के प्रकारों रीतियों पारस्परिक आकर्षक तथा प्रेम-संबंधी बातों का विवेचन होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामसखा  : पुं० [सं० कामसख] कामदेव का मित्र वसंत। (ऋतु)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम-सुत  : पुं० [ष० त०] अनिरूद्ध जो कामदेव के अवतार मानेजाने वाले प्रद्युम्न के पुत्र थे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामांध  : वि० [काम-अंध, तृ० त०] जो काम-वासना के कारण अंधा अर्थात् विवेक से रहित हो रहा हो। परम कामातुर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामा  : स्त्री० [सं० काम+टाप्] १. कामिनी स्त्री० २. एक वर्णिक छन्द जिसके प्रत्येक चरण में दो गुरु होते हैं। जैसे—ध्याये, राधा, त्यागे बाधा। पुं० [अं० कॉमा] अल्प विराम (दे०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामाक्षी  : स्त्री० [काम-अक्षि, ब० स० षच् प्रत्यय ङीष्] १. दुर्गा की एक मूर्ति। २. असम का एक प्रदेश जहाँ उक्त मूर्ति स्थापित है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामाख्या  : स्त्री० [काम-आख्या, ब० स०] दुर्गा की एक मूर्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामाग्नि  : स्त्री० [काम-अग्नि, उपमित० स०] उत्कट या तीव्र कामवासना। संभोग की प्रबल इच्छा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामातुर  : वि० [काम-आतुर, तृ० त०] जो काम-वासना के कारण बहुत आतुर या विकल हो रहा हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामात्मज  : पुं० [काम-आत्मज, ष० त०] प्रद्युम्न (कामदेव का अवतारी रूप) के पुत्र अनिरुद्ध।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामाद्रि  : पुं० [काम-अद्रि, मध्य० स०] असम देश का एक पर्वत।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामानुज  : पुं० [काम-अनुज, ष० त०] काम-वासना के कारण उत्पन्न होनेवाला तामस भाव या मनोविकार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामायनी  : स्त्री० [सं० काम-अयन, ष० त० कामायन+ङीष्] १. स्त्री। २. [काम+फक्-आयन, ङीष्] कामगोत्र में उत्पन्न स्त्री० ३. पुराणानुसार कामदेव और रति की कन्या, जिसका विवाह वैवस्वत् मनु से हुआ था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामायुध  : पुं० [काम-आयुध, उपमित स०] १. कामदेव का अस्त्र। काम-बाण। २. आम (वृक्ष और फल)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामारथी  : पुं० =कामार्थी।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामारि  : पुं० [काम-अरि, ष० त०] कामदेव के शत्रु महादेव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामार्त  : वि० [काम-आर्त, तृ० त०]=कामातुर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामावशायिता  : स्त्री० [सं० काम-अव√शी (निश्चय करना)+णिच्+तल्, टाप्] सत्य संकल्पता जो योगियों की आठ सिद्धियों या ऐश्वर्यों में से है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामावसयिता  : स्त्री० [सं० काम-अव√सो (अंत करना)+णिच्+णिनि+तल्, टाप्]=कामावशायिता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामिक  : वि० [सं० काम+ठन्-इक]=कामित।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामिका  : स्त्री० [सं० कामिक+टाप्] श्रावण कृष्ण एकादशी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामित  : वि० [सं० कम् (चाहना)+णिच्+क्त] जिसकी कामना की गई हो। अभिलषित। स्त्री०=कामना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामिनियाँ  : पुं० [देश] एक प्रकार का छोटा पेड़ जिसकी राल से एक प्रकार का लोबान बनता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामिनी  : स्त्री० [सं० काम+इनि, ङीष्] १. ऐसी स्त्री जिसके मन में कामवासना हो। कामवती। २. सुंदरी स्त्री, जिसकी कामना की जाय या की जा सके। ३. कृपालु या स्नेहमयी स्त्री। ४. मालकोस राय की एक रागिनी। ४. मदिरा। शराब। ६. पेड़ों पर होनेवाला परगाछा। बाँदा। ७. दारूहल्दी। ८. एक प्रकार का वृक्ष, जिसकी लकड़ी से मेज, कुरसियाँ बनती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामिनी कांत  : पुं० [ष० त०] एक प्रकार का वर्णवृत्त।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामिनी मोहन  : पुं० [ष० त०] स्रग्विणी छंद का दूसरा नाम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामिल  : वि० [अ०] १. पूरा। पूर्ण। २. कुल। सब। ३. समूचा। सारा। ४. जिसने किसी कार्य या विषय में पूर्ण योग्यता प्राप्त की है। पूर्ण ज्ञाता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामी (मिन्)  : वि० [सं० काम+इनि] [स्त्री० कामिनी] १. जिसके मन में कोई कामना हो। उदाहरण—जहाँ मनुज पहले स्वतन्त्रता से हो रहा साम्य का कामी।—दिनकर। २. काम-वासना में रत रहनेवाला। विषयी। पुं० १. विष्णु का एक नाम। २. चंद्रमा। ३. चकवा या चक्रवाक पक्षी। ४. कबूतर। ५. गौरैया या चिड़ा नामक पक्षी। ६. सारस।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामुक  : वि० [सं०√कम्+उकञ्] [स्त्री० कामुका] १. कामना या इच्छा करनेवाला। चाहनेवाला। २. जिसके मन में प्रायः कामवासना रहती हो। कामी। विषयी। पुं० १. अशोकवृक्ष। २. माधवीलता। ३. गौरैया या चिड़ा पक्षी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामुका  : स्त्री० [सं० कामुक+टाप्] एक प्रकार का मातृका दोष, जो बालकों को रोग के रूप में उनके जन्म के बारहवें दिन, बारहवें महीने या बारहवें वर्ष होता है। (वैद्यक)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामुकी  : स्त्री० [सं० कामुक+ङीष्] १. कामवती स्त्री। २. व्यभिचारिणी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामेश्वरी  : स्त्री० [काम-ईश्वरी, ष० त०] १. कामाख्या की पाँच मूर्तियों या रूपों मे से एक। २. तंत्र में एक भैरवी का नाम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोद  : पुं० [कु-आमोद, ब० स० कु-क आदेश] रात के पहले पहर में गाया जानेवाला संपूर्ण जाति का एक राग, जो मालकोस का पुत्र माना गया है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोदक  : पुं० [काम-उदक, मध्य० स०] किसी मृत प्राणी, विशेषतः किसी मित्र या दूर के संबंधी को दी जानेवाली जलांजलि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोद-कल्याण  : पुं० [ब० स०] संपूर्ण जाति का एक संकर राग जो कामोद और कल्याण के योग से बनता है तथा जिसमें सब शुद्ध स्वर लगते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोद-तिलक  : पुं० [ब० स०] रात के पहले पहर में गाया जानेवाला बाड़व जाति का एक संकर राग, जो कामोद और तिलक के योग से बनता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोद-नट  : पुं० [ब० स०] संपूर्ण जाति का एक संकर राग, जो कामोद और नट के योग से बनता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोद-सामन्त  : पुं० [ब० स०] रात के तीसरे पहर में गाया जानेवाला बाड़व जाति का एक राग, जो कामोद और सामंत के योग से बनता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोदा  : स्त्री० [सं० कामोद+टाप्] दे० ‘कामोदी’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोदी  : स्त्री० [सं० कामोद+ङीष्] रात के दूसरे पहर में गाई जाने वाली संपूर्ण जाति की एक रागिनी जो कामोद की स्त्री मानी गई है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोद्दीपक  : वि० [काम-उद्दीपक, ष० त०] (वस्तु या स्थिति) जो मनुष्य के मन में काम-वासना जगावे या तीव्र करे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोद्दीपन  : पुं० [काम-उद्दीपन, ष० त०] १. काम-वासना को उद्दिप्त या तीव्र करना। २. काम-वासना का उद्दीप्त या तीव्र होना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कामोन्माद  : पुं० [सं० काम-उन्माद, मध्य० स०] युवकों और युवतियों को होनेवाला वह उन्माद रोग जो काम-वासना की पूर्ति न होने के कारण होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम्य  : वि० [सं०√कम्+णिङ+यत्] १. जिसकी कामना की गई हो अथवा की जा सके। जो कामना किये जाने के योग्य हो। २. जो किसी की इच्छा या रुचि के अनुकूल या अनुसार हो। ३. प्रिय,सुन्दर और सुखद। ४. जिससे अथवा जिसके द्वारा कामना की सिद्धि होती हो अथवा हो सकती हो। जैसे—काम्य धर्म। ५. जो अपनी इच्छा से होता हो या हो सकता हो। जैसे—काम्य मरण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम्य-कर्म (न्)  : पुं० [कर्म० स०] किसी उद्देश्य या कामना की सिद्धि के लिए किया जानेवाला कोई अनुष्ठान या कार्य।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम्य-मरण  : पुं० [कर्म० स०] १. अपनी इच्छा से अर्थात् जब जी चाहे तब मरना। २. मुक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम्या  : स्त्री० [सं० √कम्+णिङ्+क्वय्, टाप्] १. कामना। २. प्रयोजन। ३. उद्देश्य।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काम्येष्टि  : स्त्री० [सं० काम्या-इष्टि, कर्म० स०] वह यज्ञ जो किसी कामना की पूर्ति के लिए किया जाता हो। जैसे—पुत्रेष्टि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काय  : पुं० [सं०√चि (इकट्ठा करना)+घञ्, नि० सिद्धि] १. काया (दे०)। २. बौद्ध भिक्षुओं का संघ। ३. [क+अण्, इत्व, वृद्धि] प्रजापति के उद्देश्य से दी जानेवाली हाव। ४. प्राजापत्य विवाह। ५. कनिष्ठा उँगली के नीचे का स्थान जिसे प्राजापति तीर्थ भी कहते हैं। ६. उद्देश्य या लक्ष्य। ७. पूँजी। मूलधन। अव्य० प्रश्नवाचक अव्यय। क्या। (बुदेल) जैसे—काय जू ! (संबोधन)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायक  : वि० [सं० काय+वुअ-अक]=कायिक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायक्क  : वि०=कायिक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काय-चिकित्सा  : स्त्री० [ष० त०] आयुर्वेद में चिकित्सा के आठ प्रकारों या विभागों में से तीसरा, जिसमें शरीर के अंगों और उनमें होनेवाले रोगों (जैसे—उन्माद, ज्वर आदि) का विवेचन और उसकी चिकित्सा का विधान है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायजा  : पुं० [अ० कायजा] १. घोड़े के साज का वह अंश जो उसकी दुम में फँसाया जाता है। २. घोड़े की लगाम में बँधी हुई वह डोरी,जो खरहरा करते समय घुमा कर उसकी दुम में फंसाई जाती है। ३. डोरी आदि का कोई फंदा जो कहीं फँसाया जाता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायथ  : पुं० =कायस्थ (जाति)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायदा  : पुं० [अ० कायदः] १. कोई काम करने का अच्छा और अव्यस्थित या शिष्ट-सम्मत ढंग प्रकार प्रणाली या रीति। सलीका। जैसे—हर काम कायदे से होना चाहिए। २. चीजे आदि रखने का अच्छा और व्यवस्थित क्रम या ढंग। करीना। जैसे—सब चीजें कायदे से कमरे में रखी थीं। ३. किसी बात या विषय में परम्परा से चली आई चाल या प्रथा। जैसे—दुनिया (या भले आदमियों) का यही कायदा है। ४. आचरण, व्यवहार आदि के लिए निश्चित किये हुए नियम या विधान। विधि। जैसे—(क) सरकारी कर्मचारियों के लिए अब नये कायदे बने है। (ख) जानवरों का यही कायदा है। उदाहरण—आपके जैसा मिजाज और कायदा उन्होंने नहीं पाया है।—वृन्दावनलाला वर्मा। ५. पढ़ने-लिखने के क्षेत्र में किसी विषय की आरंभिक या पहली पुस्तक (उर्दू) जैसे—अँगरेजी, उर्दू या हिन्दी का कायदा (या कायदे की पुस्तक)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायफर  : पुं० =कायफल।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायफल  : पुं० [सं० कटुफल] एक प्रसिद्ध वृक्ष, जिस की सुगंधित छाल दवा और मसालों के काम में आती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काय-बंध  : पुं० [सं० ष० त०] कमरबन्द। पटका।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायम  : वि० [अ०] १. किसी नियत स्थान पर टिका या ठहरा हुआ। स्थिर। २. निर्मित, प्रचलित या स्थापित किया हुआ। जैसे—बच्चों के लिए स्कूल कायम करना। ३. निर्धारित या निश्चित करना। जैसे—राय या हद कायम रखना। ४. दृढ़। पक्का। जैसे—अब हम भी अपने इरादे कपर कायम हैं। ५. जो अपने प्रस्तुत या वर्त्तमान रूप या स्थिति में ज्यों-का-त्यों रहे या रहने दिया जाय। जैसे—शतरंज की बाजी आज यहीं कायम रहे, कल फिर आगे खेल होगा। मुहावरा—(शतरंज की बाजी) कायम उठाना=शतंरज की बाजी को इस प्रकार समाप्त करना, जिसमें किसी पक्ष की हार जीत न हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायम-मिजाज  : वि० [अ०] (व्यक्ति) जिसके स्वभाव में अव्यवस्था, चंचलता आदि का अभाव हो। स्थिर-चित्त।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायम-मुकाम  : वि० [अ०] १. जो किसी के स्थान पर अस्थायी रूप से अथवा प्रतिनिधि बनकर काम करता हो। स्थानापन्न। २. कायम। स्थिर। (बोलचाल)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायर  : वि० [सं० कातर] १. जिसमें उत्साह, बल या साहस का अभाव हो। २. किसी बड़े काम या बात से डर जानेवाला। डरपोक। ३. जो असमर्थ न होने पर भी घबराकर या और किसी कारण से किसी काम से पीछे हटे या मुंह मोड़ ले। ४. डरपोक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायरता  : स्त्री० [सं० कातरता] कायर होने की अवस्था, या भाव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायल  : वि० [अ०] १. किसी के तर्क या विचार को ठीक समझकर मान लेने वाला। २. बात का उत्तर न दे सकने के कारण चुप हो जानेवाला। मुहावरा—(किसी को) कायल करना=अपने तर्क से या समझा-बुझा कर अपने अनुकूल करना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायली  : स्त्री० [अ० कायल] (तर्क में) कायल होने की अवस्था या भाव। जैसे—कायली-माकूली की बात करो। पद—कायली-माकूली=किसी की तर्कसिद्धि बात मान लेना। स्त्री० [सं० कायरता] १. ग्लानि। २. लज्जा। शरम। स्त्री० [सं० क्ष्वेलिका, पा० ख्वेलिका] दही मथने की मथानी। (डिं०)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काय-व्यूह  : पुं० [उपमित० स०] १. युद्ध आदि में व्यक्तियों को खड़ा करके बनाया हुआ मोरचा या रचा हुआ व्यूह। २. [स० त०] वैद्यक में शरीर के अन्दर कफ, पित्त और अस्थि, मज्जा, माँस, शुक्र, स्नायुओं आदि का क्रम या विभाग अथवा उनका विवेचन। ३. योगियों की एक क्रिया, जिसमें वे अपने कर्मों के भोग के लिए प्रत्येक अंग और इंद्रियों का अलग ध्यान या विचार करते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायस्थ  : वि० [सं० काय√स्था (ठहरना)+क] काय या शरीर में रहनेवाला। पुं० १. जीवात्मा। २. परमात्मा। ३. एक प्रसिद्ध जाति, जो अपने आपको चित्रगुप्त की संतान कहती है। इस जाति के लोग प्रायः लिखने-पढने आदि का काम करते है। ४. उक्त जाति का व्यक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायस्था  : स्त्री० [सं० कायस्थ+टाप्] १. हरीतकी। हड़। २. आँवला। ३. काकोली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काया  : स्त्री० [सं० काय] [वि० कायिक] १. जीव, जंतु, मनुष्य आदि का भौतिक या स्थूल ढाँचा। हाड़-माँस का बना हुआ शरीर। देह। २. वृक्ष का तना। ३. किसी वस्तु का बाहरी रूप या ढाँचा। जैसे—वीणा की काया। मुहावरा—काया पलट देना=किसी टूटी-फूटी वस्तु को फिर से नया रूप देना। पूरी तरह से बदल कर रूपांतरित करना। ४. संघ। समुदाय। ५. कानून के अनुसार बनी हुई कोई संस्था (बॉड़ी उक्त सभी अर्थों में)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायाकल्प  : पुं० [सं० कायाकल्प] १. कोई ऐसी क्रिया या व्यवस्था जिससे काया की पूरी तरह से शुद्धि हो जाय और वह अपना काम ठीक तरह से करने लगे। २. वैद्यक में उक्त उद्देश्य से की जानेवाली कुछ विशिष्ट प्रकार की चिकित्सा, जिसमें वृद्ध शरीर मे भी फिर से नया यौवन या नई शक्ति आ जाती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायापलट  : पुं० [हिं० काया+पलटना] १. आकार-प्रकार में होनेवाला बहुत बड़ा परिवर्तन या रूपांतरण। २. एक रूप या शरीर छोड़कर दूसरा रूप या शरीर धारण करना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायिक  : वि० [सं० काय+ठक्-इक] १. काया या शरीर में होने या उससे संबंध रखनेवाला। जैसे—कायिक अनुभाव या भाव, कायिक रोग। २. काया या शरीर के द्वारा किया जाने अथवा होनेवाला। जैसे—कायिक पाप या पुण्य। ३. काय या संघ से संबंध रखनेवाला (बौद्ध)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायिक-अनुभाव  : पुं० [कर्म० स०] १. दे० अनुभाव। २. दे० दे० ‘हाव’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायिका  : स्त्री० [सं० कायिक+टाप्] काय अर्थात् मूल-धन पर मिलने वाला ब्याज। सूद।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायिका-वृद्धि  : स्त्री० [ष० त०] प्राचीन भारत में वह व्यवस्था जिसमें किसी से लिए हुए ऋण का ब्याज चुकाने के लिए ऋणी व्यक्ति उसके बदले में महाजन के कुछ काम या तो स्वंय कर देता था या अपने पशुओं आदि से करा देता था (स्मृति)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायोढज  : पुं० [सं० काय-ऊढ, तृ० त० कायोढ़√जन् (पैदा करना)+ड] प्राजापत्य विवाह से उत्पन्न पुत्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कायोत्सर्ग  : पुं० [काय-उत्सर्ग, ब० स०] जैन शिल्प में अर्हत की वह खड़ी मूर्ति जो वीतराग अवस्था में हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारंड  : पुं० [सं०√रम् (कीड़ा)+ड, कु-रंड, कुप्रा० स०]=करंडव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारंडव  : पुं० [सं० कारण्ड√वा (गति)+क] बत्तख या हंस की जाति का एक पक्षी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारंधमी (मिन्)  : पुं० [सं० कार√ध्मा (बजाना)+इनि० पृषो० सिद्धि] रसायन की क्रिया के द्वारा लोहे या किसी धातु को सोना बनानेवाला कीमियागर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार  : पुं० [सं०√कृ (करना)+घञ्] १. कोई काम करने की क्रिया या भाव। जैसे—अंगीकार, उपकार, चमत्कार। २. पति। स्वामी। ३. पूजा की बलि। ४. बरफ से ढका हुआ पहाड़। ५. प्रयत्न। ६. किसी कार्य या व्रत का अनुष्ठान ७. बल। शक्ति। ८. संकल्प। ९. वध। हत्या। १॰. वर्णमाला के अक्षरों या वर्णों अथवा ध्वनियों का सूचक शब्द। जैसे—चीत्कार, फूत्कार। वि० करने, बनाने या रचनेवाला। जैसे—ग्रन्थकार, चर्मकार, स्वर्णकार। विशेष—इसी अर्थ में यह फारसी में भी ठीक इसी रूप में प्रयुक्त होता है। जैसे—जिनाकार, रजाकार। पुं० [सं० कार्य से फा०] १. काम। कार्य। जैसे—कारगुजारी, कारबार, कार्रवाई आदि। २. कठिन और परिश्रम साध्य काम। वि० [सं० कार से० फा०] करनेवाला। कर्त्ता। जैसे—काश्तकार, पेशकार। वि० [हिं० काला] काला। कृष्ण। उदाहरण—रावन पाय जो जिउ धरा दुवौ जगत महँ कार।—जायसी। पुं० अंधकार। अँधेरा। स्त्री० [अं०] किसी प्रकार की गाड़ी, विशेषतः मोटर गाड़ी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारक  : वि० [सं०√कृ+ण्वुल्-अक] [स्त्री० कारिका] १. एक शब्द जो यौगिक शब्दों के अन्त में लगकर ये अर्थ देता है-(क) करने वाला। जैसे—गुणकारक, हानिकारक। (ख) उत्पन्न करने या प्राप्त करानेवाला। जैसे—सुखकारक। २. आज-कल किसी के स्थान पर या किसी के प्रतिनिधि के रूप में काम करनेवाला (ऐंक्टिग) पुं० व्याकरण में संज्ञा और सर्वनाम शब्दों की वह स्थिति जो वाक्य में क्रिया के साथ उनका संबंध सूचित करती है। (केस) इसके ६ भेद कहे गये हैं-कर्त्ता, करण, संप्रदान, अपादान और अधिकरण। (देखें ये शब्द)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारक-दीपक  : पुं० [सं० मध्य० स०] साहित्य में दीपक अलंकार का एक भेद, जिसमें अनेक क्रियाओं के एक ही कारक होने का उल्लेख होता है। जैसे—बता अरी ! अब क्या करूँ रचूँ रात से रार। भय खाऊँ आँसू पियूँ मन मारूँ झख मार।—मैथिली शरण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारक-हेतु  : पुं० [कर्म० स०] न्याय में वह कारण या हेतु, जिससे कोई कार्य हुआ हो या होता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारकुन  : पुं० [फा०] १. किसी के प्रतिनिधि के रूप में काम करनेवाला। १. किसी की ओर से प्रबंध या व्यवस्था करनेवाला। कारिंदा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारखाना  : पुं० [फा०] १. वह स्थान, जहां कोई चीज बनाई या तैयार की जाती हो। २. वह इमारत या भवन, जिसमें यन्त्रों आदि की सहायता से किसी वस्तु का अधिक परिमाण में उत्पादन किया जाता हो। (फैक्टरी) जैसे—कपड़े या दियासलाई का कारखाना। ३. बराबर चलता या होता रहनेवाला काम। जैसे—दुनिया का यही कारखाना है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारखी  : स्त्री०=कालिख। उदाहरण—जानि जिय जोवो जो न लागै मुँह कारखी।—तुलसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारगर  : वि० [फा०] ठीक तरह से काम करके अपना गुण, प्रभाव या फल दिखानेवाला। जैसे—दवा का कारगर होना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारगह  : पुं० =करघा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारगाह  : पुं० [फा०] १. कारीगरों मजदूरों आदि के बैठकर काम करने की जगह। कारखाना। २. वह स्थान जहाँ जुलाहे बैठकर कपड़े बुनने आदि का काम करते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारगुजार  : वि० [फा०] [स्त्री० कारगुजारी] हर काम अच्छी तरह से पूरा कर दिखानेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारगुजारी  : स्त्री० [फा०] १. वह स्थिति जिसमें कोई कठिन काम बहुत अच्छी तरह पूरा किया गया हो। कर्मठता। कर्मण्यता। २. उक्त प्रकार से किया हुआ कोई कठिन या बड़ा काम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारचोब  : पुं० [फा०] [वि० संज्ञा, कारचोबी] १. लकड़ी का वह चौकठा, जिस पर कपड़ा फैलाकर कसीदे, जरदोजी आदि का काम किया जाता है। अड्डा। २. उक्त प्रकार के चौखटे पर तैयार होनेवाला काम। ३. उक्त प्रकार का काम करनेवाला कारीगर। जरदोज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारचोबी  : वि० [फा०] १. (कपड़ा) जिस पर कारचोब का काम हुआ हो। २. जिस पर सलमे-सितारे के बेल-बूटे बने हों। ३. कारचोब संबंधी। स्त्री० कारचोब का काम। सलमे सितारे आदि के बनाये हुए बेल-बूटे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारज  : पुं० [सं० कार्य़] काम। कार्य।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारजी  : वि० [हिं० कारज] १. किसी काम में लगा रहनेवाला। २. किसी का कार्य करनेवाला। उदाहरण—ऐसे हैं ये स्वामि-कारजी तिनकौं मानत स्याम।—सूर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारटा  : पुं० [सं० करट] कौआ। काग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारटून  : पुं० [अं०] व्यंग्य-चित्र। (दे०)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारड  : पुं० =कार्ड।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारण  : पुं० [सं०√कृ+णिच्+ल्युट-अन] १. कोई ऐसी घटना, परिस्थिति या बात जो कोई परिणाम,प्रभाव या फल उत्पन्न करे। वजह। सबब। (काँज) जैसे—(क) धूएँ का कारण आग है। (ख) गरमी के कारण पौधे सूख गये हैं। २. वह उद्देश्य तथ्य या बात जिसे ध्यान में रखकर अथवा जिसके विचार से कोई काम किया जाय। हेतु। जैसे—आप अपने वहाँ जाने का कारण बतलायें। ३. आदि। मूल। जैसे—ईश्वर या ब्रह्म की इस सृष्टि का कारण है। ४. साधन। ५. काम। कार्य। ६. किसी को कष्ट पहुँचाने के उद्देश्य से किया जानेवाला तांत्रिक उपचार। जैसे—लड़के पर किसी ने कुछ कारण कर दिया है ७. पूजन आदि के उपरांत किया जानेवाला मद्यपान। (तंत्र) ८. प्रयाण। ९. एक प्रकार का गीत। १॰. शिव। ११. विष्णु।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारण-माला  : स्त्री० [ष० त०] १. कारणों या हेतुओं की श्रंखला। २. साहित्य में एक अलंकार जिसमें पदार्थों का वर्णन कारण और कार्य की परम्परा के रूप में होता है। क्रमशः पहले का कथन बाद के कथन का कारण बनता जाता है अथवा उत्तरोत्तर के कथन पूर्व-पूर्व कथित पदार्थों के कारण होते हैं। जैसे—बिनु विश्वास भगति नहिं, तेहि बिनु द्रवहिं न राम। राम कृपा बिनु सपनेहुँ, जीवन लह विश्राम।—तुलसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारण-शरीर  : पुं० [कर्म० स०] वेदांत के अनुसार चित्त, अहंकार और जीवात्मा के योग से बना हुआ सूक्ष्म शरीर, जो स्थूल शरीर के अन्दर रहता है। यह इंद्रियों की विषय-वासना आदि से निर्लिप्त रहता या रहित होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारणा  : स्त्री० [सं० कृ (हिंसा)+णिच्+युच्-अन+टाप्] १. कष्ट। पीड़ा। २. यम-यातना। ३. उत्तेजना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारणिक  : पुं० [सं० कारण+ठक्-इक] १. वह जो किसी विषय की परीक्षा या विचार करता हो। २. विधिक क्षेत्र में प्रार्थना-पत्र आदि लिखनेवाला लिपिक। वि० १. कारण-संबंधी २. कारण के रूप में घटने या होनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारणिकता  : स्त्री० [सं० कारणिक+तल्-टाप्] १. कारण या कारणिक होने की अवस्था या भाव। २. कार्य के साथ कारण का रहनेवाला संबंध। (कॉजैलिटी)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारणोपाधि  : पुं० [सं० कारण-उपाधि, ब० स०] ईश्वर। (वेदातं)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारतूस  : पुं० [पुर्त्त० कारटूश] बंदूक, रिवाल्वर आदि में रखकर चलाई जानेवाली धातु,द फ्ती आदि की बनी हुई खोली जिसमें धातु की गोली और बारूद भरा होता है। (कारट्रिज।)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारन  : अव्य० [सं० कारण] लिए। वास्ते। उदाहरण—कामरूप केहि कारन आवा।—तुलसी। पुं० =कारण। वि० करनेवाला। (यौ० के अन्त में) जैसे—हितकारन। पुं० [सं० कारुण्य] करुण स्वर।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारनामा  : पुं० [सं० कारनामः] १. किया हुआ कोई अच्छा और बड़ा काम। २. किसी के किये हुए बड़े-बड़े कामों का उल्लेख या लिखित विवरण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारनिस  : स्त्री० [अं०] दीवार के ऊपरी भाग में सुन्दरता के लिए बाहर की ओर निकाला हुआ थोड़ा-सा अंश। कँगनी। कगर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारनी  : पुं० [सं० कारण] वह जो कुछ करे या करावे। किसी काम का कर्त्ता। वि० १. कारण के रूप में होने या प्रेरणा करनेवाला। प्रेरक। २. भेद करनेवाला। भेदक। ३. बुद्धि पलटनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार-परदाज  : पुं० [फा०] [भाव० कारपरदाजी] १. किसी की ओर से उसका प्रतिनिधि बनकर काम करनेवाला। कारिंदा। २. प्रबंधकर्त्ता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारपरदाजी  : स्त्री० [फा०] १. कारपरदाज होने की अवस्था, पद या भाव। २. कार्य-पटुता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारबन  : पुं० [अं०] रसायन शास्त्र में एक अघात्वीय तत्त्व जो भौतिक सृष्टि के मूल तत्त्वों में से एक है और जो कारबोनिक एसिड गैस, कोयले हीरे आदि में पाया जाता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारबार  : पुं० [फा०] १. काम-काज। २. व्यवसाय। रोजगार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारबारी  : वि० [फा०] कार-बार संबंधी। जैसे—कार-बारी बातचीत। पुं० १. कार-बार या व्यवसाय करनेवाला। व्यवसायी। २. कारिंदा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारभ  : वि० [सं० करभ+अण्] करभ अर्थात् ऊँट-संबंधी। करभ का।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारमन  : पुं० =कार्मण।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारयिता (तृ)  : पुं० [सं० कृ+णिच्+तृच्] [स्त्री० कारयित्री] १. कर्त्ता। २. बनाने, रचने या सृष्टि करनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काररवाई  : स्त्री० [फा०] १. किसी कार्य के संपादन करने के समय होनेवाली आवश्यक क्रियाएँ। जैसे—अदालती काररवाई, जलसे की काररवाई। २. किसी सभा, संस्था आदि के कार्यों का अभिलेख या विवरण। जैसे—पिछली बैठक की काररवाई पढ़कर सुनाई जाय। ३. अनुमति या गुप्त रूप से चली हुई चाल या किया हुआ प्रयत्न। जैसे—यह सब उन्हीं की काररवाई है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारवाँ  : पुं० [फा०] पैदल यात्रियों का समूह। काफिला। (दे०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारवेल्ल  : पुं० [सं० ] करेला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारसाज  : वि० [फा०] [संज्ञा कारसाजी] १. सब काम ठीक प्रकार से पूरा करनेवाला। अच्छे ढंग या युक्ति से काम करनेवाला। २. बिगड़ा हुआ काम बनाने या सँवारनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारसाजी  : स्त्री० [फा०] १. कारसाज होने या काम पूरा उतारने की क्रिया या भाव। २. किसी को हानि पहुँचाने के लिए गुप्त रूप से किया हुआ चालबाजी का कोई काम या युक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारस्तानी  : स्त्री० दे० ‘कारस्तानी’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारा  : स्त्री० [सं०√कृ (विक्षेप)+अङ्, गुण, दीर्घ (नि०)] १. बंधन। २. वह स्थान जहाँ शासन द्वारा दंडित अपराधियों को बंदी बनाकर रखा जाता है। कारागार। कारागृह। (जेल)। स्त्री० दूती। वि० काला। वि० [हिं० आकार] आकार या रूपवाला। जैसे—नाना बाहन नाना कारा।—तुलसी।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारागार  : पुं० [कारा-आगार, कर्म० स०] जेलखाना। बंदीगृह।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारागारिक  : वि० [सं० कारागार+क-इक] कारागार संबंधी। पु० वह व्यक्ति जो कारागार संबंधी सब व्यवस्थाएँ करता हो। कारागार का प्रधान अधिकारी (जेलर)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारा-गृह  : पुं० [कर्म० स०] कारागार। जेलखाना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारा-दंड  : पुं० [ष० त०] वह दंड जो किसी को कारागार में बन्द रखने के रूप में दिया जाय। कैद की सजा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारा-पथ  : पुं० [ब० स०] एक प्राचीन देश जो वाल्मीकि के अनुसार लक्ष्मण के पुत्र अंगद और चित्रकेतु के अधिकार में था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारापाल  : पुं० [सं० कारा√पाल् (पालन करना)+णिच्+अण्] कारागार का प्रधान अधिकारी। जेलर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काराबंदी  : पुं० [सं० काराबंद्ध] वह अपराधी जिसे कारगार में बन्द किया गया हो। कैदी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारा-रुद्ध  : पुं० [स० त०] जो कारागार में बन्द किया गया हो। (इंप्रिजंड)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारा-रोधन  : पुं० [स० त०] १. कारागार में बन्द करने या होने की क्रिया या भाव। २. कैद की सजा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारा-वास  : पुं० [स० त०] कारा या कारागार में रहने की अवस्था, दंड या भाव। (इंप्रिजनमेंट)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारिंदा  : पुं० [फा० कारिंदः] [भाव० कारिंदगरी] १. कर्मचारी। २. वह व्यक्ति जो किसी के प्रतिनिधि के रूप में उसका काम करता या देखता-भालता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारिक  : पुं० [देश] करघे की वह लकड़ी जो ताने को सँभाले रहती है। खरकूत।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारिका  : स्त्री० [सं०√कृ (करना)+ण्वुल्-अक, टाप्, इत्व] १. नाचनेवाली स्त्री। नर्तकी। २. व्यवसाय। व्यापार। ३. संस्कृत साहित्य में वह श्लोक जिसमें बहुत सी बातों, नियमों आदि को सूत्र रूप में कहा गया हो। ४. एक प्रकार का संकीर्ण राग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारिख  : स्त्री० १. =कालिख। २. =काजल।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारिणी  : वि० स्त्री० [सं० कारिन्+ङीष्] करनेवाली। जैसे—प्रबंधकारिणी समिति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारित  : वि० [सं० कृ+णिच्+क्त] किसी के द्वारा कराया हुआ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारिता  : पुं० [सं० कारित+टाप्] ब्याज की वह दर जो उचित या विधिक दर से अधिक हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारिस्तानी  : स्त्री० [सं० कारस्तानी] १. कार्रवाई। २. परोक्ष रूप से या छिपकर की हुई कोई चालबाजी या युक्ति। ३. अनुचित काम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारी (रिन्)  : वि० [सं०√कृ+णिनि] [स्त्री० कारिणी] (शब्दों के अन्त में) १. करनेवाला। जैसे—विनाशकारी। २. अनुसरण या पालन करनेवाला। जैसे—आज्ञाकारी। स्त्री० कोई काम करने की क्रिया या भाव। जैसे—चित्रकारी। वि० [फा०] १. अपना प्रभाव या फल दिखलानेवाला। गुणकारी। २. घातक या मर्मभेदी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारीगर  : पुं० [फा०] [संज्ञा० कारीगरी] वह जो छोटे-मोटे उपकरणों की सहायता से कोई कलापूर्ण कृति तैयार करता हो। शिल्पकार। जैसे—बढ़ई, लोहार, सोनार आदि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारीगरी  : स्त्री० [फा०] १. कारीगर होने की अवस्था या भाव। २. कारीगर का वह गुण,सूझ या शक्ति, जिससे किसी कृति में जान आती हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारीष  : पुं० [सं० करीष+अण्] गोबर का ढेर। वि० १. गोबर संबंधी। २. गोबर से बनने या होनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारु  : पुं० [सं०√कृ+उण्] १. कारीगर। शिल्पी। २. जुलाहा। बुनकर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारुक  : पुं० [कारू+कन्] दे० ‘कारु’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारुज  : पुं० [सं० कारु√जन् (उत्पन्न होना)+ड] १. कारीगर की बनाई कोई कृति या वस्तु। २. शरीर के तिल आदि। ३. [क-आ√रूज् (भंग)+क] हाथी का बच्चा। ४. गेरू। ५. वाल्मकि। ६. फेन।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारुणिक  : वि० [सं० करुणा+ठक्-इक] १. करुणा से युक्त। २. जिसे देखकर मन में करुणा उत्पन्न होती हो। जैसे—कारुणिक दृश्य। ३. (व्यक्ति) जिसमें करुणा हो। दयार्द्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारुण्य  : पुं० [सं० करुण+ष्यञ्] करुण होने की अवस्था या भाव। करुणा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारुनीक  : वि०=कारुणिक।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारुपथ  : पुं० =कारापथ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारूँ  : पुं० [अ०] १. मुसलमानी कथाओं के अनुसार हजरत मूसा का चचेरा भाई जो बहुत संपत्तिशाली होते हुए भी परम कृपण था। पद—कारूँ का खजाना=अनंत संपत्ति। २. ऐसा व्यक्ति जो धनी होते हुए भी बहुत कृपण हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारूती  : स्त्री० [अ०] एक प्रकार का मलहम जो हकीम लोग बनाते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारूनी  : स्त्री० [?] घोड़ों की एक जाति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारूरा  : पुं० [अ० कारूरः] १. फुँकनी, शीशी जिसमें रोगी का मूत्र चिकित्सक को दिखाने के लिए रखा जाता है। २. रोगी का मूत्र या पेशाब, जो उक्त शीशी में भरकर चिकित्सक को दिखाया जाता है। ३. पेशाब। मूत्र। ४. शत्रु पर फेंकी जानेवाली बारूद की कुप्पी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारूप  : वि० [सं० करूष+अण्] करूष देश-संबंधी। करूष देश का। पुं० करूष देश का निवासी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारोंछ  : स्त्री०=कलौंछ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारो  : वि०=काला।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कारोबार  : पुं० =कारबार (व्यवसाय)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्कश्य  : पुं० [सं० कर्कश+ष्यञ्]=कर्कशता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्ज  : पुं० =कार्य।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्ड  : पुं० [अं०] मोटे कागज या दफ्ती का कोई टुकड़ा, विशेषतः चौकोर टुकड़ा। जैसे—ताश या निमन्त्रण का कार्ड, पोस्टकार्ड आदि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्ण  : वि० [सं० कर्ण+अण्] कर्ण या कान संबंधी। पुं० कान में पहना जानेवाला आभूषण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्तयुग  : वि० [सं० कृतयुग+अण्]कृतयुग से संबंध रखनेवाला। पुं० [कृत+अण्, कार्त-युग, कर्म० स०] सत्ययुग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्तवीर्य  : पुं० [सं० कृतवीर्य+अण्] माहिष्मती के राजा कृतवीर्य का पुत्र सहस्रार्जुन, जिसे परशुराम ने मारा था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्तिक  : पुं० [सं० कृत्तिका+अण्] १. चांद्र संवत् का आठवाँ और सौर संवत् का सातवाँ महीना जो क्वार के बाद और अगहन के पहले पड़ता है। २. वह संवत्सर जिसमें बृहस्पति कृत्तिका तथा रोहिणी नक्षत्र में हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्तिकी  : स्त्री० [सं० कार्तिक+ङीष्] कार्तिक मास की पूर्णिमा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्तिकेय  : पुं० [सं० कृत्तिका+ढक्-एय] कृत्तिका नक्षत्र में उत्पन्न होने वाले शिव तथा पार्वती के पुत्र स्कंद, जो युद्ध के देवता माने जाते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्दम  : वि० [सं० कर्दम+अण्] १. कर्दम या कीचड़ संबंधी। कर्दम का। २. कर्दम या कीचड़ से युक्त। ३. गंदा। मैला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्पट  : पुं० [सं० कर्पट+अण्] १. वह जिसने फटे-पुराने वस्त्र पहने हों। २. भिखमंगा। ३. याचना करनेवाला व्यक्ति। याची।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्पटिक  : पुं० [सं० कर्पट+ठक्-इक] १. यात्री। २. यात्रियों का समूह। ३. गंगा आदि नदियों का जल लाकर जीविका चलानेवाला व्यक्ति। ४. अनुभवी व्यक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्पण्य  : पुं० [सं० कृपण+ष्यञ्]=कृपणता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्पास  : वि० [सं० कर्पास+अण्] १. कपास या रूई का बना हुआ। २. कपास संबंधी। पुं० सूती कपड़ा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्पासिक  : वि० [सं० कर्पास+ठक्-इक]=कार्पास।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्म  : वि० [सं० कर्मन्+ण] १. कर्म-संबंधी। कर्म का। २. कर्म के रूप में संपन्न होनेवाला। जैसे—कार्मभार=उतना भार जितना कार्य रूप में ढोया जाय या ढोया जा सके। ३. कर्म करनेवाला। कर्मशील। ४. उद्योगी। मेहनती। वि० [सं० कृमि से] कृमि संबंधी। कीड़ों का।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्मण  : पुं० [सं० कार्मण+अण्] ऐसे कर्म जिनमें मंत्र-तंत्र आदि से मारण, मोहन वशीकरण आदि प्रयोग किये जाते हैं। वि० कार्य-कुशल। दक्ष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्मण्य  : पुं० [सं० कर्मन्+ष्यञ्]=कर्मण्यता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्मना  : पुं० [सं० कार्मण] मंत्र-तंत्र के मारण मोहन, आदि प्रयोग कृत्या।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्मिक  : पुं० [सं० कर्मन्+ठक्-इक] वह वस्त्र जिसकी बुनावट में ही शंख, चक्र स्वस्तिक आदि के चिन्ह बनाये गये हों। २. कर्म या कार्य करनेवाला व्यक्ति। वि० जो कर्म या कार्य में लगा हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्मिक-संघ  : पुं० [ष० त०] काम करनेवालों अर्थात् कर्मचारियों मजदूरों आदि का संघ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्मुक  : वि० [सं० कर्मन्+उकञ्] बाँस या लकड़ी का बना हुआ। पुं० १. धनुष। २. इन्द्रधनुष। ३. रूई धुनने की धुनकी। ४. धनुराशि। ५. परिधि का कोई भाग। चाप। योगसाधना में एक प्रकार का आसन। ७. एक प्रकार का शहद। ८. बाँस।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य  : पुं० [सं०√कृ+ण्यत्] १. वह जो कुछ किया गया हो या किया जाय। (वर्क) २. किसी उद्देश्य की सिद्धि के लिए किया जानेवाला प्रयत्न। ३. जीविका, व्यवसाय सेवा आदि के विचार से किया जानेवाला काम (विशेष दे काम) ४. कर्त्तव्य। ५. परिणाम या फल। ६. नाटक का प्रधान प्रयोजन या साध्य। ७. नाटक की पाँच अर्थ प्रकृतियों में से अंतिम अर्थ प्रकृति, जिसकी पाँच अवस्थाएँ होती हैं और जो मुख्य कथावस्तु तथा नाटक की लक्ष्य-सिद्धि का विकास क्रमशः प्रकट करती हैं। ८. पाश्चात्य नाट्यसिद्धांतों के अनुसार किसी नाटक की घटनाओं की श्रंखला। ९. धन के लेन-देन का झगड़ा या विवाद। दीवानी मुकदमा। १॰. ज्योतिष में जन्म लग्न से दसवाँ स्थान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-कर्त्ता (र्तृ)  : पुं० [ष० त०] १. काम करनेवाला व्यक्ति। २. कर्मचारी। ३. किसी संस्था, सभा आदि का प्रबन्ध-अधिकारी। ४. किसी कार्य में विशेष रूप में अग्रसर होकर काम करनेवाला व्यक्ति। जैसे—सामाजिक कार्य-कर्त्ता।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-कारण-भाव  : पुं० [कार्य-कारण, द्व० स० कार्य-कारण-भाव, ष० त०] वह भाव या संबंध जो कारण का कार्य से और कार्य का कारण से होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यकारी (रिन्)  : वि० [सं० कार्य√कृ+णिनि] १. विशेष रूप से कोई काम करनेवाला। २. किसी के स्थान पर अस्थायी रूप से काम करनेवाला अधिकारी। ३. दे० ‘कार्यकर्त्ता’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-कुशल  : वि० [स० त०] (व्यक्ति) जो कोई कार्य सुचारू रूप से तथा अपेक्षया कम समय में और कौशलपूर्वक पूरा करता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-क्रम  : पुं० [ष० त०] १. किसी उत्सव, समारोह आदि की कार्यवाहियों की पहले से तैयार की हुई क्रमिक सूची। २. उक्त प्रकार की सूची के अनुसार होनेवाला कोई कार्य। ३. मनोरंजन या मनोविनोद के लिए होनेवाला कोई कार्य। (प्रोग्राम, उक्त सभी अर्थों में)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-क्षम  : वि० [स० त०] जो कोई कार्य करने अथवा उत्तरदायित्व निभाने के लिए उपयुक्त योग्य तथा समर्थ हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यक्षमता  : स्त्री० [सं० कार्यक्षम+तल्-टाप्] कार्यक्षम होने की अवस्था, गुण या भाव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-चिंतक  : पुं० [ष० त०] प्राचीन भारत में वह अधिकारी जो स्थानीय प्रबंध करता था। (स्मृति)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यतः  : क्रि० वि० [सं० कार्य+तस्] क्रियात्मक ढंग से। कार्य रूप में।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-दर्शन  : पुं० [ष० त०] अपने अथवा औरों के लिए हुए कामों को इस दृष्टि से देखना कि वे ठीक हुए हैं या नहीं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-दर्शी (र्शिन्)  : पुं० [सं० कार्य√दृश् (देखना)+णिनि] वह व्यक्ति जो दूसरों के कार्यों का अवलोकन, निरीक्षण या मूल्यांकन करता हो। दूसरों का काम अच्छी तरह देखनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-दिवस  : पुं० [ष० त०] १. काम करने का दिन, अर्थात् ऐसा दिन जो छुट्टी का न हो। २. उक्त दिन का उतना भाग (या समय) जिसमें (या जितने समय तक) किसी कर्मचारी या सेवक को नियोक्ता का काम करना पड़ता है और जिसकी गिनती एक पूरे दिन में होती है। (वर्किंग डे)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-पंचक  : पुं० [ष० त०] ईश्वर के ये पाँच काम-अनुग्रह, तिरोभाव, आदान, स्थिति और उद्भव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-परिषद्  : स्त्री० [ष० त०] वह परिषद् जो किसी कार्य की व्यवस्था संचालन आदि करती हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-पालिका  : स्त्री० [ष० त०] शासन का वह विभाग जो संसद् द्वारा पारित विधियों को कार्य-रूप में बलवत् करता तथा उनका निष्पादन करता हो। (एक्जिक्यूटिव)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-प्रणाली  : स्त्री० [ष० त०] कोई कार्य करने का मान्य, स्वीकृत अथवा रूढ़िगत ढंग या प्रणाली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-भार  : पुं० [ष० त०] किसी कार्य या पद का उत्तरदायित्व। किसी कार्य के निर्वाह तथा संचालन की पूरी जिम्मेदारी (चार्ज)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-भारी (रिन्)  : पुं० [सं० कार्यभार+इनि] वह व्यक्ति जिसने अपने ऊपर किसी कार्य, पद आदि के निर्वाह तथा संचालन की पूरी जिम्मेदारी या भार लिया हो। (इनचार्ज)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यवाही (हिन्)  : वि० [सं० कार्य√वह् (वहन करना)+णइच्+णिनि] कार्य या पद का भार वहन करनेवाला। स्त्री०=कार्रवाई।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-विवरण  : पुं० [ष० त०] सभा, समिति आदि में जो कार्य हो चुके हों, उनका लेखा या विवरण। (प्रोसीडिंग्स)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-सम  : पुं० [स० त०] तर्क में ऐसी मिथ्या आपत्ति या कुतर्क, जिसमें इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता है कि ऐसा प्रभाव या फल असम या विषम परिस्थियों में भी उत्पन्न हो सकता है। (न्याय-दर्शन में इसे चौबीस जातियों के अंतर्गत माना गया है)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-समिति  : स्त्री० [ष० त०] १. किसी कार्य-विशेष के निर्वाह या संचालन के लिए बनी हुई समिति। २. किसी संस्था या सभा की प्रबन्धकारिणी समिति। (वर्किंग कमेटी)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-सूची  : स्त्री० [ष० त०] १. किसी कार्य के निर्वाह के लिए उसके सब अंगों-उपांगो की क्रम से बनाई हुई सूची, जिसके अनुसार काम किया जाता हो। (एजेंड़ा)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-स्थगन-प्रस्ताव  : पुं० [ष० त०] किसी महत्त्वपूर्ण प्रश्न पर विचार करने के लिए विधान सभा में रखा जानेवाला वह प्रस्ताव, जिसमें सदस्यों से प्रार्थना की जाती है कि अन्य कार्य छोड़कर पहले इसी आवश्यक विषय पर विचार किया जाय। (एडजर्नमेंट मोशन)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्य-हेतु  : पुं० [ष० त०] १. वह मूल उद्देश्य जिससे प्रेरित होकर कोई काम किया जाय। २. वह कारण या हेतु जिससे कोई कार्य या व्यवहार (मुकदमा) न्यायालय के सामने विचार के लिए रखा जाय। (काँज आफ ऐक्शन)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्याकार्य  : पुं० [सं० कार्य-अकार्य, द्व० स०] अच्छे और बुरे सभी तरह के कार्य-कर्तव्य और अकर्तव्य सभी प्रकार के कर्म।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्याधिकारी (रिन्)  : पुं० [सं० कार्य-अधिकारी, ष० त०] वह अधिकारी जो किसी विशेष कार्य का निर्वाह और संचालन करता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्याधिप  : पुं० [सं० कार्य-अधिप, ष० त०] १. कार्य निरीक्षक। २. प्रश्न का निर्णायक ग्रह (ज्यौं०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्याध्यक्ष  : पुं० [सं० कार्य-अध्यक्ष, स० त०] किसी कार्य या विभाग का प्रधान अधिकारी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यान्वित  : वि० [सं० कार्य-अन्वित, तृ० त०] कार्य रूप में अर्थात् व्यवहार में लाया हुआ। किया हुआ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यार्थी (र्थिन्)  : वि० [सं० कार्य√अर्थ+णिनि] १. कार्य की सिद्धि चाहनेवाला। २. प्रार्थना या विनती करनेवाला। ३. नियुक्ति के लिए आवेदन करनेवाला। ४. मुकदमें की पैरवी करनेवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यालय  : पुं० [सं० कार्य-आलय, ष० त०] वह भवन या स्थान जहाँ व्यावसायिक, शासनिक, साहित्यिक आदि कार्य होते हों तथा जहाँ उक्त कार्यों के निर्वाह के लिए कुछ लोग नियमित रूप से काम करते हों। दफ्तर। (आफिस)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यावली  : स्त्री० [सं० कार्य-अवली, ष० त०] उन कार्यों की सूची जो किसी सभा-समिति में किसी एक दिन अथवा किसी एक अधिवेशन या बैठक में विचारार्थ रखे जाने को हों। कार्य-सूची। (एजेंडा)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्यी (यिन्)  : वि० [सं० कार्य+इनि] कार्यार्थी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्येक्षण  : पुं० [सं० कार्य-ईक्षण, ष० त०] दूसरों के किये हुए कामों का निरीक्षण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्रवाई  : स्त्री०=काररवाई।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्ष  : पुं० [सं० कृषि+ण] कृषक। खेतिहर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्षक  : पुं० [सं० कार्ष+कन् या√कृष्+क्वुन्-अक, वृद्धि]=कार्य।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्षापण  : पुं० [सं० कार्य आपण, ष० त० या ब० स०] एक प्रकार का पुराना सिक्का जो पहले ताँबे का बनता था, पर आगे चलकर चांदी और सोने का भी बनने लगा था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्षिक  : पुं० [सं० कर्ष+ठञ्-इक]=कार्षापण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्ष्ण  : वि० [सं० कृष्ण+अण्] १. कृष्ण-संबंधी। कृष्ण का। २. कृष्ण द्वैपायन-संबंधी। ३. कृष्ण मृग-संबंधी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्ष्णायन  : पुं० [सं० कृष्ण+फक्-आयन०] १. व्यासवंशीय ब्राह्मण। २. वसिष्ठ गोत्र का ब्राह्मण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कार्ष्णि  : पुं० [सं० कृष्ण+ष्यञ्] १. कृष्ण का पुत्र, प्रद्युम्न। २. कामदेव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्णर्य  : पुं० [सं० कृष्ण+ष्यञ्०] कृष्णता। कालापन।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालंजर  : पुं० [सं० काल√जृ (जीर्ण होना)+णिच्+अच्, मुम्] कालिंजर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल  : पुं० [सं०√कल् (गिनना)+णिच्+अच्+अण् (कृष्ण वर्ण या तद्विशिष्ट के अर्थ में) कु√ला (लेना)+क, कु=का] १. दो क्रियाओं, घटनाओं आदि के बीच का अवकाश जिसकी गणना वर्ष, मास, दिन, रात, घड़ी पल आदि के रूप में की जाती है। समय। (टाइम)। मुहावरा—काल-गूदड़ी सीना=समय बिताना। उदाहरण—तुम्हरे रुख फेरे करुणानिधि काल गुदरियाँ सीएँ।—सूर। पद—काल पाकर=कुछ समय बीतने पर। कुछ दिनों बाद। २. काल की कोई निश्चित अवधि मान या बिन्दु। जैसे—उदयकाल, जन्म-काल, शासन काल। ३. काल या समय की कोई ऐसी अवधि जो किसी घटना की सूचक या उसके लगभग हो। जैसे—प्रातःकाल, सायंकाल। ४. किसी काम या बात के लिए उपयुक्त अवसर या निश्चित समय। ५. वह अवधि जिसके बीतने के समय किसी बात का अन्त या समाप्ति होती है, अथवा कोई नई घटना घटित होती है। जैसे—काल सब को खा जाता है। ६. उक्त के आधार पर किसी के अन्त या विनाश का समय। ७. प्राणियों के संबंध में उनका अंत या मृत्यु। मौत। जैसे—उसका काल आ गया था इसी से उसकी मृत्यु हो गई। ८. मृत्यु के देवता, यमराज। मुहावरा—(किसी का) काल के गाल में जाना=मर जाना। मौत आना। (किसी के) सिर पर काल नाचना=मृत्यु या विनाश की निकटता। ९. शिव या महाकाल। १॰. काला नाग जिसके काटने से मृत्यु अवशंयभावी होती है। ११. व्याकरण में क्रियाओं के रूपों से सूचित होनेवाला वह तत्त्व जिसे पता चलता है कि अमुक घटना या बात किस समय से संबंध रखती है, अर्थात् हो चुकी है हो रही है या अभी होने को है। विशेष—इसी आधार पर इसके, भूत, वर्तमान और भविष्य ये तीन विभाग किये गये हैं। १२. ज्योतिष में एक योग जो यात्रा आदि कार्यों के लिए अशुभ गया है। १३. शनिदेवता। १४. लोहा। वि० [सं०] १. काला। कृष्ण। २. घोर। विकट। उदाहरण—है मैंने भी रो-रोकर काटी वियोग की काल रात्रि। भगवतीचरण वर्मा। ३. बहुत बड़ा। जैसे—काल जुआरी। पुं० अकाल (दुर्भिक्ष) क्रि० वि०=कल। (आनेवाला अथवा बीता हुआ दिन)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-कंठ  : पुं० [ब० स०] १. शिव। महादेव। २. मोर। मयूर। ३. नीलकंठ पक्षी। ४. खंजन।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालक  : पुं० [सं०√कल् (प्रेरणा)+णिच्+थवुल्-अक] १. तैतीस प्रकार के केतुओं में से एक। २. आँख की पुतली। ३. पानी का साँप। डेड़हा। ४. पूर्वी भारत का एक प्राचीन देश। ५. यकृत। जिगर। ६. बीजगणित में दूसरी अव्यक्त राशि। वि० काले रंग का। काला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-कवलित  : वि० [तृ० त०] जो काल का ग्रास बना हो, अर्थात् मृत। मरा हुआ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-कवि  : पुं० [कर्म० स०] अग्नि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालका  : स्त्री० [सं० काल+क, टाप्०] दक्ष प्रजापति की एक कन्या जिसका विवाह कश्यप से हुआ था और जिससे नरक तथा कालक नाम के दो पुत्र उत्पन्न हुए थे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालकूट  : पुं० [सं० काल-कूट, उपमित स० अथवा० काल√कूट् (उपताप)+अण्] १. समुद्र मन्थन के समय निकला हुआ परम भीषण विष जिसे शिवजी ने पान किया था। २. भीषण विष। बहुत तेज जहर। ३. एक प्रकार का बहुत भीषण वानस्पतिक विष। काल। बछनाग। ४. सींगिया की जाति का एक पौधा जिसकी जड़ विषाक्त होती है। ५. उत्तर भारत के एक पर्वत का नाम। ६. इस पर्वत के आस-पास का प्रदेश, जिसमें आजकल के देहरादून और कालसी नामक स्थान है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-केतु  : पुं० [उपमित० स०] पुराणानुसार एक राक्षस का नाम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालकोठरी  : स्त्री० [हिं० काल+कोठरी] १. जेलखाने की वह बहुत छोटी और अँधेरी कोठरी जिसमें भीषण अपराध करनेवाले कैदी रखे जाते हैं। (सालिटरी सेल) २. बहुत ही अँधेरी और तंग जगह।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-क्रम  : पुं० [सं० ष० त०] कार्यों, घटनाओं, तथ्यों आदि का वह क्रम जो उनके क्रमात् घटित होने के विचार से लगाया जाता है। (क्रोनालॉजी)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालक्रमिक  : वि० [सं० कालक्रम+ठक्-इक] (कार्यों घटनाओं आदि की सूची) जो कालक्रम के विचार से प्रस्तुत हो। २. काल-क्रम-संबंधी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-क्षेप  : पुं० [ष० त०] काल या समय बिताना। दिन काटना या गुजारना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-खंड  : पुं० [ष० त०] १. काल का कोई विभाग। अवधि। २. परमेश्वर। उदाहरण—मानो कीन्हीं काल ही की कालखंड खंडना।—केशव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-गंगा  : स्त्री० [कर्म० स०] १. यमुना नदी, जिसके जल का रंग काला हो। कालिन्दी। २. लंका की एक नदी का नाम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-गंडैत  : पुं० [हिं० काला-गंडा] वह विषधर साँप जिसके शरीर पर काले गंडे या चित्तियाँ बनी होती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-चक्र  : पुं० [ष० त०] समय का बराबर पलटते या बदलते रहना जो एक चक्र या पहिये के घूमने के समान माना गया है। २. काल का उतना अंश जितना एक उत्सर्पिणी और आवश्यकता में लगता है। (जैन) ३. एक प्रकार का प्राचीन अस्त्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालचक्रयान  : पुं० [सं० ] एक बौद्ध संप्रदाय जिसे कुछ विद्वान वज्ज्रयान का एक भेद मानते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालज्ञ  : पुं० [सं० काल√ज्ञा (जानना)+क] १. वह व्यक्ति जिसे भूत, वर्तमान तथा भविष्य तीनों का ज्ञान हों। २. ज्योतिषी। ३. वह जो समय की गति, स्थिति आदि ठीक तरह से पहचानता हो। ४. मुर्गा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-ज्ञान  : पुं० [ष० त०] समय की गति, स्थिति आदि की जानकारी और पहचान। समय-कुसमय की पहचान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-ज्वर  : पुं० [उपमित० स०] एक प्रकार का घातक ज्वर, जो मरुमक्षिकाओं के काटने से होता है। और जिसमें प्लीहा तथा यकृत की वृद्धि, रक्ताल्पता, जलोदर, रक्त-स्राव आदि होते हैं। काला अजार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-तुष्टि  : स्त्री० [ष० त०] सांख्य के अनुसार मनुष्य को उपयुक्त या नियत समय आने पर मिलने या होनेवाली संतुष्टि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-दंड  : पुं० [ष० त०] यमराज का दंड।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-दर्श  : पुं० [सं० कालादर्श] काल-गणना की वह प्रणाली जिसके अनुसार वर्ष, मास आदि का परिमाण या विस्तार निश्चित होता है। (कैंलेंडर) जैसे—अरबी, भारतीय या रोमन कालदर्श।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-धर्म  : पुं० [ष० त०] १. मृत्यु। २. अवसान। विनाश। ३. समय के अनुसार घटनाओं के घटित होने का प्राकृतिक या स्वाभाविक गुण या धर्म। जैसे—बरसात के दिनों में वर्षा होना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-नाथ  : पुं० [ष० त०] १. महादेव। शिव। २. काल-भैरव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-निर्यास  : पुं० [कर्म० स०] गुग्गुल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-निशा  : स्त्री० [कर्म० स०] १. अँधेरी और भयावनी रात। २. कार्तिकी अमावस्या की रात्रि। दिवाली की रात।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-नेमि  : पुं० [उपमि० स०] १. एक राक्षस जो रावण का मामा था और जिसने हनुमान जी को उस समय छलना चाहा था जब वे संजीवनी लाने जा रहे थे। २. एक पौराणिक दानव जिसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था और जो अन्त में विष्णु के हाथों मारा गया था। (कहते हैं कि यह अपना शरीर चार भागों में बाँटकर हर शरीर से अलग-अलग काम करता था)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालपट्टी  : स्त्री० [पुर्त० कोलाफटी] जहाज की दरार या संधि भरने के लिए उसमें सन आदि ठूसने का काम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालपर्णी  : स्त्री० [काल-पर्ण, ब० स० ङीष्] काली तुलसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-पाश  : पुं० [ष० त०] १. समय का बन्धन। २. समय का वह नियंत्रण या बन्धन, जिसके अनुसार भूत-प्रेत कुछ समय तक किसी का कोई अनिष्ट नहीं कर सकते। ३. यमराज का पाश, बंधन या फंदा। यमपाश।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-पुरुष  : पुं० [उपमित० स०] १. समय का कल्पित मानवी रूप। २. ईश्वर का विराट् रूप। ३. मृत्यु के देवता। काल देवता। ४. लोहे की वह मूर्ति जो संकट टालने के लिए दान की जाती है। ५. आकाश का एक नक्षत्र-मंडल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-प्रमेह  : पुं० [कर्म० स०] प्रमेह का एक भेद, जिसमें रोगी को काली पेशाब होती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-फल  : पुं० [उपमित० स०] इंद्रायन या नारू, जिसे खाने से प्राणी मर जाता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालबंजर  : पुं० [सं० काल+हिं० बंजर] ऐसी परती जमीन जो बहुत दिनों से जोती बोई न गई हो, और फिर सहज में जोती बोई न जा सकती हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालबूत  : पुं० दे० ‘कलबूत’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-भैरव  : पुं० [ब० स०] १. शिव। २. शिव के मुख्य गणों में से एक गण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालम  : पुं० [अं०] स्तंभ (दे०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालमुख  : पुं० [सं०] एक प्राचीन शैव सम्प्रदाय जिसके अनुयायी शिव के नीलकंठ कृष्णवर्ण और मुण्डमालीधारी रूप की उपासना करते थे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-मेघ  : पुं० [कर्म० स०] एक पौधा जिसकी छाल और जड़ दवा के काम आती हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-मेह  : पुं० [ब० स०] एक उग्र तथा घातक विषम ज्वर जिसमें रोगी को प्रस्वेद, पैत्तिक वमन अतिसार आमाशय के ऊपरी भाग में पीड़ा आदि होती है। (ब्लैक वाँटर फीवर)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-यवन  : पुं० [उपमित० स०] पुराणानुसार एक यवन राजा जो कृष्ण और यादवों का घोर शत्रु था और जिसे कृष्ण ने छल से मुचकुंद के द्वारा जीते-जी भस्म करवा दिया था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-यापन  : पुं० [ष० त०] १. समय का काटना या बिताना। २. जानबूझ कर किसी काम में देर लगाना या विलम्ब करना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-युक्त  : पुं० [तृ० त०] साठ संवत्सरों में से बावनवाँ संवत्सर (हिन्दू पंचांग)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालर  : पुं० [अं०] १. पहनने के कपड़ों में वह पट्टीदार अंश जो गले के चारों ओर रहता है। २. पशुओं आदि के गले में बाँधने का पट्टा। पुं० दे० कल्लर। वि० दे० काला। उदाहरण—चाँच कटाऊँ पपइया रे ऊपरि कालर लूण।—मीराँ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-रात्रि  : स्त्री० [कर्म० स०] १. प्रलय की रात,जिसमें सारी सृष्टि नष्ट हो जाती है और जिसे ब्रह्मा की रात्रि भी कहते हैं। २. बहुत अंधेरी और भयावनी रात। ३. मृत्यु की रात। ४. दीवाली की रात। ५. दुर्गा की एक मूर्ति या रूप।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-वाचक  : वि० [ष० त०] समय सूचित करनेवाला। समय का प्रबोधक। जैसे—कालवाचक क्रिया-विशेषण अथवा विशेषण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालवाची (चिन्)  : वि० [सं० काल√वच् (बोलना)+णिनि]=काल-वाचक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-विपाक  : पुं० [ष० त०] १. किसी काम या बात की अवधि या समय पूरा होना अथवा उसके घटित होने का नियत समय आना। २. काल या नियति का वह विधान जो अपरिहार्य और अवश्यंभावी होता तथा अपने समय पर नियत काम करके रहता है। होनहार। होनी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-वृद्धि  : स्त्री० [तृ० त०] समय बीतने पर ब्याज या सूद का बहुत अधिक या इतना बढ़ जाना कि वह मूलधन के बराबर या उससे भी अधिक हो जाय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-वेला  : स्त्री० [ष० त०] १. शनिग्रह का भोग-काल, जो प्रायः घातक सिद्ध होता है। २. ज्योतिष में वह योग या समय जिसमें कोई धार्मिक या शुभ काम करना निषिद्ध होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-सर्प  : पुं० [कर्म० स०] १. ऐसा साँप जिसके काटने से प्राणी अवश्य और तुरन्त मर जाय। २. लाक्षणिक रूप में ऐसा व्यक्ति जो दूसरों की बड़ी-से-बडी हानि कर सकता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालसिर  : पुं० [हिं० काल+सिर] जहाज के मस्तूल का ऊपरी सिर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-सूत्र  : पुं० [उपमित० स०] अट्ठाइस मुख्य नरकों में से एक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल-सेन  : पुं० [ब० स०] पुराणानुसार वह डोम जिसने राजा हरिशचन्द्र को मोल लिया था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालांग  : वि० [काल-अंग, ब० स०] काले रंग का। काला। पुं० खड्ग। तलवार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालांजन  : पुं० [काल-अंजन, कर्म० स०] एक प्रकार का सुरमा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालांतर  : पुं० [काल-अंतर, मयू० स०] १. अंतराल। २. उल्लिखित समय से भिन्न या बाद का समय। वि० कुछ समय के बाद अपना प्रभाव दिखलानेवाला। जैसे—कालांतर विष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालांतर-विष  : पुं० [ब० स०] ऐसा जन्तु या प्राणी जिसके काटने पर विष कुछ दिन बाद अपना प्रभाव दिखाता हो। जैसे—पागल कुत्ता, चूहा आदि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालांतरित  : वि० [सं० काल-अंतरित, तृ० त०] १. जिसका काल या समय टल गया हो। २. जिसे बने बहुत समय हो गया हो। पुराना। जैसे—कालांतरित पुराण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काला  : वि० [सं० काल, कालक, पा० बँ० कालो, प्रा० कालअ, उ० कला, पं० काला, सि० कारो, ग० कालू, मरा० काला] [स्त्री० काली] १. जो काजल, कोयले या धूएँ के रंग का हो। कृष्ण। श्याम। जैसे—काला कपड़ा, काला आदमी। पद—काले सिर का=जिसके बाल अभी न पके हों। हष्ट-पुष्ट या नौजवान आदमी। २. जिसमें प्रकाश न हो। प्रकाश रहित। प्रकाश-शून्य। जैसे—काली कोठरी,काली गुफा। ३. (व्यक्ति) जिसके मन में कपट या छल हो। जैसे—काला हृदय। ४. अस्वच्छ। मलिन। ५. अनुचित या बुरा। निंदनीय। जैसे—काली करतूत। ६. जिसका संबंध किसी अनुचित या निषिद्ध बात से हो। जैसे—काली सूची (दे०)। ७. जिस पर किसी प्रकार का कलंक या लांछन लगा हो। जैसे—यह काला मुंह लेकर अब कहाँ जाओगे। ८. बहुत ही अनर्थकारी, भीषण या विकट। जैसे—काला चोर। पद—काले कोसों=बहुत दूर। जैसे—उनका घर तो काले कोसों है। पुं० [सं० कालसर्प] १. काला साँप, जो बहुत जहरीला होता है। काल-सर्प। २. साधारणतः कोई सांप। विशेष—प्रायः लोग साँप का नाम अशुभ समझते हैं, इसी से प्रायः उसे काला कहते हैं। जैसे—उसे काले ने डस लिया है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काला-बाजार  : पुं० =काल-ज्वर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काला आदमी  : पुं० [हिं०] १. गरम देश का रहनेवाला व्यक्ति, जिसका रंग काला या गेहुँआ होता है। विशेष—यह पद गोरी जाति विशेषतः अंगरेज लोग भारतीयों सामियों आदि के लिए उपेक्षा और घृणा सूचित करने के लिए प्रयुक्त करते थे। २. कुत्सित और लांछित व्यक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाकंद  : पुं० [हिं० काला+सं०कद ?] एक प्रकार का धान, जिसका चावल सैकड़ों वर्षों तक रक्खा जा सकता है। पुं० =कलाकंद।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाकलूटा  : वि० [हिं० काला+कलूटा] बहुत अधिक काला और कुरूप।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाक्षर  : पुं० [सं० काल-अक्षर, कर्म० स०] [वि० कालाक्षरिक कालाक्षरी] ऐसे गूढ़ अथवा विकट अक्षर या लेख आदि पढ़कर उनका अर्थ समझ में न पढ़ सकता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाक्षरिक  : वि० [सं० कालाक्षर+ठक्-इक]=कालाक्षरी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाक्षरी (रिन्)  : वि० [सं० कालाक्षर+इनि] (व्यक्ति) जो बहुत ही अस्पष्ट, गुप्त, गूढ़ या रहस्यपूर्ण लेख आदि पढ़कर उनका अर्थ समझ लेता हो। जैसे—कालाक्षरी पंडित।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालागुरु  : पुं० [सं० काल-अगुरु, कर्म० स०] काला अगर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाग्नि  : पुं० [काल-अग्नि, कर्म० स०] १. सृष्टि का नाश करनेवाली अग्नि। प्रलयकाल की अग्नि। २. इस अग्नि के अधिष्ठाता देवता। रुद्र। ३. पंचमुखी रुद्राक्ष। विशेष—अग्नि शब्द सं० में पुं० होने पर भी हिन्दी में स्त्री माना जाता है। इसलिए पहले अर्थ में कालाग्नि का प्रयोग भी हिन्दी में प्रायः स्त्रीलिंग रूप में ही होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाग्रह  : पुं० =कारावास (जेल)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाचोर  : पुं० [हिं० काला+चोर] १. बहुत बड़ा और नामी चोर। २. बहुत बुरा आदमी। जैसे—हम चाहें तो अपनी चीज काले चोर को दे दें।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाजीरा  : पुं० [हिं० काला+जीरा] १. एक प्रकार का जीरा, जिसका रंग काला होता है, और जो सफेद जीरे से अधिक सुगंधित होता है। स्याह जीरा। पर्वत जीरा। २. एक प्रकार का बढ़िया धान और उसका चावल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालातिपात  : पुं० [काल-अतिक्रमण, ष० त०] १. समय का उचित या नियत से अधिक बीतना। २. दे० ‘कालातिक्रमण’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालातिरेक  : पुं० [काल-अतिरेक, ष० त०] कालातिपात।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालातिल  : पुं० [हिं० काला+तिल] वह तिल, जिसके दाने काले होते हैं (सफेद तिल से भिन्न)। मुहावरा—काला तिल चबाना=किसी के अधीन दबैल या वशवर्ती होना। २. शरीर के किसी अंग में होनेवाला वह छोटा काला दाग, जो देखने में तिल के समान जान पड़ता है। विशेष—सामुद्रिक में भिन्न-भिन्न अंगों के विचार से यह शुभ और अशुभ माना जाता है। साधारणतः स्त्रियों के कुछ विशिष्ट अंगों पर यह उनका सौंदर्य बढ़ाता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालातीत  : वि० [सं० काल-अतीत, द्वि० त०] १. जो काल से परे हो। २. जिसका नियत या निर्धारित समय बीत गया हो और इसलिए जिसका महत्त्व या वैधता न रह गई हो। (टाइम वार्ड)। पुं० न्याय में पाँच प्रकार के हेत्वाभासों में से एक जिसमें अर्थ किसी देश काल के विचार से ठीक न हो और इसी कारण हेतु असत् ठहरता हो। (यह एक प्रकार का बाघ है जो साध की अप्रामाणिकता या अभाव सूचित करता है)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालात्मा (त्मन्)  : पुं० [काल-आत्मन्, ब० स०] परमात्मा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालादाना  : पुं० [हिं० काला+दाना] १. एक लता, जिसमें नीले रंग के फूल लगते हैं। २. उक्त लता के बीज जो बहुत ही रेचक होते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालादेव  : पुं० [हिं० काला+फा० देव] १. बहुत ही काले रंग का एक कल्पित देव या विशालकाय व्यक्ति। २. काले रंग का बहुत हष्ट-पुष्ट व्यक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाधतूरा  : पुं० [हिं० काला+धतूरा] १. एक प्रकार का बहुत विषैला धतूरा, जिसके फल और बीज काले होते है। २. उक्त धतूरे के फल या बीज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाध्यक्ष  : पुं० [काल-अध्यक्ष, ष० त०] सूर्य जिनके उदय और अस्त से काल या समय का ज्ञान होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काला नमक  : पुं० [हिं० काला+नमक] हर्रे, हड़, बहेड़े सज्जी आदि के योग से बनाया जानेवाला एक प्रकार का नमक, जो रंग में काला तथा पाचक होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालानल  : पुं० [काल-अनल, कर्म० स०]=कालाग्नि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काला-नाग  : पुं० [हिं० काला+नाग] १. काले रंग का नाग या साँप, जो बहुत जहरीला होता है। २. ऐसा कुटिल या धूर्त व्यक्ति जो औरों की बहुत हानि कर सकता हो। खोटा या दुष्ट व्यक्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालानुक्रम  : पुं० [सं० काल-अनुक्रम, ष० त०] [वि० कालानुक्रमिक]=काल-क्रम।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काला पहाड़  : पुं० [हिं० काला+पहाड़] १. बहुत भारी और विकट वस्तु। २. बहुत दुस्साध्य काम। ३. बहुत असह्र कष्ट या वेदना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालापान  : पुं० [हिं० काला+पान] ताश के पत्तों में हुक्म नामक रंग।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालापानी  : पुं० [हिं० काला+पानी] १. बंगाल की खाड़ी का वह अंश, जहाँ का पानी काला होता है। २. अंड मन नामक द्वीप जहाँ ब्रिटिश शासन के वे कैदी रखे जाते थे जिन्हें आजीवन देश निकाले का दंड दिया जाता था और जिन्हें जहाज पर उक्त कालापानी पार करना पड़ता था। ३. देश-निकाले या द्वीपान्तर वास का दंड। ४. मदिरा। शराब।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काला-मोहरा  : पुं० [हिं० काला+मोहरा] सींगिया की जाति का एक पौधा,जिसकी जड़ विषैली होती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालायनी  : स्त्री० [सं० काल+फक्-आयन, ङीष्] दुर्गा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालावधि  : स्त्री० [काल-अवधि, ष० त०] कोई काम करने या होने के लिए नियत निर्धारित या निश्चित किया हुआ समय। अवधि। (पीरियड)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाशुद्धि  : स्त्री० [काल-अशुद्धि, ष० त०] ऐसा काल, समय या स्थिति जो किसी प्रकार अशुद्ध या दूषित होने के कारण शुभ कामों के लिए वर्जित हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाशौच  : पुं० [काल-अशौच, मध्य० स०] पिता, माता, गुरुजनों आदि के मरने पर होनेवला अशौच जो श्राद्ध आदि हो चुकने के बाद भी प्रायः एक वर्ष तक चलता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालास्त्र  : पुं० [काल-अस्त्र, कर्म० स०] ऐसा अस्त्र, जिसके प्रहार से शत्रु का घात या विनाश निश्चित हो। काल के मुख में पहुँचानेवाला अस्त्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालाहणि  : वि० [सं० काल+अहन्] १. प्रलयकालीन। २. भयानक। भीषण। उदाहरण—कठ्ठी बे घटा करे कालाहणि।—प्रिथीराज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिंग  : वि० [सं० कलिंग-अण्] १. कलिंग देश में उत्पन्न होनेवाला। २. कलिंग संबंधी। पुं० १. कलिंग देश का निवासी। २. कलिंग देश का राजा। ३. हाथी। ४. साँप। ५. तरबूज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिंगड़ा  : पुं० [सं० कलिंग०] संपूर्ण जाति का एक राग, जिसके गाने का समय रात का अंतिम पहर माना गया है। कलिंगड़ा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिंजर  : पुं० [सं० कालंजर] बाँदा जिले के पास का एक प्रदेश और उससे संलग्न एक पर्वत-श्रेणी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिंद  : वि० [सं० कलिंद या कालिंदी+अण्] कलिंद या कालिंदीसंबंधी। पुं० [कालि=जलराशि√या (देना)+क, पृषो० मुम्०] तरबूज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिंदक  : पुं० [सं० कालसिंद+कन्] तरबूज।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिंदी  : पुं० [सं० कलिंद+अण्-ङीष्०] १. यमुना नदी जो कलिंद पर्वत से निकली है। २. लाल निसोथ। ३. उड़ीसा का एक वैष्णव सम्प्रदाय। ४. संगीत में ओड़व जाति की एक रागिनी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिंद्री  : स्त्री०=कालिंदी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालि  : क्रि० वि० [सं० कल्य०] १. आज से पहले वाले दिन। २. आज के बाद आनेवाला दिन। कल (देखें)।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिक  : वि० [सं० काल+ठञ्-इक०] १. किसी विशिष्ट काल से संबंध रखनेवाला। जैसे—पूर्वकालिक, मध्यकालिक। २. उचित, उपयुक्त या नियत समय पर होने वाला। ३. रह-रहकर कुछ निश्चित समय पर होनेवाला। (पीरिआँडिक) पुं० १. नाक्षत्र मास। २. काला चंदन। ३. कौंच पक्षी। ४. कलेजा (डिं०) ५. ऐसी पत्रिका या समाचार-पत्र जिसका प्रकाशन नियमित रूप से होता है। तथा जिसमें प्रतिदिन के अथवा उस काल से संबंधित समाचार या सूचनाएँ रहती हो । (पीरिआडिकल जरनल)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिका  : स्त्री० [सं० काल+ठन्-इक, टाप्] १. कालापन। २. कालारंग। ३. स्याही, विशेषतः काली स्याही। ४. कालिमा। ५. बादलों की घटा। मेघ-माला। ६. काली मिट्टी। ७. काले रंग की हर्रे। ८. जटामासी। ९. शरीर पर के रोओं की पंक्ति। रोमावली। १॰. आँख की पुतली। ११. आँख में का काला तिल। १२. दुर्गा की एक मूर्ति जो रण-क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी मानी गई है। १३. चार वर्ष की वह बालिका, जिसका किसी उत्सव पर उक्त देवी के रूप में पूजा की जाती हो। १४. दक्ष की कन्या का नाम। १५. मादा बिच्छू। १६. बिच्छुआ नामक घास। १७. कौए की मादा। १८. काकोली। १९. श्यामा नामक पक्षी। २॰. कान की एक विशेष नस। २१. मादा श्रृंगाल। सियारिन। गीदड़ी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिका-पुराण  : पुं० [मध्य० स०] हिन्दुओं का एक प्रसिद्ध उपपुराण जिसमें कालिका देवी के माहात्म्य का वर्णन है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालि-काला  : क्रि० वि० [हिं० कालि+काल] कदाचित्। कभी। किसी समय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिका-वृद्धि  : स्त्री० [ष० त०] वह ब्याज जो नियमित रूप से तथा निश्चित काल बीतने पर दिया या लिया जाय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिकेय  : पुं० [सं० कालिका+ढक्-एय] दक्ष की कन्या। कालिका से उत्पन्न असुरों की एक जाति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिख  : स्त्री० [सं० कालिका] १. किसी चीज पर जमनेवाला धुएँ का अथवा और किसी प्रकार का काला मैल। २. लाक्षणिक रूप में ऐसी बात या वस्तु, जिससे किसी पर बहुत ही लज्जाजनक रूप में कलंक या धब्बा लगता हो। जैसे—किसी के मुंह पर कालिख लगना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिज  : पुं० [अं०]=कालेज। पुं० [?] एक प्रकार का चकोर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिब  : पुं० [अ०] १. किसी वस्तु का ढाँचा। २. टीन या लकड़ी का वह गोल ढाँचा जिस पर चढ़ाकर टोपियाँ दुरूस्त की जाती हैं। ३. देह। शरीर। ४. दे० ‘कलबूत’।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिमा (मन्)  : स्त्री० [सं० काल+इमानिच्] १. काले होने की अवस्था, गुण या भाव। कालापन। २. अंधकार। अँधेरा। ३. कालिख। ४. कलंक। लांछन।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालिय  : पुं० [सं० क-आ√ली (छिपना)+क] एक बहुत बड़ा और भीषण साँप जो यमुना में रहता था और जिसका दमन कृष्ण ने किया था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली  : स्त्री० [सं० काल+ङीष्] १. चंडी या दुर्गा का एक रूप। कालिका। २. दस महाविद्याओं में से एक। ३. अग्नि की सात जिह्वाओं में से एक। ४. हिमालय की एक नदी। ५. अँधेरी रात। पुं० =कालिय (नाग)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली अंछी  : स्त्री० [देश] एक कँटीली झाड़ी जिसमें पत्तियाँ १२-१३ अंगुल लंबी तथा दाँतेदार होती हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालीची  : स्त्री० [सं० काली√चि (चयन)+ड, ङीष्] वह भवन जिसमें बैठकर यमराज प्राणियों के पाप-पुण्य आदि का विचार करते हैं। यमराज का न्यायालय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली जबान  : स्त्री० [हिं० काली+फा० जबान] ऐसी जबान जिससे निकली हुई अमांगलिक या अशुभ बात प्रायः पूरी उतरती हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली जीरी  : स्त्री० [सं० कणजीर] १. एक प्रकार का पौधा जिसकी फलियों के दाने या बीज ओषधि के रूप में काम आते हैं। बनजीरा। २. उक्त पौधे की फलियों के दाने। कारीजीर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालीदह  : पुं० [सं० कालिय+हिं० दह] वृन्दावन में यमुना का एक दह या कुंड जिसमें कालिय नाग रहा करता था।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालीन  : वि० [सं० काल+ख-ईन] किसी काल-विशेष में होने अथवा उससे संबंध रखनेवाला। जैसे—मध्यकालीन, समकालीन। पुं० [अ०] ऊन सूत आदि का बना हुआ एक प्रकार का मोटा बिछावन जिस पर रंग-बिरंगे बेल-बूटे बने रहते हैं। गलीचा। (प्राचीन भारत में इसे पलिका कहते थे)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली बेल  : स्त्री० [हिं० कालीबेल] १. एक प्रकार की लता जिसमें छोटे छोटे हरे फूल लगते हैं। २. उक्त लता के फूल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली मिट्टी  : स्त्री० [सं० काली+मिट्टी] एक प्रकार की चिकनी काली मिट्टी जो लीपने-पोतने और सिर मलने के काम में आती हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली मिर्च  : स्त्री० [सं० काली+मिर्च] एक प्रसिद्ध पौधे के छोटे गोल दाने, जो स्वाद में मिर्च की तरह कडुए होने के कारण मसाले के काम में आते हैं। गोलमिर्च।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालीय  : वि० [सं० काल+छ-ईय] १. काल-संबंधी। २. काल का। ३. दे० कालीन। पुं० काला चंदन। पुं० =कालिय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालीयक  : पुं० [सं० कालीय+कन्] १. पीला चंदन। २. केसर। ३. दारू हल्दी। ४. काली अगर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली शीतला  : स्त्री० [सं० काली+सं० शीतला] एक प्रकार की शीतला(चेचक) जिसमें शरीर पर मोटे-मोटे काले दाने निकलते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली सूची  : स्त्री० [सं० व्यस्त पद] १. ऐसे लोगों की सूची जिन्होंने कुछ अवैधानिक नियम-विरुद्ध या निंदनीय कार्य किये हों। २. ऐसे लोगों की सूची जो किसी दृष्टि या विचार से परित्यक्त माने गये हों। ३. अपराधी या दंडित व्यक्तियों की सूची। (ब्लैक लिस्ट)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काली हर्रे  : स्त्री० [सं० काली+हर्रे] जंगी हर्रे। छोटी हर्रे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालुष्य  : पुं० [सं० कलुष+ष्यञ्] कलुष या काले होने की अवस्था या भाव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालू  : स्त्री० [?] सीप के अंदर रहनेवाला कीड़ा। लोना। कीड़ा। वि०=काला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालेज  : पुं० [अं०] वह विद्यालय जहाँ कुछ या कई विषयों की पढ़ाई अंग्रेजी ढंग से बी० ए० या एम० ए० तक होती हो। महाविद्यालय।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालेय  : वि० [सं० कलि+ढक्-एय] कलियुग में होने अथवा उससे संबंध रखनेवाला। पुं० [कला+ढक्-एय] १. यकृत्। २. काले चंदन की लकड़ी। ३. केसर
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालेयक  : पुं० [सं० कालेय+क] १. काला चंदन। २. चंदन की लकड़ी। ३ पीलिया की तरह का एक रोग। ४. कुत्ता
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालेश  : पुं० [काल-ईश, ष० त०] १. सूर्य। २. शिव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालोंच  : स्त्री०=कलौंछ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालोनी  : स्त्री० [अं०] उपनिवेश (दे०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कालौंछ  : स्त्री० कलौंछ (या कलौंस)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल्प  : वि० [सं० कल्प+अण्] कल्प संबंधी। पुं० कचूर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल्पनिक  : वि० [सं० कल्पना+ठञ्-इक] १. कल्पना संबंधी। २. (बात या विषय) जो केवल कल्पना से निकला या बना हो। अर्थात् जिसका कोई वास्तविक आधार न हो। कल्पित। फरजी। मनगढंत। (इमैजिनरी) ३. कल्पना करनेवाला। (व्यक्ति)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल्य  : वि० [सं० काल+यत्] १. ठीक समय पर होनेवाला। सामयिक। २. [कल्प+अण्] प्रातःकाल संबंधी। ३. शुभ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल्ह  : क्रि० वि० पुं० =कल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काल्हि  : क्रि० वि०=कल।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काव  : सर्व०=कोई।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कावर  : पुं० [सं० काम, प्रा० काव, गु० मरा० कावड़] नाविकों की एक प्रकार की छोटी बरछी जिससे वे बड़ी-बड़ी मछलियों का शिकार करते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कावरी  : पुं० [?] रस्सी का फंदा जिसमें कोई चीज बाँधी जाय़। (लश०।)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कावा  : पुं० [फा०] घोड़े को एक वृत्त में चक्कर देने की क्रिया या भाव। मुहावरा—कावा काटना=(क) घोड़े का (चलने या दौड़ने का अभ्यास करने के लिए) एक वृत्त में चक्कर लगाना। (ख) किसी अनुचित उद्देश्य की सिद्धि के लिए बराबर किसी स्थान पर या उसके आस-पास आते-जाते रहना। कावे देना=घोड़े को चलने या दौड़ने का अभ्यास कराने के लिए एक वृत्त में चक्कर खिलाना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कावेर  : पुं० [क=सूर्य-आ=ईषत्-वेर=अंग, ब० स०] केसर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कावेरी  : स्त्री० [सं० क-जल-वेर, ब० स० कवेर+अण्, ङीष्] १. दक्षिण भारत की एक प्रसिद्ध नदी। २. रंडी। वेश्या। ३. हल्दी। ४. संपूर्ण जाति की एक रागिनी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काव्य  : पुं० [सं० कवि+ष्यञ्] १. कविता (दे०) २. व्यापक अर्थ में किसी कवि की वह पद्यात्मक साहित्यिक रचना जिसमें ओजस्वी कोमल और मधुर रूप में ऐसी अनुभूतियाँ कल्पनाएँ और भावनाएँ व्यक्ति की गई हों। जो मन को मनोवेगों और रसों से परिपूर्ण करके मुग्ध करनेवाली हों। (पोएम)। विशेष—(क) काव्य हमारे यहाँ दो प्रकार का माना गया है-गद्यकाव्य और पद्यकाव्य परन्तु साधारणतः लोक में पद्यकाव्य ही काव्य कहलाता है। (ख) वर्णित विषय तथा आकार के विषय से पद्यकाव्य दो प्रकार का कहा गया है-खण्डकाव्य और महाकाव्य। (ग) प्रभाव या फल के विचार से अथवा रस का उपभोग करने वाली इन्द्रियों के विचार से भी इसके दो भेद माने गये हैं-दृश्य काव्य और श्रव्य काव्य। ३. ऐसा ग्रन्थ या पुस्तक जिसमें उक्त प्रकार की रचना हो। ४. रोला छंद का एक भेद जिसके प्रत्येक चरण की ग्यारहवीं मात्रा लघु रहती है। इसकी छठीं आठवीं अथवा दसवीं मात्रा पर यति होना चाहिए। ५. [कवि+ण्य] शुक्राचार्य। ६. तामस मन्वन्तर के एक ऋषि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काव्य-लिंग  : पुं० [ष० त०] साहित्य में एक अलंकार जिसमें किसी बात को सिद्ध करने के लिए प्रमाण स्वरूप कोई कारण बतलाया जाता है। उदाहरण—पुत्र मेरे परवश हो, मंत्र में पडे हैं जब कृष्ण और कृष्णा के तब तो नियति अवलम्ब अब मेरी है।—लक्ष्मीनारायण मिश्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काव्य-हास  : पुं० [ब० स०]=प्रहसन।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काव्या  : स्त्री० [सं० √कव् (वर्णन करना)+ण्यत्, टाप्] १. अक्ल। बुद्धि। २. पूतना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काव्यार्थापत्ति  : स्त्री० [काव्०-अर्थापत्ति, ष० त०] साहित्य में एक अलंकार जिसमें किसी दुष्कर अर्थ की सिद्धि के वर्णन से साधारण अर्थ की सिद्धि स्वतः होने का कथन होता है। उदाहरण—तुम माता हो कि अन्य हो, पूजनीया मेरी हो सदैव जाति नारी की मातृभाव से ही पूजता मैं रहा।—लक्ष्मीनारायण मिश्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश  : पुं० [सं०√काश् (दीप्ति)+अच्] १. काँस (दे०) नामक घास। २. खाँसी। ३. एक प्रकार का चूहा। ४. एक प्राचीन मुनि। स्त्री० [तु०] फलों आदि का कटा हुआ लंबा टुकड़ा। अव्य० [फा०] यदि ईश्वर ऐसा करे या करता। जैसे—काश आप वहाँ न गये होते।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काशि  : पुं० [सं०√काश्+इन्] १. मुट्ठी। २. सूर्य। ३. ज्योति। स्त्री० १. प्रकाश। २. काशी। ३. एक प्राचीन जनपद जिसकी राजधानी वाराणसी थी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काशिक  : वि० [सं० काशि+ठञ्-इक] [स्त्री० काशिका] १. प्रकाश करनेवाला। २. प्रकाश से युक्त। प्रकाशमान् प्रदीप्त।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काशिका  : स्त्री० [सं०√काश्+णिच्+ण्वुल्-अक, टाप्] १. काशी नगरी या पुरी। २. पाणिनीय व्याकरण की एक प्रसिद्ध टीका या वृत्ति।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काशि-राज  : पुं० [ष० त०] १. काशी का राजा। २. राजा दिवोदास जो काशी के पहले राजा कहे गये हैं। ३. धन्वन्तरि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काशी  : स्त्री० [सं० काशि+ङीष्] उत्तर भारत की एक प्रसिद्ध नगरी, जो भारतीय संस्कृति का प्रधान केन्द्र है और जिसे आजकल बनारस या वाराणसी कहते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काशी-करवट  : पुं० [सं० काशी-करपत्र, प्रा० करवत] काशीस्थ एक तीर्थ-स्थान जहाँ प्राचीन काल में लोग आरे के नीचे कटकर अपना प्राण देना बहुत पुण्य समझते थे। उदाहरण—सूरदास प्रभु जो न मिलेगे लैहों करवट काशी।—सूर। मुहावरा—काशी करवट लेना=काशी में पहुँचकर वहाँ के प्रसिद्ध आरे से अपना गला इस उद्देश्य से काटना कि अगले जन्म में हमारी कामना पूर्ण हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काशीफल  : पुं० [सं० ] कुम्हड़ा। कद्दू।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्त  : स्त्री० [फा०] १. खेती-बारी का काम। कृषि। २. किसी दूसरे की जमीन कुछ समय तक जोतने-बोने के कारण किसान को उस पर प्राप्त होनेवाला अधिकार। मुहावरा—(किसी जमीन पर) काश्त लगना=वह अवधि पूरी होना जिसके बाद किसी किसान को दूसरे की भूमि पर स्थायी रूप से उसे जोतने-बोने का अधिकार प्राप्त होता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्तकार  : पुं० [फा०] १. खेती-बारी करनेवाला व्यक्ति। किसान। खेतिहर। २. वह व्यक्ति जिसने जमींदार को लगान देकर उसकी जमीन पर खेती करने का स्वत्व प्राप्त किया हो (टेंनेट)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्तकारी  : वि० [फा० काश्तकार से] १. काश्तकार संबंधी। काश्तकार का। जैसे—काश्तकारी हक। २. खेती-बारी संबंधी। स्त्री० १. काश्तकार होने की अवस्था या भाव। २. काश्तकार का काम। खेती-बारी। ३. वह भूमि जिसपर काश्तकार का अधिकार हो। ४. काश्तकार का उक्त अधिकार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्मरी  : स्त्री० [सं०√काश् (चमकना)+वनिप्, ङीष्, र, आदेश, पृषो० मत्व] गंभारी नामक वृक्ष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्मीर  : पुं० [सं० कश्मीर+अण्] १. एक देश जो भारतीय संघ के अन्तर्गत पश्चिम उत्तर सीमा पर स्थित है और जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। कश्मीर। २. पुष्करमूल। ३. केसर। ४. सुहागा। वि० कश्मीर का। कश्मीर-संबंधी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्मीरा  : पुं० [सं० काश्मीर से] १. एक प्रकार का ऊनी कपड़ा। २. एक प्रकार का अंगूर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्मीरी (रिन्)  : वि० [सं० काश्मीरी+इनि] १. कश्मीर में उपजने होने या बननेवाला। २. जिसका संबंध कश्मीर राज्य से हो। कश्मीर का। पुं० कश्मीर देश का निवासी। स्त्री० [कश्मीर+अच्, ङीष्] कश्मीर देश की भाषा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्यप  : वि० [सं० कश्यप+अण्] १. कश्यप प्रजापति के वंश या गोत्र का। २. कश्यप संबंधी। पुं० १. कश्यप ऋषि का गोत्र। २. वह जो उक्त गोत्र का हो। ३. एक बुद्ध का नाम जो गौतम बुद्ध से पहले हुए थे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्यपी  : स्त्री० [सं० काश्यप+ङीष्] १. पृथ्वी। भूमि। २. प्रजा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काश्यपेय  : पुं० [सं० कश्यप+ढक्-एय] १. सूर्य। २. अदिति के वंशज। ३. गरुड़।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष  : पुं० [सं० √कष् (कसना)+घञ्] सान का पत्थर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काषाय  : वि० [सं० कषाय+अण्] १. आम, कटहल, बहेड़े आदि कसैली वस्तुओं के रंग से रँगा हुआ। २. गेरू के रंग में रँगा हुआ। गेरूआ। जैसे—काषाय वस्त्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठ  : पुं० [सं०√काश्+क्थन्] १. वृक्ष की लकड़ी। काठ। २. ईधन।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठ-कदली  : स्त्री० [उपमित० स०] कठकेला। (दे०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठ-कीट  : पुं० [मध्य० स०] वह कीड़े जो काठ में लगते हों। जैसे—घुन, दीमक आदि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठ-तक्षक  : पुं० [ष० त०] १. लकड़हारा। २. बढ़ई।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठ-लेखक  : पुं० [ष० त०] घुन नाम का कीड़ा जो लकड़ी में छोटे-छोटे छेद कर देता है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठा  : स्त्री० [सं० काष्ठ+टाप्] १. पथ। मार्ग। २. सीमा। ३. ऊँचाई आदि की बहुत बढ़ी हुई मात्रा या सीमा। ४. उत्कर्ष। ५. ओर। दिशा। ६. चंद्रमा की कला। ७. काल या समय का एक मानदंड जो १८. पल का होता है। ८. कश्यप ऋषि की स्त्री जो दक्ष की कन्या थी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठिक  : वि० [सं० का्ष्ठ+ठन्+इक] काष्ठ-संबंधी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठिका  : स्त्री० [सं० का्ष्ठ+ङीष्+कन्, टाप्, ह्रस्व] १. काठ या लकड़ी का छोटा टुकड़ा। २. चैली।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काष्ठीय  : वि० [सं० काष्ठ+छ-ईय] १. काठ या लकड़ी का बना हुआ (वुडन) २. जिसका संबंध काष्ठ से हो। ३. जैसे—काष्ठीय व्यापार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कास  : पुं० [सं०√कास् (खाँसना)+घञ्] १. खाँसी। २. शोभांजन। सहिजन। पुं० =काँस।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कास-कंद  : पुं० [मध्य० स०] १. हाथ-डेढ़ हाथ ऊँचा एक पौधा जो देखने में हरा-भरा होता है। २. उक्त पौधे के बीज जो दवा के काम आते हैं। वि० उक्त पौधे के फूल के रंग का गहरा नीला। पुं० १. उक्त फूल का रंग। गहरा नीला रंग। २. नीले रंग का कबूतर।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कास-मर्द  : पुं० [सं० कास√मृद् (चूर्ण करना)+अण्, उप० स०] कसौंजा या कसौंदा (पौधा)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कासर  : पुं० [सं० क-आ√स् (गति)+अच्] [स्त्री० कासरी] भैंसा। महिष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कासा  : पुं० [फा० कासः] १. प्याला। कटोरा। २. भिक्षापात्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कासार  : पुं० [सं० कास् (चमकना)+आरन् या क-आसार, ब० स०] १. छोटा तालाब। तलैया। ताल। २. दंडक वृत्त का एक भेद जो २॰ रगण का होता है। पुं० =कसार।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कासालु  : पुं० [सं०√कास्+आलुच्] एक प्रकार का कंद या आलू। वि०=कसैला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कासिद  : वि० [अ०] १. इरादा या विचार करनेवाला। २. सीधे रास्ते जानेवाला। ३. संदेशा ले जानेवाला। ४. अप्रचलित। ५. खोटा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कासी  : स्त्री०=काशी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कासीस  : पुं० [सं० कासी√सो (समाप्त करना)+क] हीरा-कसीस।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कासु  : वि० [सं० कस्य हिं० का=कौन] १. किसका। २. किसको। किसे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काह  : क्रि० वि० [सं० कः को] क्या पुं० [फा०] सूखी घास।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहल  : पुं० [सं० कु-हल, ब० स० कु=कादेश] [स्त्री० काहली] १. मुरगा। २. नर बिल्ली। बिल्ला। बिलार। ३. अव्यक्त या अस्पष्ट शब्द। ४. जोर का शब्द। हुंकार। ५. एक प्रकार का बड़ा ढोल। वि०=काहिल।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहलि  : पुं० [सं० क-आ√हल् (देना)+इन्] शिव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहलियाँ  : वि० [सं० कातर या फा० काहिल] १. कायर। डरपोक। २. अधीर। उदाहरण—डर ओले प्री रखियउ, मूँधा काहलियाँह।—ढो० मा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहली  : स्त्री० [सं० काहलि+ङीष्] युवती।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहा  : क्रि० वि० [सं० कथं<प्रा०कत्थ>काहा] किस तरह या प्रकार का। कैसा। उदाहरण—मानसरोदक देखिए काहा।—जायसी। सर्व० किसको। किसे। उदाहरण—पुनि रूपवतं बखानौ काहा-जायसी। वि०=कैसा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहि  : सर्व० [हिं० काँह] १. किसको। किसे। २. किससे।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहिल  : वि० [फा०] १. धीरे-धीरे या सुस्ती से काम करनेवाला। सुस्त। २. मंद बुद्धिवाला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहिली  : स्त्री० [फा०] १. काहिल होने की अवस्था या भाव। सुस्ती।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काही  : वि० [फा० काह-सूखी घास] घास के रंग का। कालापन लिये हुए हरा। पुं० उक्त प्रकार का रंग। स्त्री०=काई।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहु  : सर्व०=काहु।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहू  : सर्व० [सं० कः अथवा हिं० का+हू (प्रत्यय)] १. किसी। उदाहरण—जो काहू की देखहिं विपत्ती। २. किसी को। पुं० [फा०] गोभी की तरह का एक पौधा जिसके बीज दवा के काम आते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काहे  : क्रि० वि० [सं० कथं, प्रा० कहँ] किसलिए। क्यों। पद—काहे को (क) किस अधिकार से। (ख) किस कारण या उद्देश्य से। उदाहरण—काहे को मेरे घर आये हो।—गीत।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
लौटें            मुख पृष्ठ